MP-CG के बैंकों में करीब साढ़े 3 खरब रुपए का कालाधन

MP-CG के बैंकों में करीब साढ़े 3 खरब रुपए का कालाधन
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मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में ब्लैकमनी को व्हाइटमनी में तब्दील करने की योजना आईडीएस यानी आय घोषणा योजना-2016 के फ्लॉप होने की आशंका ने आयकर विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है. वजह है दोनों राज्यों में उम्मीद के मुताबिक रिस्पांस नहीं मिलना.

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मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में ब्लैकमनी को व्हाइटमनी में तब्दील करने की योजना आईडीएस यानी आय घोषणा योजना-2016 के फ्लॉप होने की आशंका ने आयकर विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है. वजह है दोनों राज्यों में उम्मीद के मुताबिक रिस्पांस नहीं मिलना.

विभाग ने अब ब्लैकमनी रखने वालों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करते हुए दो टूक चेतावनी दी है कि काले को सफेद करने का आखिरी मौका है. 30 सितम्बर के बाद किसी भी दशा में योजना की तारीख नहीं बढ़ाई जाएगी. सूत्रों की मानेंं तो एमपी-सीजी में बीते 3 वर्षों में साढ़े 3 खरब रुपये के कालेधन का बैंकों में ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली है.

विदेशों में छिपा कालाधन कब तक आएगा ये अभी भविष्य के गर्त में हैं, लेकिन केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार देश में छिपे कालेधन को निकालने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है. बताया जा रहा है कि सिर्फ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बैंकों में करीब साढ़े 3 खरब ब्लैकमनी छिपी है.



आयकर विभाग की खुफिया खोजबीन में कालेधन के बैंक ट्रांजेक्शन का ये चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. आईटी सूत्रों की माने तो दोनों प्रदेशों में महज 3 वर्षों में संदिग्ध रुप से बैंकों में खरबों रुपए का लेन-देन हुआ.
प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अबरार अहमद ने बताया कि, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त कार्यालय ने अपने-अपने स्तर पर ऐसे 1 लाख पांच हजार लोगों की पहचान की है, जिन्होंने बैंकों से बड़ी रकम का ट्रांजेक्शन किया और आईटीआर में ब्यौरा नहीं दिया. इसमें से 36 हजार ऐसे हैं जिन्होंने बिना पेनकार्ड के लाखों-करोड़ों में लेन-देन किया.

आयकर इंवेस्टीगेशन विंग के महानिदेशक अनूप कुमार जायसवाल के अनुसार, बैंकों में ट्रांजेक्शन से मिली जानकारी पर प्राथमिकता (पी यानी प्रायोरिटी) के आधार चार कैटेगरी बनाई हैं, जिसे पी 1, पी 2,पी 3 और पी 4 नाम दिया है.

P-1 कैटेगरी में 1 करोड़ रुपये और इससे ऊपर के बैंकों में किए गया ट्रांजेक्शन और फिक्स डिपॉजिट शामिल हैं.

P-2 में 50 लाख रुपए से लेकर 99 लाख 99 हजार रुपए तक बैंक ट्रांजेक्शन और फिक्स डिपॉजिट,

P-3 कैटेगरी में 30 लाख रुपए से 49 लाख 99 हजार रुपए तक के बैंक ट्रांजेक्शन और फिक्स डिपॉजिट और

P-4 कैटेगरी में 29 लाख 99 हजार रुपए तक और इससे नीचे के बैंक ट्रांजेक्शन और फिक्स डिपॉजिट शामिल हैं.

आईडीएस को लागू हुए 110 दिन बीत गए हैं, लेकिन उम्मीद के मुताबिक रिस्पांस नहीं मिला है. वजह है योजना में कई खामियां होना.

मसलन कालेधन की घोषणा करने वाला व्यापारी है तो उसे सर्विस टैक्स, कामर्शियल टैक्स, एक्ससाईज या फिर कस्टम ड्यूटी से छूट मिलने का जिक्र नहीं है. नौकरशाह या फिर कोई अफसर है तो करप्शन एक्ट के तहत राहत नहीं मिलेगी.

हालांकि, सरकार ने इस बात का भरोसा दिलाया है कि ब्लैकमनी का खुलासा करने वाले की जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी.

आय घोषणा योजना के तहत कालेधन को सफेद करने में महज 45 प्रतिशत टैक्स का भुगतान करना है, जिसे अगले एक वर्ष में तीन किश्तों में जमा करना है.

फिलहाल, आयकर विभाग ने चेताया है कि आय घोषणा योजना की समय सीमा समाप्त होने के बाद ब्लैकमनी के पकड़े जाने पर 78 फीसदी टैक्स भरने के साथ ही जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है.
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