Home /News /nation /

हरिकेला हजब्बा: बस डिपो पर संतरे बेचकर गांव में खोला स्कूल; सरकार ने अब दिया पद्मश्री सम्मान

हरिकेला हजब्बा: बस डिपो पर संतरे बेचकर गांव में खोला स्कूल; सरकार ने अब दिया पद्मश्री सम्मान

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हरिकेला हजब्बा को किया पद्मश्री से सम्मानित. (फोटो: ANI)

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हरिकेला हजब्बा को किया पद्मश्री से सम्मानित. (फोटो: ANI)

Padma Awards: 'मैं केवल कन्नड़ जानता हूं, अंग्रेजी या हिंदी नहीं. मैं परेशान था, क्योंकि मैं विदेशी की मदद नहीं कर पाया था. मैंने अपने गांव में स्कूल बनाने के बारे में सोचा.' हालांकि, उनका यह सपना पूरा होने में दो दशक लग गए. हजब्बा साल 1977 से मंगलुरु बस डिपो पर संतरे बेच रहे हैं. उन्हें अपने इन कामों के चलते अक्षर संत की उपाधि भी मिली है. 28 बच्चों से शुरू हुए विद्यालय में आज कक्षा 10वीं तक 175 बच्चे पढ़ाई करते हैं.

अधिक पढ़ें ...

    नई दिल्ली. राष्ट्रपति भवन में सोमवार आयोजित पद्म पुरस्कार (Padma Awards) वितरण में खेल, मनोरंजन समेत कई क्षेत्रों के बड़े नामों को सम्मानित किया गया. इस दौरान पुरस्कार हासिल करने वालों में कर्नाटक के हरिकेला हजब्बा (Harekala Hajabba) का नाम भी शामिल है. संतरा बेचने वाले हजब्बा को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है. उन्हें यह सम्मान ग्रामीण शिक्षा में क्रांति लाने के लिए दिया गया है. वे पुरस्कार के साथ मिली राशि को भी अन्य स्कूल भवनों के निर्माण में खर्च करेंगे.

    कर्नाटक के मंगलुरु में बस डिपो पर संतरा बेचने वाले हरिकेला हजब्बा ने खुद कभी भी पढ़ाई नहीं की, लेकिन वे चाहते हैं कि गांव के बच्चे पढ़ें. दरअसल, उनके इस खास सपने के पीछे भी एक खास कहानी है. गांव में स्कूल खोलने का विचार उन्हें 1978 में आया, जब एक विदेशी नागरिक ने उनसे संतरे का भाव पूछा. वे बताते हैं, ‘मैं विदेशी से बात नहीं कर सका था. मुझे बुरा लगा और गांव में स्कूल खोलने का विचार किया.’

    वे कहते हैं, ‘मैं केवल कन्नड़ जानता हूं, अंग्रेजी या हिंदी नहीं. मैं परेशान था, क्योंकि मैं विदेशी की मदद नहीं कर पाया था. मैंने अपने गांव में स्कूल बनाने के बारे में सोचा.’ हालांकि, उनका यह सपना पूरा होने में दो दशक लग गए. हजब्बा साल 1977 से मंगलुरु बस डिपो पर संतरे बेच रहे हैं. उन्हें अपने इन कामों के चलते अक्षर संत की उपाधि भी मिली है. 28 बच्चों से शुरू हुए विद्यालय में आज कक्षा 10वीं तक 175 बच्चे पढ़ाई करते हैं.

    यह भी पढ़ें: Padma Award 2021: पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को मरणोपरांत दिया गया पद्म भूषण पुरस्कार

    अब हजब्बा पुरस्कार के साथ मिले नगद इनाम को भी स्कूल निर्माण में ही खर्च करना चाहते हैं. अपने अगले लक्ष्य को लेकर वे बताते हैं, ‘मेरा लक्ष्य स्कूल में और स्कूल और कॉलेज खोलना है. कई लोगों ने पैसा दान दिया है और मैंने स्कूल और कॉलेजों के निर्माण के लिए जमीन खरीदने के लिए पुरस्कार राशि जमा की है.’ उन्होंने कहा, ‘मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने गांव में एक प्री-यूनिवर्सिटी (कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए) निर्माण का अनुरोध किया है.’

    उन्होंने राष्ट्रपति कोविंद, प्रधानमंत्री मोदी, सांसद नलिन कुमार कटील, जिला प्रभारी मंत्री कोटा श्रीनिवास पुजारी और विधायक का धन्यवाद किया है. केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा जनवरी 2020 में कर दी थी, लेकिन कोविड-19 के चलते ये पुरस्कार सोमवार को वितरित किए गए.

    Tags: Harekala Hajabba, Padma awards, Padma Shri Award

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर