Hathras Case: पीड़िता का शव सुबह तक रखते तो दंगे भड़कते, UP सरकार ने SC में दी ये दलीलें

यूपी सरकार की तरफ से बनाई गई SIT ने पीड़ित के गांव बुलगढ़ी में वारदात वाली जगह का जायजा लिया. (ANI)
यूपी सरकार की तरफ से बनाई गई SIT ने पीड़ित के गांव बुलगढ़ी में वारदात वाली जगह का जायजा लिया. (ANI)

Hathras Case : यूपी सरकार (Uttar Pradesh Government) ने हलफनामे में बताया कि खुफिया विभाग के मुताबिक 29 सितंबर से कुछ लोग हालात को खराब करने के लिए सक्रिय हो गए थे. इसकी शुरुआत दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल से हुई थी. मामले को जातीय और धार्मिक रंग देने की कोशिश थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 12:29 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में बीते दिनों कथित तौर पर गैंगरेप (Hathras Gangrape Case) के बाद लड़की की मौत और देर रात पुलिस के अंतिम संस्कार करने को लेकर आक्रोश है. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर पुलिस ने देर रात शव को क्यों जला दिया. परिवार ने जबरन अंतिम संस्कार का आरोप भी लगाया है. अब चौरतरफा घिरी यूपी सरकार (Uttar Pradesh Government) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का नोटिस मिलने का इंतजार किए बिना ही अपनी तरफ से हलफनामा फाइल कर दिया है. हलफनामे में कहा गया, 'चूंकि यह मामला पूरे देश के आकर्षण के केंद्र में आ गया है, इसलिए इसकी केंद्रीय एजेंसी से जांच होनी चाहिए.' योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई जांच की निगरानी करने का भी आग्रह किया.

आइए जानते हैं कि यूपी सरकार ने हलफनामे में हाथरस केस को लेकर और क्या दलीलें दी...
उत्तर प्रदेश सरकार कोर्ट को बताया कि ऐसी खुफिया सूचना मिली थी कि अगर शव का अंतिम संस्कार करने के लिए सुबह होने का इंतजार किया जाता, तो बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क सकती थी. यूपी सरकार का कहना है कि परिवार की सहमति से ही पीड़िता का अंतिम संस्कार हुआ था. दाह संस्कार पूरे रीति रिवाज से हुआ.
यूपी सरकार ने हलफनामे में बताया कि खुफिया विभाग के मुताबिक 29 सितंबर से कुछ लोग हालात को खराब करने के लिए सक्रिय हो गए थे. इसकी शुरुआत दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल से हुई थी. खुफिया विभाग के मुताबिक, कुछ लोगों ने 30 सितंबर को हाथरस में जमा होकर दंगा भड़काने की साजिश रची थी. मामले को जातीय और धार्मिक रंग देने की कोशिश थी.
हलफनामे में कहा गया कि सरकार के सामने तीन चुनौती थीं. पहला, भीड़ का हाथरस में जमा होना. दूसरा, राम जन्मभूमि पर अदालत का फैसला और तीसरा कोरोनाकाल में सामाजिक दूरी बनाए रखना. इन सब के मद्देनजर लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने पीड़ित परिवार को समझा-बुझा कर पीड़िता का दाह संस्कार रात में ही किया, क्योंकि पीड़िता के पोस्टमॉर्टम हुए 20 घंटे हो चुके थे.
सरकार ने इस मामले में अब तक हुई जांच का विस्तृत ब्योरा सुप्रीम कोर्ट को सौंपा और दावा किया कि कुछ निहित स्वार्थ वाली ताकतें निष्पक्ष न्याय के रास्ते में रोड़ा अटका रही हैं.
एफिडेविट में यह भी कहा गया है कि हाथरस मामले में सरकार को बदनाम करने के लिए नफरत भरी कैंपेन चलाई गई. अब तक की जांच में पता चला है कि कुछ लोग अपने हितों के लिए निष्पक्ष जांच को प्रभावित करना चाहते हैं.
हलफनामे के मुताबिक, कुछ मीडिया कर्मियों ने भी पीड़ित परिवार को भड़काया और सरकार के खिलाफ उकसाया. उन्होंने पीड़ित परिवार को दाह संस्कार करने से मना किया.
उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट में अपील की है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच के आदेश दिए जाएं. सुप्रीम कोर्ट को खुद भी CBI जांच की निगरानी करनी चाहिए.
उधर, यूपी सरकार की तरफ से बनाई गई SIT ने पीड़ित के गांव बुलगढ़ी में वारदात वाली जगह का जायजा लिया. SIT बुधवार को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज