कोझिकोड विमान हादसे पर ट्वीट करने वाले कांग्रेसी सांसदों पर भड़के हरदीप पुरी, कहा- फैक्ट चेक हो

नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी की फाइल फोटो

हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने अपने ट्वीट (Tweet) में लिखा, "तथ्यों के बारे में पूरी तरह से जाने बिना कांग्रेस पार्टी के कुछ सदस्यों की ओर से उत्साह में कुछ ट्वीट किये गये थे. सांसद (MP) रवनीत बिट्टू एक नैरो बॉडी विमान और एक वाइड बॉडी विमान के बीच अंतर नहीं जानते फिर भी उन्होंने इस विषय पर एक विशेषज्ञ (expert) की तरह से ट्वीट किया!

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    नई दिल्ली. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री (Union Minister of Civil Aviation) हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने ट्वीट कर उन लोगों के खिलाफ एक फैक्ट चेक (Fact Check) की सिफारिश की है, जिन्होंने सिर्फ मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए कोझीकोड त्रासदी (Kozhikode tragedy) पर कई बयान दिए हैं. नागरिक उड्डयन मंत्री ने अपने ट्वीट में लिखा, "उन लोगों के खिलाफ एक फैक्ट चेक किया जाना चाहिये, जिन्होंने केवल मीडिया (Media) का ध्यान खींचने के लिए कोझीकोड दुर्घटना (Kozhikode Accident) पर कई बयान दिये हैं, जबकि इस दुर्घटना में 18 बहुमूल्य मानव जीवन खो गए थे. ये न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि शायद जानबूझकर शरारत के उद्देश्य से किया गया है."

    पुरी ने अपने ट्वीट (Tweet) में लिखा, "तथ्यों के बारे में पूरी तरह से जाने बिना कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के कुछ सदस्यों की ओर से उत्साह में कुछ ट्वीट किये गये थे. सांसद (MP) रवनीत बिट्टू एक नैरो बॉडी विमान और एक वाइड बॉडी विमान के बीच अंतर नहीं जानते फिर भी उन्होंने इस विषय पर एक विशेषज्ञ (expert) की तरह से ट्वीट किया!
    उन्होंने (बाद में) अपना ट्वीट डिलीट करके अच्छा किया."

    शशि थरूर पर भी निशाना, एक सांसद को प्रोटोकॉल पर दी सीख
    कांग्रेस सांसद थरूर को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि मेरे दोस्त शशि थरूर ने तथ्यों की जांच की है और कल अपनी धुन बदल दी है. लेकिन सांसद मणिकम टैगोर जागरूकता की जबरदस्त कमी के साथ बाहर आये. जो नहीं परिचित हैं, उन्हें बता दूं, वह चाहते था कि मैं कोझीकोड जाऊं, जबकि मैं पहले से ही रास्ते में था!"

    पुरी ने कहा, "उनकी ऐसी इच्छा मीडिया का ध्यान खींचने के लिए थी और उन्होंने विमानन सुरक्षा और प्रोटोकॉल विशेषज्ञ बनने से पहले बुनियादी तथ्यों का अध्ययन नहीं किया था. मंत्रियों का दौरा इस तरह से होना चाहिए कि वे पेशेवर एजेंसियों के राहत और बचाव कार्यों में बाधा न डाले."

    हवाई अड्डों पर उपाय, सभी विकल्पों पर विचार के बाद ही किये जाते हैं लागू
    पुरी ने कहा कि उनके लिए यह जानना अच्छा होगा कि कोझिकोड के हवाई अड्डे सहित सभी हवाई अड्डों पर उपायों को दिशा-निर्देशों और उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार करने के बाद ही लागू किया जाता है.

    सुरक्षा पर अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (ICAO) के दिशानिर्देशों के अनुसार कोझिकोड हवाई अड्डा रनवे एंड सेफ्टी एरिया (RESA) से सुसज्जित है. यदि लंबाई RESA मानक से कम है या हवाई अड्डों पर बाधाओं के चलते RESA मानक नहीं लागू किये जा सकते तो इंजीनियर्ड मैटेरियल एरिस्टर सिस्टम (EMAS) सुरक्षा लाभ प्रदान करता है.

    जांच जारी, रिपोर्ट आने के बाद दे सकते हैं सुझाव
    ICAO के दिशानिर्देशों के अनुसार, सिविल एरोड्रम में EMAS का प्रावधान अनिवार्य नहीं है. एयर इंडिया 2010 में मैंगलोर में दुर्घटना के बाद मंगलौर और कोझिकोड में EMAS के प्रावधान की जांच AAI द्वारा DGCA के साथ परामर्श के बात की गई. इन दोनों हवाई अड्डों पर टेबलटॉप रनवे हैं, इसलिए DGCA के निर्देश के अनुसार 240m और 90m के RESA मानक प्रदान किए गए हैं.

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    वर्तमान में एक वैधानिक जांच जारी है. विशेषज्ञ स्थिति और कारणों का आगे अध्ययन करेंगे और उपयुक्त सिफारिशें करेंगे. रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद MoCA सभी सुझावों के लिए खुला है.

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