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तो क्या जाट आरक्षण के दंगाइयों ने कई महिलाओं को बनाया हवस का शिकार?

तो क्या जाट आरक्षण के दंगाइयों ने कई महिलाओं को बनाया हवस का शिकार?

हरियाणा में आरक्षण की आग भले ही बुझ गई है। लेकिन आरोप लग रहे हैं कि दंगाइयों ने कई महिलाओं को हवस का शिकार बना डाला।

    हरियाणा। हरियाणा में आरक्षण की आग भले ही बुझ गई है। लेकिन उस आग की जो चिंगारियां सामने आ रही हैं वो दिलदहलाने वाली हैं। आरोप लग रहे हैं कि दंगाइयों ने कई महिलाओं को हवस का शिकार बना डाला।

    हालांकि पुलिस इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। लेकिन घटनास्थल पर पड़े सबूत कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं। हरियाणा सुलग रहा था वो तस्वीरें पूरे देश ने देखी और उसकी तपिश भी महसूस की। लेकिन अब जो खबरें सामने आ रही हैं उन्हें सुनकर हर किसी का खून खौल रहा है।

    खबरों की मानें तो सोमवार तड़के नेशनल हाई-वे नंबर-1 पर कई ऐसे वाहनों को रोका गया, जिनमें महिलाएं सवार थीं। उसके बाद महिलाओं को न्रुादीकी खेतों में ले जाकर उनके साथ रेप किया गया। हालांकि एक अखबार में छपी इस खबर को हरियाणा पुलिस ने सिरे से नकार दिया है।

    भले ही पुलिस अभी तक पूरी तरह अंजान होने का दावा कर रही है। लेकिन घटनास्थल पर ऐसे कई सबूत मौजूद हैं जो चीख-चीखकर उस सुबह हुई दरिंदगी की गवाही दे रहे हैं। ढाबे के पास कई महिलाओं के अंडर गार्मेंट्स का पाया जाना महज इत्तेफाक नहीं हो सकता। वहीं पास में मौजूद राख हो चुकी कई गाड़ियां दहशत के उन पलों की कहानी बयान करने के लिए काफी हैं।

    अखबार ने चश्मदीदों के हवाले से दावा किया था कि उस रोज करीब दस महिलाओं को बलात्कार का शिकार बनाया गया था। बताया जा रहा है कि करीब तीस से ज्यादा दंगाइयों ने तड़के तीन बजे अचानक ही दिल्ली एनसीआर की तरफ जाने वाली गाड़ियों पर हमला बोल दिया और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।

    उसी दौरान गाड़ियों में फंस गई महिलाओं को खींचकर न्रुादीकी खेतों में ले गए। उनके कपड़े फाड़ दिए गए और उनके साथ रेप किया गया। बताया जा रहा है कि कुछ पीड़िताएं उस वक्त तक खेतों में नग्न ही रहीं जबतक उनके पुरुष साथियों ने उन्हें ढूंढ नहीं लिया।

    अखबार ने ये भी दावा किया था कि नजदीकी गांव हसनपुर और कुराद गांव के लोग पीड़िताओं की मदद के लिए आगे आए थे। उन्होंने पीड़िताओं के लिए कपड़ों और कंबल का इंतजाम किया था। इस पूरे खुलासे में सबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि पुलिस अधिकारियों ने पीड़िताओं और उनके परिवार वालों को इज्जत का हवाला देकर मामला दर्ज ना करने के सिए राजी किया।

    वहीं पुलिस अभी भी अपने दावे पर अटल है। हाईवे पर महिलाओं के कपड़े मिलने की जांच करने पहुंचे सोनीपत के एसपी ने मौके पर ही जांचकर अपना फैसला सुना दिया। उनका कहना था कि कपड़े मिलने से रेप की पुष्टि नहीं हो जाती।

    पुलिस भले ही रेप की बातों को सिरे से खारिज करने में जुटी है। लेकिन अखबार की रिपोर्टों को मुताबिक कई चश्मदीद ऐसे हैं जिन्होंने महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना की जानकारी दी है।

    ऐसे ही एक चश्मदीद ने एक अखबार को बताया कि तीन महिलाओं को सुखदेव ढाबे पर ले जाया गया था। उनके साथ उनके परिवार और पुलिस के अधिकारी भी मौजूद थे। लेकिन अधिकारियों ने मामले की जांच के बजाए पीड़िताओं को घर ले जाने की सलाह देकर चलता कर दिया। आरोप है कि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कई पीड़ितों को ट्रांस्पोर्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई थी।

    आपको बता दें दंगाइयों ने सुखदेव ढाबे को भी निशाना बनाया था। ढाबे को आग के हवाले करने की कोशिश की गई थी लेकिन स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद दंगाई वहां से भाग गए थे।

    एक अन्य ढाबा मालिक ने भी दावा किया था कि चार महिलाओं ने उनके ढाबे के पास पानी के टैंक में छुपकर अपने आपको बचाया था। वे सुबह होने तक घंटों उसी टैंक में छुपी रहीं। इस मामले में भी पुलिस पर मामला दर्ज नहीं करने का आरोप है।

    बहरहाल पुलिस का रवैया अब बदल चुका है क्योंकि अब हाईकोर्ट ने पुलिस के रवैये पर सवालिया निशाने खड़े कर दिये हैं। हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए मामले की विस्तृत रिपोर्ट तो मांगी ही साथ ये टिप्पणी भी कर दी कि प्रदेश में बेटियां महफूज नहीं हैं। कोर्ट की सख्ती के बाद हरियाणा की पुलिस और प्रशासन हरकत में आए और आनन फानन में तीन सदस्य कमेटी का गठन कर दिया गया।

    पुलिस ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी कर लोगों से अपील की है कि अगर कोई भी पीड़ित उस घटना से जुड़ा हो तो वो इस नंबर पर फोन करके अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है। वहीं अदालत की दखल के बाद महिला आयोग की टीम भी मामले की जांच में जुट गई है।

    Tags: हरियाणा

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