भारतीय नेता; जिनकी मूंछों की तारीफ की थी मुशर्रफ ने, पर बेटे ने नहीं अपनाई परंपरा

हजारीलाल रघुवंशी का 93 साल की उम्र में निधन हो गया.
हजारीलाल रघुवंशी का 93 साल की उम्र में निधन हो गया.

मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर हजारीलाल रघुवंशी (Hazarilal Raghuvanshi) ने जब पाकिस्तान का दौरा किया, तब परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) उनकी मूंछों के दीवाने हो गए थे.

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  • Last Updated: April 10, 2020, 7:28 PM IST
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नई दिल्ली: कभी अपनी मूंछों के लिए परवेज मुशर्रफ की तारीफ पा चुके हजारीलाल रघुवंशी (Hazarilal Raghuvanshi) अब हमारे बीच नहीं हैं. उन्होंने 93 साल की उम्र में गुरुवार को अंतिम सांस ली. कांग्रेस नेता रघुवंशी मध्य प्रदेश विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भी रहे. उन्होंने 2007 में पाकिस्तान का दौरा भी किया, जहां परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) उनकी मूंछों के दीवाने हो गए थे.

हजारीलाल रघुवंशी 2007 में पाकिस्तान का दौरा करने वाली उस भारतीय दल का हिस्सा थे, जो कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन में हिस्सा लेने के लिए इस्लामाबाद गया था. इसी समिट के दौरान रघुवंशी की मूंछों ने पाकिस्तान के पूर्व जनरल परवेज मुशर्रफ का ध्यान खींचा. मुशर्रफ उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सके. उन्होंने प्रशंसाभरे लहजे में कहा, आप मध्य प्रदेश की विधानसभा में क्या कर रहे हैं. आप पाकिस्तानी सेना में क्यों नहीं हैं.

मध्य प्रदेश विधानसभा में स्पीकर रह चुके ईश्वरदास रोहाणी ने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तानी सेना में शामिल होने की बात सिर्फ एक मजाक थी. मुझे लगता है कि यह दिल से निकली प्रशंसा थी. हजारीलाल रघुवंशी ने भी मुशर्रफ का जवाब उन्हीं के अंदाज में दिया था. उन्होंने कहा था कि हमारा ज्ञान, मूंछों से कहीं बेहतर है.



हजारीलाल रघुवंशी बताते थे कि उन्होंने जिंदगी में सिर्फ दो बार मूंछें साफ कीं. उन्होंने ऐसा तभी किया जब उनके माता-पिता का निधन हुआ. इसके अलावा उन्होंने कभी भी मूंछें साफ नहीं की. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि जिन मूंछों के लिए उन्हें देश-विदेश में वाहवाही मिलती थी, उसे उनके बेटे या पोते ने नहीं अपनाया.
आज के दौर में जब ज्यादातर लोग क्लीन शेव रहना पसंद करते हैं, तब रघुवंशी कहते थे, मूंछें शान की बात है, शर्म या तिरस्कर की नहीं. हालांकि, उनकी इन बातों से उनके बेटे और पोते ने कभी इत्तफाक नहीं रखा. रघूवंशी बताते थे कि वे चाहते थे कि उनके बेटे और पोते मूंछें रखें. उन्होंने इसके लिए कई बार दबाव भी बनाया, लेकिन वे नहीं माने. उन्होंने दबाव बनाने के लिए कुछ समय तो उनसे बात भी बंद कर दी थी. फिर भी बात नहीं बनी.

रघुवंशी सिर्फ मूंछों के ही शौकीन नहीं थे. वे तगड़ी एक्सरसाइज भी करते थे. घरवाले बताते हैं कि वे 80 साल की उम्र तक 100 बार उठक-बैठक लगाते थे और घी में सने पांच पराठे खाते थे. हालांकि, इसके बाद उन्होंने एक्सराइज और खाना दोनों ही कम कर दिया. हजारीलाल रघुवंशी ने 93 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी मूंछों का जिक्र हमेशा रहेगा.

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