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'उम्मीद खो दी थी, 7 साल कानूनी लड़ाई लड़ी'; बंगाल में टीचर की जॉब पाने वालों ने ऐसे बयां किया अपना संघर्ष

बंगाल जॉब स्कैम: हाईकोर्ट के आदेश पर टीचरों को मिली राहत, अब कर रहे नौकरी (सांकेतिक तस्वीर)

बंगाल जॉब स्कैम: हाईकोर्ट के आदेश पर टीचरों को मिली राहत, अब कर रहे नौकरी (सांकेतिक तस्वीर)

West Bengal News: पश्चिम बंगाल में टीचर की नौकरी कर रहे उन्हीं में से एक 37 वर्षीय तन्मय बिस्वास ने कहा कि मुझे नियुक्त ...अधिक पढ़ें

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में जॉब घोटाले के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर शिक्षक पद के लिए योग्य उम्मीदवारों को राहत मिल गई है. अप्वाइंटमेंट लेटर पा चुके कई टीचरों ने कहा कि उन्होंने उम्मीद खो दी थी और उन्होंने सालों तक इसके लिए संघर्ष किया. पश्चिम बंगाल में टीचर की नौकरी कर रहे उन्हीं में से एक 37 वर्षीय तन्मय बिस्वास ने कहा कि मुझे नियुक्ति पत्र मिल चुका है और अब मैं प्राथमिक विद्यालय का शिक्षक हूं. मैंने इतने सालों तक इसका इंतजार किया है. उन्होंने आगे कहा कि नौकरी नहीं होने की वजह से शादी नहीं हो रही थी. अब जब मेरे पास सरकारी नौकरी है तो मेरे परिवार ने मेरे लिए दुल्हन की तलाश शुरू कर दी है. मेरी शादी का समय हो गया है. पहले ही देर हो चुकी है.

दरअसल, 37 वर्षीय तन्मय बिस्वास पश्चिम बंगाल के उन टीचरों में से हैं, जिन्होंने शिक्षक भर्ती घोटाले के विरोध में सड़कों पर उतरने के बाद और अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के रूप में नियुक्ति पत्र प्राप्त कर लिया है. 13 जून को जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय की सिंगल बेंच ने 2014 में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के माध्यम से हायर किए गए 273 प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को बर्खास्त करने का आदेश दिया था और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच का भी आदेश दिया. बाद में कई आदेशों में न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने पूर्व की नियुक्तियों में विसंगतियों को दूर करने के लिए पूरे पश्चिम बंगाल में 339 शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश दिया.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने ऐसे कई उम्मीदवारों से बात की है, जिन्हें शिक्षक नियुक्त किया गया है और जो सितंबर के आखिरी सप्ताह से ड्यूटी करने लगे हैं. तन्मय विश्वास नादिया जिले के कृष्णानगर 1 ब्लॉक के एक स्कूल में प्राथमिक टीचर के रूप में नौकरी शुरू कर चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं क्या कह सकता हूं? कोर्ट के आदेश से अभिभूत हूं. जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय मेरे लिए भगवान हैं. मैं लगभग उम्मीद खो चुका था. 37 साल की उम्र में मेरे पास सरकारी नौकरी पाने के लिए सिर्फ तीन साल बचे थे. हालांकि, मैं एक योग्य उम्मीदवार था और वैकेंसीज थीं. हमें इस नौकरी को पाने के लिए सात साल संघर्ष करना पड़ा.’

कुछ समय पहले तक कृष्णानगर शहर से पांच किलोमीटर दूर जावा गांव के निवासी बिस्वास पश्चिम बंगाल पुलिस में कांस्टेबल की नौकरी के लिए आवेदन करने वालों को ट्यूशन टीचर के रूप में पढ़ाते थे. अपने संघर्ष के बारे में बात करते हुए बिस्वास ने कहा 2015 में उन्होंने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के लिए आवेदन किया था. 2016 में नतीजे आए थे, लेकिन वह क्वालिफाई नहीं कर पाए. बाद में यह सामने आने के बाद कि टेस्ट पेपर में छह प्रश्न गलत थे. बिस्वास कई उम्मीदवारों में से थे, जिन्होंने 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर उनकी उम्मीदवारी पर विचार करने के लिए कहा था.

बिस्वास ने कहा, ‘मैंने कुछ उम्मीदवारों से मुलाकात की, जो मेरे जैसी ही स्थिति में थे. वकीलों की फीस के लिए पैसे जमा किए और केस लड़ने का फैसला किया.’ उन्होंने आगे कहा कि वे हर सप्ताह कोलकाता सुनवाई के लिए जाते थे और देर रात ट्रेन से नादिया वापस लौटते थे. कोलकाता से 100 किमी से अधिक दूर श्यामबाजार की रहने वालीं 40 वर्षीय अनिंदिता डी सेन भी उन्हीं उम्मीदवारों में से एक हैं. सेन अब एपीजे अब्दुल कलाम इंग्लिश मीडियम स्कूल की टीचर हैं, जहां उन्हें 27 सितंबर को एक प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया. उन्होंने कहा कि जब उनकी उम्र 40 साल हुई, तो उन्होंने सरकारी नौकरी की उम्मीद खो दी. सेन ने 2005 में प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान (पीटीटीआई) के लिए परीक्षा पास की थी. फिर उन्होंने 2014 में टीईटी की परीक्षा पास की थी.

Tags: Kolkata, West bengal

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