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हरियाणा चुनाव 2019: मुख्यमंत्री कोई भी हो, लेकिन राज्य में जाट के ही होंगे ठाठ!

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Updated: October 11, 2019, 1:16 PM IST
हरियाणा चुनाव 2019: मुख्यमंत्री कोई भी हो, लेकिन राज्य में जाट के ही होंगे ठाठ!
ये कोई पहला मौका नहीं है कि जब जाट उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा टिकट दी गई हैं. (Demo Pic)

हरियाणा में करीब 25 फीसदी जाटों (Jat) की आबादी होने का दावा किया जाता है, इसलिए बीजेपी (BJP) , कांग्रेस (Congress), और जेजेपी (JJP) ने इसी समाज को सबसे ज्यादा टिकट दिए हैं.

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  • Last Updated: October 11, 2019, 1:16 PM IST
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नई दिल्ली. कहते हैं कि हरियाणा में मुख्यमंत्री कोई भी हो, लेकिन ठाठ तो जाट (Jat) के ही होंगे. यही वजह है कि इस प्रदेश को जाट लैंड भी कहा जाता है. इस बात को ध्यान में रखते हुए पार्टियां टिकट वितरण वोटबैंक (Vote Bank) को देखकर ही करती हैं. हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Election 2019) के टिकट वितरण को देखें तो जेजेपी (JJP) ने 34, कांग्रेस (Congress) ने 27 और बीजेपी (BJP) ने 20 जाट उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है.

पंजाबियों को कांग्रेस ने सिर्फ दो टिकट दी

कांग्रेस ने अपने एक पुराने वोटबैंक पंजाबी (Punjabi) समुदाय को नाराज कर लिया है. इसकी वजह ये है कि पिछली बार पंजाबी बीजेपी की ओर शिफ्ट कर गए थे. इसलिए इस बार कांग्रेस ने सिर्फ दो पंजाबी उम्मीदवारों को ही टिकट दी है. यहां तक कि पानीपत जैसी पंजाबियों की पारंपरिक सीट पर उसने किसी पंजाबी को टिकट नहीं दी. फरीदाबाद में एक टिकट हमेशा पंजाबी प्रत्याशी को मिलती थी लेकिन इस बार यहां ऐसा नहीं हुआ है. इसे केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने बाकायदा मुद्दा बना दिया है. कह रहे हैं कि पंजाबियों की उपेक्षा कांग्रेस को भारी पड़ेगी.

इसीलिए वो बड़खल से अपनी प्रत्याशी पंजाबी समाज से आने वाली सीमा त्रिखा को साथ लेकर कांग्रेस के सबसे पुराने पंजाबी नेताओं में से एक पूर्व मंत्री एसी चौधरी के घर समर्थन मांगने पहुंच गए. चौधरी कांग्रेस नेतृत्व से नाराज हैं. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने नौ पंजाबियों को मैदान में उतारा है.

राजपूत समाज को किसने दी कितनी टिकट 

कांग्रेस ने राजपूत (Rajput) समाज को भी इस बार टिकट वितरण में साइडलाइन कर दिया है. पार्टी ने इस समाज के सिर्फ दो लोगों को टिकट दिया है. जबकि बीजेपी चार राजपूत प्रत्याशियों को चुनाव लड़वा रही है. इसके उलट जेजेपी ने सिर्फ एक राजपूत पर भरोसा किया है.

हरियाणा में सत्ता किसी की भी रही हो, लेकिन जाट सभी सरकार के एजेंडे में रहते है. (Demo Pic)

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वैश्य समाज

वैश्य (Bania) समाज बीजेपी का पारंपरिक वोटर रहा है इसलिए पार्टी ने इसके नौ प्रत्याशियों पर दांव लगाया है. दूसरी ओर कांग्रेस ने पांच और जेजेपी ने इस समाज से आने वाले चार लोगों को टिकट दिया है. बीजेपी ने सबसे ज्यादा सात ब्राह्मण (Brahmin) उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है. इसके मुकाबले जेजेपी ने छह और कांग्रेस ने पांच ब्राह्मणों को टिकट दिया है.

मुस्लिमों और अनुसूचित जाति पर किसका दांव

कांग्रेस ने सबसे ज्यादा छह मुस्लिमों (Muslim) को टिकट दिया है. जेजेपी ने चार बीजेपी ने तीन मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं. जबकि जेजेपी और कांग्रेस ने गुर्जर समाज के 6-6 लोगों को और बीजेपी ने पांच को टिकट से नवाजा है. हालांकि यादव समाज के मामले में सबने बराबरी की है. इन तीनों पार्टियों ने तीन-तीन यादव उम्मीदवारों को टिकट दी है. बीजेपी ने अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के लोगों को 17 टिकट दी है. वहीं कांग्रेस और जेजेपी ने इस वर्ग से आने वाले 18-18 लोगों को टिकट दी है.

हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार सौरभ भारद्वाज का कहना है कि राज्य में हर चौथा आदमी जाट है. इसीलिए हर एक पार्टी सबसे ज्यादा टिकट जाटों को ही देती है. ये एक बड़ा कारण है कि गैर जाटों की राजनीति करने वाली बीजेपी ने भी जाटों को 20 टिकट दी है. ऐसे में जाहिर है कि विधानसभा चुनाव में जो सबसे ज्यादा चुनकर आएंगे वो जाट ही होंगे.

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First published: October 11, 2019, 12:37 PM IST
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