Hathras Case: दंगों में इस्तेमाल के लिए वेबसाइट के जरिए पीड़िता के परिजनों के नाम पर वसूले पैसे? ED करेगी जांच

(AP Photo/Altaf Qadri)
(AP Photo/Altaf Qadri)

Hathras Case: उत्तर प्रदेश स्थित हाथरस में पीड़िता के परिजनों के नाम पर एक वेबसाइट के जरिए कथित रूप से धनराशि वसूल की गई. जिस पर अब प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) जांच करेगा. इसके लिए धारा 153 ए के तहत मामला भी दर्ज कर लिया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 3:08 PM IST
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नई दिल्ली/ लखनऊ. उत्तर प्रदेश स्थित के हाथरस (Hathras case ) मामले में अब केन्द्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ( Enforcement directorate ) की भी इंट्री होने जा रही है. दरअसल इस मामले में जिस तरह से यूपी पुलिस (Up Police ) को शुरुआती दौर की तफ्तीश में ये महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी की हाथरस में दलित लड़की के मसले को आधार बनाते हुए वहां हिंसा भड़काने की कोशिश की जा रही थी. इसके लिए कुछ इस्लामिक देशों से फंडिंग (Foreign Funding ) करने के भी आरोप लग रहे हैं. जिसको एक अंतराष्ट्रीय स्तर की संस्था द्वारा मुहैया कराए जाने की बात सामने आ रही है. लिहाजा इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी इस मामले में तमाम इनपुट्स को खंगालने में जुट गई है.

ईडी जल्द ही इस मामले में दर्ज यूपी पुलिस द्वारा एफआईआर को टेक ओवर करने वाली है. उसके बाद ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA ) के तहत मामले को दर्ज करके इस मामले की पड़ताल करेगी. इस मामले में ईडी के एक वरिष्ठ सूत्र ने भी इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा है की मामला काफी संगीन और एक सोची समझी साजिश का लग रहा है.हमारे जांच कर्ता यूपी पुलिस के संपर्क में है. जल्द ही इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी मामले को टेकओवर करने वाली है और विस्तार से तफ्तीश करेगी.





इस मामले में ये भी जानकारी मिल रही है की हाथरस के मामले को आधार बनाते हुए यूपी सहित देश के कई हिस्सों में दंगा भड़काने की साजिश रची जा रही थी. इसी के आधार पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने की सोची समझी साजिश रची जा रही थी. जिससे की दंगा करवाने के बाद देश की अंतराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हो सके. लिहाजा हर एंगल से इस मामले की तफ्तीश की जा रही है.

'जस्टिस फॉर हाथरस' कनेक्शन मामले की शुरू हुई तफ्तीश
हाथरस में दलित लड़की के साथ सामुहीक दुष्कर्म के बाद इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से यूपी सहित दिल्ली में राजनीतिक तौर हंगामा मचा हुआ है. इसी का फायदा उठाकर कुछ पड़ोसी मुल्क सहित इस्लामिक देशों में बैठे लोग भारत में इस तरह के मामलों पर नजर बनाकर गिद्ध नजर बनाए हुए रखता है और उसी का फायदा उठाकर हिंसा भड़काने का प्रयास किया जाता है.

हाथरस के मसले पर यूपी पुलिस की तफ्तीश में ये जानकारी मिली है की रातों रात इस मसले पर अचानक से ही कई वेबसाइट तैयार किया कर लिया गया और उसी वेबसाइट के मार्फत दंगा भड़काने के लिए गंदा खेल शुरू कर दिया गया. इस मामले पर सबसे चर्चित रहा 'जस्टिस फॉर हाथरस' (Justice For Hathras ) नाम की वेबसाइट. जिसके जरिए से यूपी में काफी गलत अफवाहें फैलाई गईं. इस वेबसाइट और उससे जुड़े कनेक्शन मामले की जब तफ्तीश की गई तो शुरूआती दौर पर उसका कनेक्शन एमनेस्टी इंटरनेशनल नाम की अंतराष्ट्रीय संस्था के साथ जुड़ता हुआ दिख रहा है.इस एनजीओ (NGO ) में भी विदेशों से काफी फंडिंग आने की संभावना जताई जा रही है. लिहाजा अब इस मामले से जुड़े हर कनेक्शन की तफ्तीश विस्तार से की जाएगी . जांच एजेंसी ईडी इस तरह की तफ्तीश के लिए विशेषज्ञ है. ईडी के सूत्रों के मुताबिक एमनेस्टी इंटरनेशनल नाम की संस्था को भारत में हाल में ही प्रतिबंधित किया गया है. इस संस्था पर देश के अंदर काफी संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप है.लिहाजा इस संस्था का कनेक्शन भी सामने आ सकता है .

ईडी के राडार पर पीएफआई और सीएफआई संस्था भी
हाथरस से जुड़े मामले में अब पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI ) और उसकी सहयोगी संस्था कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI ) नाम की संस्था भी राडार पर है. दरअसल सोमवार शाम को यूपी पुलिस ने चार संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया. बाद में हिरासत में हुई पूछताछ के बाद साफ -साफ जवाब नहीं देने के आरोप में उन चारों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. अभी फिलहाल उन चारों की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में पता लगाया जा रहा है. कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया नाम की संस्था के साथ वास्ता रखने वाले चारों गिरफ्तार आरोपियों में यूपी स्थित मुजफ्फरनगर के रतनपुर निवासी अतीक उर रहमान, केरल के मल्लपुरम निवासी मोहम्मद चैरूर, यूपी के बहराइच निवासी मसूद अहमद और यूपी के ही रामपुर इलाके का निवासी आलम शामिल है.

इस मामले में ईडी के सूत्रों का कहना है की अगर यूपी पुलिस के द्वारा इस पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) या उसकी सहयोगी संस्था कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI ) नाम की संस्था से जुड़े महत्वपूर्ण इनपुट्स और आरोपी का कनेक्शन सामने आता है तो निश्चित ही तौर पर ईडी इस मामले को अलग से दर्ज करके उसकी तफ्तीश कर सकती है. फिलहाल यूपी पुलिस की तफ्तीश रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं.
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