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भारत में आ चुकी है कोरोना की तीसरी लहर? क्या है टॉप एक्सपर्ट की राय

देश में कोरोना वायरस की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है. (Pic- AP)

देश में कोरोना वायरस की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है. (Pic- AP)

भारत में कोविड के नए मामलों में 12 फीसदी का उछाल देखने को मिला है, पिछले 24 घंटों में 47,092 नए संक्रमण दर्ज किए गए, ये ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. क्या भारत कोरोना की तीसरी लहर के मुहाने पर खड़ा है? अगर आंकड़ों पर नज़र डालें तो वो कुछ ऐसा ही बयां कर रहे हैं कि देश अगली लहर की तरफ बढ़ रहा है. भारत में कोविड के नए मामलों में 12 फीसदी का उछाल देखने को मिला है. पिछले 24 घंटों में 47,092 नए संक्रमण दर्ज किए गए है. ये पिछले दो महीनों में एक दिन का सबसे बड़ा उछाल था. इसके साथ ही 24 घंटों में 509 मौतें दर्ज की गईं. इसमें से 32,803 मामले अकेले केरल में मिले.

    क्या इसका ये मतलब निकाला जाए कि भारत जल्दी ही तीसरी लहर की चपेट में होगा? जिस तरह से स्कूल दोबारा खोले जा रहे हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ेगा. न्यूज18 इंडिया ने तीसरी लहर की चिंताओं के बीच देश भर की स्थिति का जायजा लिया और ये समझने की कोशिश की क्या भारत इससे निपटने के लिए तैयार है.

    भारत अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं को, खासकर जो बच्चों से जुड़ी हुई है. उन्हें बेहतर करने में लगा हुआ है. टीकाकरण को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. दूसरी लहर के समय जो तबाही मची और जिस तरह से मामले बढ़े और मौतें हुईं उससे पूरा का पूरा स्वास्थ्य तंत्र चरमरा गया, उसे देश कभी भूल नहीं सकता है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये अक्टूबर में होगा और नवंबर में पीक आने का अनुमान है, लेकिन ये इस बात पर निर्भर करता है कि जो वायरस फैल रहा है वो कितना घातक है.

    डेल्टा वेरिएंट कोरोना की दूसरी किसी भी स्ट्रेन से ज्यादा संक्रामक और घातक है. भारत में आई दूसरी लहर के पीछे यही वेरिएंट था. यहां तक कि जब भारत में इसका असर कम होने लगा तो इसने दूसरे देशों, जैसे इज़रायल, अमेरिका की ओर रुख किया और वहां पर डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ लड़ाई अभी भी चल रही है. आईआईटी -कानपुर वैज्ञानिकों की तीन सदस्यीय टीम जो संक्रमण के फैलने के अनुमान पर काम कर रही है उसके सदस्य महिंद्र अग्रवाल का कहना है भारत में अक्टूबर-नवंबर के बीच तीसरी लहर का पीक आ सकता है, लेकिन ऐसा तभी होगा जब मौजूदा वायरस से ज्यादा घातक वायरस सितंबर में फैलता है. लेकिन इसकी तीव्रता दूसरी लहर की तुलना में कम होगी.

    जानिए केरल के बारे में…
    रिपोर्ट के मुताबिक केरल में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे भारत में महामारी की तीसरी लहर की शुरुआत की आशंका मान रहे है. वैसे केंद्र और राज्य सरकार ने केरल में बढ़ते मामलों को अभी तक आधिकारिक तौर पर तीसरी लहर नहीं कहा है. हालांकि इस हफ्ते देश भर में आने वाले मामलों का 72 फीसदी केरल में से था. स्वास्थ्य विशेषज्ञ और महामारी विशेषज्ञ डॉ. रमन कुट्टी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ये बढ़ोतरी तीसरी लहर की शुरुआत हो सकती है और हमें सावधानी बरतनी होगा. हमारे यहां एक बड़ी आबादी संवेदनशील की श्रेणी में है और सरकार को चाहिए कि कोविड की लहर का सामना करने के लिए लंबे वक्त तक चलने वाली रणनीति तैयार करे.

    पूर्व राज्य महामारी विशेषज्ञ डॉ. ए सुकुमारन का कहना है कि वायरल संक्रमण को लेकर ये सामान्य सिद्धांत है कि अगर आपके यहां संवेदनशील आबादी है तो कई लहर आती आ सकती हैं, केरल भी मामलों के घटने से पहले कई लहरों का सामने कर सकता है.

    हालांकि केरल की कोविड लहर देश के औसत से अलग है. रिसर्च सेल आईएमए (केरल) के उपाध्याक्ष डॉ. राजीव जयदेवन का कहना है कि छोटे राज्यों से अलग बड़े देशों में लहर पूरे देश में एक जैसी नहीं आती है. इसके पीछे कई वजह काम करती हैं जैसे यात्रा, आबादी का घनत्व, सामाजिक आर्थिक हालात, भौगोलिक परिस्थिति, मौसम, टीकाकरण, साक्षरता, सीरो-प्रिवलेंस, गलत जानकारियों का क्षेत्रीय प्रसार, वैज्ञानिक संचार की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सुविधाएं और महामारी के दौरान अपनाया गया बर्ताव.

