अपना शहर चुनें

States

हार्दिक पटेल ने ट्विटर पर आंदोलनजीवी रखा अपना नाम, पीएम मोदी के बयान को बताया अटल जी का अपमान

हार्दिक पटेल. (पीटीआई फाइल फोटो)
हार्दिक पटेल. (पीटीआई फाइल फोटो)

Hardik Patel on PM Modi's Andolanajeevi Remarks: पीएम मोदी ने राज्यसभा में कहा कि पिछले कुछ समय से इस देश में 'आंदोलनजीवियों' की एक नई जमात पैदा हुई है, जो आंदोलन के बिना जी नहीं सकती.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 9, 2021, 11:23 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कांग्रेस नेता और गुजरात में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने ट्विटर बायो में अपना नाम 'आंदोलनजीवी हार्दिक पटेल' कर लिया है. दरअसल राज्यसभा में सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि सुधारों पर 'यू-टर्न' लेने के लिए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और कहा कि पिछले कुछ समय से इस देश में 'आंदोलनजीवियों' की एक नई जमात पैदा हुई है जो आंदोलन के बिना जी नहीं सकती. इसके बाद से ही विपक्षी दलों ने पीएम मोदी को घेरना शुरू कर दिया. किसान नेताओं को भी पीएम मोदी का यह बयान रास नहीं आया.

कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल ने भी पीएम मोदी को घेरते हुए उनके आंदोलनजीवी वाले बयान को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अपमान बताया. पटेल ने मंगलवार को ट्वीट किया, 'हम सबके प्रिय पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी आंदोलन के दौरान संसद तक बैलगाड़ी से जाया करते थे, आज मोदी जी ने उन्हें भी आंदोलनजीवी कह दिया. अटल जी का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान.'

हार्दिक पटेल ने ट्विटर ने अपना बायो बदला




'पीएम मोदी की 'आंदोलनजीवी' टिप्पणी किसानों का अपमान है'
इस बीच, केंद्र के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'आंदोलनजीवी' बयान पर रोष जताया और कहा कि यह किसानों का अपमान है. किसान संगठनों के समूह ने कहा कि 'आंदोलनों' के कारण भारत को औपनिवेशिक शासन से आजादी मिली और कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 'आंदोलनजीवी' हैं.

संगठन की तरफ से इसके नेता दर्शनपाल द्वारा जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री द्वारा "किसानों के अपमान की वह निंदा करता है." भाजपा पर निशाना साधते हुए एसकेएम ने कहा, "भाजपा और उसके पूर्ववर्तियों ने अंग्रेजों के खिलाफ 'आंदोलन' नहीं किया और वे हमेशा 'आंदोलनों' के खिलाफ रहे. वे अब भी जन आंदोलनों से डरे हुए हैं." एसकेएम ने कहा, "सरकार अगर किसानों की वैध मांगों को मान लेती है तो किसानों को अपने खेतों में लौटने में खुशी होगी और सरकार के अड़ियल रवैये के कारण ज्यादा 'आंदोलनजीवी' पैदा हो रहे हैं."

गौरतलब है कि तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग के साथ पंजाब, हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसान दो महीनों से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

क्या है मामला
कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर सरकार ने सितंबर में तीनों कृषि कानूनों को लागू किया था. सरकार ने कहा था कि इन कानूनों के बाद बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसानों को देश में कहीं पर भी अपने उत्पाद को बेचने की अनुमति होगी. वहीं, किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. प्रदर्शन कर रहे किसानों का दावा है कि ये कानून उद्योग जगत को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं और इनसे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज