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क्या केरल में आ चुकी है कोरोना की तीसरी लहर? जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ

पहली लहर के दौरान केरल में कोरोना के मामले काफी दिनों तक कम रहे थे और उसके बाद अप्रैल में मामलों में तेजी दर्ज की गई थी (सांकेतिक तस्वीर)

पहली लहर के दौरान केरल में कोरोना के मामले काफी दिनों तक कम रहे थे और उसके बाद अप्रैल में मामलों में तेजी दर्ज की गई थी (सांकेतिक तस्वीर)

Coronavirus in Kerala: केरल में जहां दूसरी लहर के मामले कम होने के बाद जून- जुलाई में रोजाना 12,000-14,000 मामले आ रहे थे वहीं पिछले दिनों इसकी संख्या बढ़कर 20,000 से 22,000 हो गई है. जबकि राज्य में पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 12 फीसदी तक पहुंच गया है.

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    कोच्चि. केरल में एक बार फिर से कोविड-19 के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. देश में रोजाना आ रहे मामलों में से करीब 50 फीसदी मामले केरल में दर्ज किए जा रहे हैं. ऐसे में महामारी विशेषज्ञ और जानकार मान रहे हैं कि हो सकता है कि ये केरल में तीसरी लहर की दस्तक हो. हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस तरह की कोई भी घोषणा नहीं की गई है. जानकार कहते हैं कि केरल में जहां दूसरी लहर के मामले कम होने के बाद जून- जुलाई में रोजाना 12,000-14,000 मामले आ रहे थे वहीं पिछले दिनों इसकी संख्या बढ़कर 20,000 से 22,000 हो गई है. जबकि राज्य में पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 12 फीसदी तक पहुंच गया है.

    टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक महामारी विशेषज्ञ डॉ. रमन कुट्टी ने कहा कि मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी ये दिखाती है कि केरल में तीसरी लहर की शुरुआत हो गई है और हमें इसे लेकर सतर्क रहना होगा. यहां संक्रमित हो सकने वाले लोगों की बड़ी संख्या है और सरकार को कोविड की नई लहरों से निपटने के लिए कोई लंबे समय तक काम करने वाली रणनीति बनानी चाहिए. बता दें केरल में एक सप्ताह में मामलों में हो रही बढ़ोतरी करीब 0.60 फीसदी है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये 0.13 फीसदी है.

    ये भी पढ़ें- खत्म नहीं हुई दूसरी लहर, एक से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर रहा कोविड रोगी : स्वास्थ्य मंत्रालय

    कोरोना की भी कई लहरें आएंगी
    केरल सरकार के पूर्व महामारी विशेषज्ञ डॉ. ए सुकुमारन ने कहा कि ऐसे किसी भी तरह के वायरल इंफेक्शन की कई लहरें आती हैं, केरल में भी ऐसी कई लहरें आएंगी जहां मामले कम होने से पहले ही और तेजी से बढ़ने लगेंगे. उन्होंने कहा कि स्पेनिश फ्लू के दौरान भी मामले चार लहरें आने के बाद कम हुए थे. उन्होंने कहा कि लेकिन कोविड के अलग-अलग वेरिएंट्स के चलते इसकी लहरें ज्यादा हो सकती हैं.

    बता दें पहली लहर के दौरान केरल में कोरोना के मामले काफी दिनों तक कम रहे थे और उसके बाद अप्रैल में मामलों में तेजी दर्ज की गई थी जिसके बाद संक्रमण की दूसरी लहर आई थी. दूसरी लहर में भी राज्य में करीब सात हफ्तों तक मामलों में कमी देखी गई लेकिन अब इसमें तेजी से बढ़ोतरी हो रही है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि केरल की 50 फीसदी से ज्यादा की जनसंख्या अभी भी अतिसंवेदनशील है और अभी तक सिर्फ 17 फीसदी जनसंख्या को ही वैक्सीन की दोनों खुराकें दी गई हैं.

    केरल में जीनोम सीक्वेंसिंग से जो बात सामने आई है वह यह कि केरल में कोविड के डेल्टा वेरिएंट के सबसे ज्यादा केस हैं. वर्तमान डाटा के मुताबिक केरल में 95 फीसदी केस इसी वेरिएंट के हैं.

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