    महाराष्ट्र भी पीछे नहीं
    राज्य स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे का कहना है कि महाराष्ट्र में तीसरी लहर अक्टूबर के अंत या नवंबर के पहले हफ्ते में आएगी जब त्योहार खत्म होने को होंगे और इस दौरान कम से कम 60 लाख तक मामले आ सकते हैं. महाराष्ट्र चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमित देशमुख ने लोगों से गुजारिश की है कि आने वाले त्योहारों को थोड़ा संभल कर मनाएं, कोविड-19 में हल्की सी भी बढ़ोतरी चिंता का विषय हो सकती है इसलिए लोगों को कोविड से बचाव के लिए सुरक्षा के तौर तरीकों को सख्ती से अपनाना होगा.

    देशमुख का कहना है कि विशेषज्ञों ने तीसरी लहर की चेतावनी जारी की है और महाराष्ट्र के कुछ राज्यों में संक्रमण के रोज के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. उनका कहना है कि स्वास्थ्य तंत्र को पूरी तरह से नजर बनाए रखनी होगी जिससे संक्रमण को कम किया जा सके, राज्यों के अस्पतालों को अगर किसी भी तरह के अतिरिक्त स्टाफ की ज़रूरत है तो वो मांग कर सकता है, सरकार उस पर तुरंत कार्रवाई करेगी. इन अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन बिस्तर होने चाहिए जिससे अचानक बड़े हालातों पर काबू पाया जा सके.

    टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में बीएमसी के अतिरिक्त निगम आयुक्त सुरेश काकानी ने कहा कि नगरीय निकायों ने तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए 30,000 बिस्तर तैयार किए हैं. साथ ही ऑक्सीजन रिफिलिंग प्लांट भी चेंबूर और महालक्ष्मी में लगा दिए गए हैं जिससे इसकी कमी नही हो.

    इन राज्यों में भी बढ़ रहा है आंकड़ा
    मिजोरम और आंध्रप्रदेश में भी मामलों में बढोतरी देखने को मिली है, मिजोरम में पिछले हफ्ते 44 फीसदी मामलों में बढोतरी देखी गई है, वहीं दक्षिण में आंध्रप्रदेश में 13.2 फीसदी ज्यादा मामले दर्ज हुए.

    कई राज्यों में पाया गया है कि स्कूल खुलने के बाद जल्दी ही बच्चों में कोविड के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. तीसरी लहर के अनुमान और चिंता के बीच, पंजाब, बिहार, मध्यप्रदेश गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड और चंडीगढ़ में दोबारा स्कूल खोले गए. दिल्ली में भी 9-12 तक की कक्षा के लिए दोबारा स्कूल खोल दिए गए हैं. यही नहीं कोचिंग क्लास, कॉलेज, और विश्वविद्यालय को भी फिर से कार्य करने की अनुमति प्रदान कर दी गई है.

    पंजाब में जुलाई और अगस्त के बीच संक्रमण की दर में 9.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, राज्य में स्कूल 2 अगस्त से खुल गए थे जबकि बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, और छत्तीसगढ़ में कोविड के मामलों में 2 से 3 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है. दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सीएनएन-न्यूज 18 से बात करते हुए कहा कि स्कूल दोबारा खोलने के लिए शून्य मामले होने का इंतजार नहीं किया जा सकता है. कोरोना के चलते जो स्कूल बंद किए गए हैं उससे बच्चों का बहुत नुकसान हो चुका है. हम बहुत पिछड़ चुके हैं, किसी भी हाल में हमें आगे बढ़ना ही होगा, वैसे भी शिक्षा के मामले में भारत अभी बहुत पिछड़ा हुआ है. महाराष्ट्र में बच्चों के लिए बनाई गई कोविड-19 टास्क फोर्स ये सुनिश्चित कर रही है कि स्कूल दोबाार खुलने से पहले शिक्षक और गैर शिक्षक विभाग को टीका लगा हो.

    बच्चों के लिए टीका – अब तक कहां पहुंचे
    ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इडिया ने हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई-लिमिटेड को कुछ शर्तों के साथ 5 से 18 साल के बच्चों की स्वदेशी वैक्सीन के 2/3 चरण के क्लीनिकिल ट्रायल की अनुमति दे दी है. अब तक स्वदेशी विकसित जायडस कैडिला की नीडिल फ्री कोविड-19 वैक्सीन ZyCoV-D को आपातकाल इस्तेमाल के लिए दवा नियामकों से अनुमति मिली है. ये देश में 12-18 उम्र के समूह को लगने वाली वैक्सीन बना रहे हैं. उधर 2 से 18 उम्र के समूह के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का 2/3 चरण के क्लीनिकिल ट्रायल चल रहा है. भारत के दवा नियामकों ने जुलाई में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया को 2 से 17 तक की उम्र के बच्चों के लिए कोवोवैक्स के 2/3 चरण के क्लीनिकिल ट्रायल की अनुमति दे दी है.

    Tags: Coronavirus, Coronavirus Case in India, Coronavirus cases, Coronavirus Crisis, Coronavirus Death, Coronavirus Epidemic

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