कल तक इस राज्य पर कन्या भ्रूण हत्या के लगते थे आरोप, अब लड़कियों को स्कूल भेजने के मामले में मारी बाजी

क्लास के नतीजे देखती हुईं लड़कियां. (File Photo)
क्लास के नतीजे देखती हुईं लड़कियां. (File Photo)

लेकिन दूसरी ओर बड़े राज्य कहे जाने वाले यूपी (UP), केरल और तमिलनाडु लड़कियों को स्कूल (School) भेजने के मामले में पिछड़ रहे हैं. यह आंकड़ा कक्षा 9 से 12वीं मतलब माध्यमिक स्तर का है.

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  • Last Updated: September 18, 2020, 10:54 AM IST
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नई दिल्ली. कल तक लड़कियों (Girls) को गर्भ में ही मारने के आरोप झेलने वाला यह राज्य अब ज़्यादा से ज़्यादा लड़कियों को स्कूल (School) भेजने के मामले में आगे बढ़ता जा रहा है. तीन साल में ही यह आंकड़ा करीब 10 फीसद तक बढ़ गया है. राज्य की बदलती हुई इस सोच पर लोग हैरत में हैं. यह राज्य कोई और नहीं हरियाणा (Haryana) है.

इसके साथ ही पंजाब, दिल्ली (Delhi), राजस्थान और गुजरात (Gujarat) ने भी लड़कियों को स्कूल भेजने के मामले में खासे नंबर कमाए हैं. लेकिन दूसरी ओर बड़े राज्य कहे जाने वाले यूपी (UP), केरल और तमिलनाडु लड़कियों को स्कूल (School) भेजने के मामले में पिछड़ रहे हैं. यह आंकड़ा कक्षा 9 से 12वीं मतलब माध्यमिक स्तर का है.

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देश में 80 फीसद से ज़्यादा लड़कियां जा रही हैं स्कूल
अगर शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों पर निगाह डालें तो देश में 80.62 फीसद लड़कियां स्कूल जा रही हैं. यह आंकड़ा साल 2017-18 का है. हालांकि बीते दो साल में यह आंकड़ा 00.52 फीसद ही बढ़ा है. लेकिन अच्छी खबर यह है कि हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्य, जिन पर लड़कियों संग भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं भी अब ज़्यादा से ज़्यादा लड़कियों को स्कूल भेजने के मिशन में जुट गए हैं.

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लड़कियों को शिक्षा दिलाने के मामले में हरियाणा लगातार आगे बढ़ रहा है.


लड़कियों के मुकाबले लड़के ज़्यादा छोड़ रहे हैं पढ़ाई

लड़कियों के मुकाबले लड़के बड़ी संख्या में बीच में ही पढ़ाई छोड़ रहे हैं. कक्षा 9 से 12वीं की पढ़ाई के दौरान लड़के बीच में ही पढ़ाई छोड़ दे रहे हैं. साल 2017-18 में देशभर में 9 से 12वीं की पढ़ाई के दौरान 18.6 फीसद लड़कों तो 18.4 फीसद लड़कियों ने बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी. हालांकि जानकार यह भी बताते हैं कि लड़कियों के आंकड़े में पहले के मुकाबले खासा सुधार आया है. अच्छी बात यह है कि इस मामले में भी हरियाणा आगे रहा है. मतलब यह कि 13.8 फीसद लड़कों तो 13.1 फीसद लड़कियों ने ही साल 2017-18 में बीच में ही पढ़ाई छोड़ी थी.
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