बिना तैयारी के कोर्ट पहुंचा NGO, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की सांसद-मंत्रियों के अवैध कब्जे से जुड़ी PIL

बिना तैयारी के कोर्ट पहुंचा NGO, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की सांसद-मंत्रियों के अवैध कब्जे से जुड़ी PIL
दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जे से जुड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया है (सांकेतिक फोटो)

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने बुधवार को उस जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि करीब 82 सरकारी बंगले (Government Bungalows) ऐसे हैं जिन पर पूर्व मंत्रियों और पूर्व सांसदों (Former Ministers and MPs) ने अवैध तरीके से कब्जा कर रखा है.

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  • Last Updated: September 30, 2019, 8:31 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने बुधवार को उस जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि करीब 82 सरकारी बंगले (Government Bungalows) ऐसे हैं जिन पर पूर्व मंत्रियों और पूर्व सांसदों (Former Ministers and MPs) ने अवैध तरीके से कब्जा कर रखा है.

जनहित याचिका (PIL) में इन नेताओं से बंगले (Bungalows) खाली कराने की भी मांग की गयी थी.

पीठ ने कहा, "अच्छा उद्देश्य लेकिन बिना तैयारी के"
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने एक NGO की याचिका को खारिज कर दिया जो अदालत को यह नहीं बता सका कि अवैध रूप से कब्जाये गये बंगले कौन-कौन से हैं. हालांकि अदालत ने गैर सरकारी संगठन ‘एंटी करप्शन काउंसिल ऑफ इंडिया’ को नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता दी जिसमें सारा ब्योरा हो.
पीठ ने कहा, ‘‘उद्देश्य अच्छा है, लेकिन बिना किसी तैयारी के. वास्तविक तथ्यों और आंकड़ों के साथ आइए. हम इसे विचारार्थ स्वीकार नहीं कर रहे.’’ याचिका में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गयी थी कि पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों या पूर्व विधायकों द्वारा कथित रूप से अवैध तरीके से कब्जा करके रखे जा रहे सरकारी बंगलों को खाली करने के कदम उठाये जाएं.



हाल ही में सरकारी बंगलों को खाली कराने को बना है कानून
इससे पहले सरकार ने सरकारी स्थान (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) संशोधन अधिनियम 2019 को 15 सितंबर से लागू किया था. मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया था कि ऐसे सांसदों को संसद सदस्यता खत्म होने की तारीख से 30 दिन के भीतर बंगला खाली करना होता है लेकिन ऐसा नहीं कर पाने वाले सांसदों को संपदा निदेशालय (Directorate of Estates) की ओर से 15 दिन का नोटिस भी भेजा जा चुका है. उन्होंने बताया कि अब नया कानून लागू होने के बाद 15 दिन के नोटिस की औपचारिकता पूरी करने की जरूरत नहीं होगी.

संशोधित कानून के तहत अब कब्जाधारक को बंगला खाली नहीं करने का कारण बताने के लिये सिर्फ तीन दिन का समय देते हुये एक नोटिस जारी किया जाएगा. संतोषजनक कारण नहीं बता पाने पर संपदा निरीक्षक संपत्ति को खाली करा सकेंगे.

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