स्टिंग में खुलासा: रात में इसलिए जलाया गया पीड़िता का शव! हाथरस कांड पर SO के चौंकाने वाले दावे

एसओ दिनेश शर्मा ने कहा कि सबसे पहले एफआईआर सिर्फ एक आरोपी संदीप के खिलाफ दर्ज की गई थी.
एसओ दिनेश शर्मा ने कहा कि सबसे पहले एफआईआर सिर्फ एक आरोपी संदीप के खिलाफ दर्ज की गई थी.

#News18OperationHathras न्यूज18 ने बातचीत में जब दिनेश वर्मा ने पूछा कि आखिरकार क्यों पीड़िता का रात में ही अंतिम संस्कार किया गया तो उन्होंने कहा कि उनके पास एलआईयू की रिपोर्ट थी, जिसमें अंदेशा था कि पीड़िता का परिवार और समाज के तमाम लोग शव को सड़क पर रखकर हंगामा कर सकते थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 8:14 PM IST
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नई दिल्ली/हाथरस. उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक दलित लड़की के साथ कथित गैंगरेप (Hathras Gangrape Case) और मौत के बाद देशभर में गुस्सा है. हाथरस केस में एक तरफ दंगे करवाने की साजिश के खुलासे हो रहे हैं. #News18OperationHathras के तहत News18 की टीम खुफिया कैमरों के साथ इस मामले को लेकर किए जा रहे झूठे दावों और फर्जी खबरों के पीछे छिपे सच को जानने के लिए हाथरस पहुंची, जिससे ये पता चल सके कि पीड़िता के साथ आखिर क्या हुआ था? न्यूज18 ने इस घटना से जुड़े उन लोगों से बातचीत की जिन्होंने सबसे पहले इस मामले को हैंडल किया था. हाथरस के निलंबित इंस्पेक्टर दिनेश वर्मा ने न्यूज18 से कहा कि मुझको सस्पेंड इसलिए किया गया क्योंकि मैं तत्कालीन इंस्पेक्टर था, इस मैटर को हम दबा नहीं पाए.

न्यूज18 ने बातचीत में जब दिनेश वर्मा ने पूछा कि आखिरकार क्यों पीड़िता का रात में ही अंतिम संस्कार किया गया तो उन्होंने कहा कि उनके पास एलआईयू की रिपोर्ट थी, जिसमें अंदेशा था कि पीड़िता का परिवार और समाज के तमाम लोग शव को सड़क पर रखकर हंगामा कर सकते थे. वर्मा के मुताबिक, वो लोग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मौके पर बुलाने की मांग करने वाले थे. मामला और बिगड़ न जाए, हिंसा न भड़के इसलिए प्रशासन को मजबूरी में पीड़िता के अंतिम संस्कार का फैसला करना पड़ा.

पहले एक के खिलाफ थी शिकायत
एसओ दिनेश वर्मा के मुताबिक घटना की पहली शिकायत, सिर्फ इतनी थी कि संदीप ने जान से मारने की नीयत से पीड़िता का गला दबाया है. दिनेश ने बताया कि 14 सितंबर की तारीख को सिर्फ पीड़िता ही नहीं, उसकी मां और भाई भी पुलिस से यही शिकायत कर रहे थे. एसओ दिनेश वर्मा ने कहा कि चार आरोपी राजनीति के तहत आ गए कि उनसे कह दिया गया होगा कि 25-30 लाख रुपये मिल जाएंगे.



दिनेश वर्मा ने कहा कि पहली एफआईआर एससी/एसटी और 307 के तहत दर्ज की गई थी न कि रेप की एफआईआर दर्ज की गई थी. वर्मा के मुताबिक, 14 सितंबर को जो मेडिकल हुआ उसमें रेप की बात सामने नहीं आई थी. दोबारा जब 22 तारीख को इंटर्नल मेडिकल हुई उसमें भी कुछ सामने नहीं आया.
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