हाथरस केस पर सख्त हुई योगी सरकार, विपक्षियों को सबक सिखाने के लिए बदली रणनीति

सीएम योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को जवाब देने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है. (फाइल फोटो)
सीएम योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को जवाब देने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है. (फाइल फोटो)

Hathras Case: 4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने विपक्षियों और विरोधियों पर हमला बोलते हुए पार्टी की छवि बिगाड़ने का आरोप लगाया. साथ ही राज्य में हिंसा और दंगे भड़काने का भी आरोप मढ़ा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 1:41 PM IST
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नई दिल्ली. हाथरस कांड (Hathras Case) पर योगी सरकार चौतरफा आलोचना का शिकार हो रही है. विपक्षी दल और मीडिया जमकर बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं. वहीं, इस घटना से पूरे देश में रोष है और उनके मन में सत्ता के प्रति एक नकारात्मक छवि घर कर गई है. सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने बीती 4 अक्टूबर को इस पर चुप्पी तोड़ते कहा था कि घटना की आड़ में कुछ विरोधी तत्व प्रदर्शनों और अभियानों के बल पर उनकी सरकार को बदनाम कर रहे हैं और राज्य में हिंसा और दंगे भड़काने की स्थिति पैदा कर रहे हैं. हाथरस कांड पर योगी सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है और विरोधियों को जवाब देने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव भी किया है.

हाथरस कांड पर सीएम योगी ने घटना के अगले ही दिन से आक्रामक रुख अपना लिया था और इस केस की सीबीआई जांच की सिफारिश भी की थी. अब सवाल यह खड़ा होता है कि सीएम योगी और उनकी सरकार ने किस तरह का आक्रामक रुख अपनाया? क्योंकि राज्य पुलिस और एसआईटी (SIT) को छानबीन में अब तक ऐसा कोई सबूत हाथ नहीं लगा है, जिससे केस सुलझ सके. वहीं, इस केस में सीएम का राजनीतिक रूप से पार्टी की साख बचाने का बड़ा व्याख्यान का सीधा अर्थ यह मान लिया गया कि वह दलितों का हमदर्द बनने की कोशिश कर रही है.





टकराव की स्थिति से पीछे हटी योगी सरकार
वहीं, हाथरस कांड में कोई कार्रवाई न होने के चलते मीडिया और विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर हो रहे हैं. अब योगी सरकार धरातल पर आकर इनका सामना कर रही है. हालांकि, राज्य प्रशासन ने गृह सचिव और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भगवान स्वरूप की अगुआई में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की घोषणा की है, जो इस मामले को देखेगी. वहीं, योगी सरकार ने रक्षात्मक रूप अपनाते हुए पीड़िता के परिवार और गांव को सुरक्षा के पहरे में रख दिया है. बता दें कि हाथरस गांव को सील कर दिया गया है और पत्रकारों को पीड़िता के घर जाने की अनुमति नहीं है. बीते दिनों कांग्रेस नेता राहुल-प्रियंका गांधी को हाथरस जाने से रोकने के दौरान पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था, जिसके चलते योगी सरकार एक बार फिर सुर्खियों में आ गई थी. ऐसे में योगी सरकार टकराव की स्थिति से अब पीछे हट गई और सीएम ने उसी रात मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी.

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अफसरों ने की सीएम योगी से मुलाकात
3 अक्टूबर की रात राहुल और प्रियंका गांधी पीड़िता के परिजनों से मिलने पहुंचे थे. उससे पहले यूपी के पुलिस महानिदेशक एचसी अवस्थी और एसीएस (गृह) अवनीश अवस्थी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ में उनके आवास पर मुलाकात कर SIT की रिपोर्ट सौंपी. इसके बाद निष्कर्ष यह निकला कि केस में छिपाने के लिए कुछ नहीं था क्योंकि यूपी पुलिस और एसआईटी के मिले सबूतों में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला. वहीं, मेडिकल रिपोर्ट में भी पीड़िता के साथ बलात्कार न होने की बात सामने आई थी.

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आपराधिक षड्यंत्र और विदेशी फंडिंग से आया केस में नया मोड़
4 अक्टूबर को सीएम योगी ने विपक्षियों और विरोधियों पर हमला बोलते हुए पार्टी की छवि बिगाड़ने का आरोप लगाया. साथ ही राज्य में हिंसा और दंगे भड़काने का भी आरोप मढ़ा. उन्होंने विपक्ष पर जाति और धार्मिक आधार पर राजनीति करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया. इधर, पुलिस ने हाथरस में अज्ञात लोगों के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में एफआईआर दर्ज की. पुलिस की एफआईआर में विदेशी वित्त पोषित वेबसाइटों का खुलासा हुआ. इसमें कथित रूप से चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया से जुड़े चार लोगों की गिरफ़्तारी होने के बाद योगी सरकार में विरोधियों को जवाब देने के लिए नया हौसला जागा. गिरफ्तार किए गए लोगों में दिल्ली का एक पत्रकार भी शामिल था. यूपी पुलिस ने दावा किया कि ये गिरफ्तारियां राष्ट्रविरोधी तत्वों के विरोध में शामिल होने का स्पष्ट सबूत पेश करती हैं.

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हाथरस केस सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन
बता दें कि हाथरस केस सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है. वहीं, यूपी सरकार ने केस में आगे बढ़कर अदालत में एक हलफनामा दायर किया, जिसमें सीबीआई जांच की इच्छा व्यक्त की गई है. योगी सरकार के इस कदम से साफ है कि सरकार मामले में कुछ नहीं छिपा रही है. कोर्ट अब अगले हफ्ते मामले की सुनवाई करेगा. वहीं, दूसरी तरफ यूपी पुलिस और SIT केस से जुड़े सबूत ढूंढने में लगी हुई है. इधर, पीड़िता के परिवार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट ने पीड़िता के परिजनों की याचिका खारिज कर दी है.
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