Hathras Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इलाहाबाद हाईकोर्ट क्यों ना करे हाथरस मामले की पूरी सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस मामले में सुनवाई की.
सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस मामले में सुनवाई की.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबड़े (CJI SA Bobde) ने कहा कि अदालत हाथरस मामले (Hathras Case) पर कोई और याचिका पर सुनवाई करने के पक्ष में नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 15, 2020, 2:52 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को कहा कि हाथरस मामले (Hathras Case) की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High court) द्वारा पूरी तरह से क्यों नहीं की जानी चाहिए? हाथरस मामले में अलग-अलग संस्थाएं और लोग मांग कर रहे थी कि सुप्रीम कोर्ट केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही जांच की निगरानी करे.

CJI बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की बेंच ने संकेत दिए कि वह और याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करेगा. पीठ ने कहा कि वह आज ही इस बाबत आदेश जारी करेगा कि सीबीआई जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट करेगा या फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट.

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबड़े ने कहा कि अदालत इस मुद्दे पर कोई और याचिका पर सुनवाई करने के पक्ष में नहीं है. CJI बोबड़े ने कहा, 'हमें पूरी दुनिया की सहायता की जरूरत नहीं है. हमने पहले ही पर्याप्त सुनवाई की है. हमने राज्य, आरोपी और पीड़ित की सुनवाई की है.'



सुनवाई के लिए अदालत में पेश होने के बाद, 19 वर्षीय महिला के परिवार  ने कहा कि सीबीआई अपने जांच की स्टेटस रिपोर्ट राज्य सरकार को ना देकर शीर्ष अदालत को दे.
पीड़ित परिवार और गवाहों की सुरक्षा के लिये सुरक्षाबल तैनात
इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्टको सूचित किया कि हाथरस मामले में पीड़ित के परिवार के सदस्यों और गवाहों की सुरक्षा के लिये ‘त्रिस्तरीय व्यवस्था’ की गयी है. इस घटना में एक दलित लड़की से कथित रूप से बर्बरतापूर्वक बलात्कार किया गया था और उसकी बाद में अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी.


राज्य सरकार ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि इस मामले की जांच कर रहे केन्द्रीय जांच ब्यूरो को जांच में प्रगति की रिपोर्ट हर पखवाड़े राज्य सरकार को सौंपने का निर्देश दिया जाये, जिसे प्रदेश के पुलिस महानिदेशक शीर्ष अदालत में दाखिल कर सकते हैं. इससे पहले, राज्य सरकार ने कहा था कि इस घटना की समयबद्ध तरीके से सीबीआई जांच कर सकती है. राज्य सरकार ने न्यायालय में कहा था कि इस घटना को लेकर राजनीतिक मकसद से तरह-तरह की फर्जी बातें फैलाये जाने की वजह से वह इसकी जांच सीबीआई को सौंपने के लिये तैयार है.
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