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क्या भारत में कोरोना की तीसरी लहर का पीक निकल गया? हेल्थ एक्सपर्ट्स ने दी ये चेतावनी

क्या भारत में कोरोना की तीसरी लहर का पीक निकल गया? हेल्थ एक्सपर्ट्स ने दी ये चेतावनी

कोरोना की तीसरी लहर के बीच अब थोड़ी राहत मिलते दिख रही है.(फाइल फोटो)

कोरोना की तीसरी लहर के बीच अब थोड़ी राहत मिलते दिख रही है.(फाइल फोटो)

Health Expert reaction on Corona Third wave peak:  दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में पिछले कुछ दिनों में कोविड-19 के मामलों में गिरावट देखने को मिली है. जिसके बाद यह अनुमान लगाया जाने लगा है कि कोरोना की तीसरी लहर का पीक निकल गया है लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इससे इनकार किया है. उन्होंने कहा कि विभिन्न शहरों और जिलों के लिए कोरोना लहर का पीक अलग-अलग हो सकता है और देश के हर हिस्से में भी कोरोना की लहर का पीक अलग-अलग होगा. 

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नई दिल्ली: देश के कई शहरों दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में पिछले कुछ दिनों में कोरोना के मामलों (Corona Cases) में गिरावट देखने को मिली है. जिस पर अधिकारियों का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर (Corona Third Wave) का बुरा वक्त गुजर चुका है लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि पीक आना अभी बाकी है. पिछले साल दिसंबर और इस साल जनवरी की शुरुआत में देश के कई शहरों में कोविड-19 संक्रमण (Covid-19) के मामलों में तेजी देखने को मिली थी. हालांकि, सोमवार को दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में कोरोना के केस में कमी आई है जो कि पिछले हफ्ते की तुलना में काफी कम हैं.

दरअसल पिछले कुछ दिनों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में कोविड-19 संक्रमण के केस, दूसरी लहर में आए मामलों की तुलना में और ज्यादा बढ़ गए थे. अगर अधिकारियों की मानें तो उनका कहना है कि तीसरी लहर का पीक निकल चुका है, क्योंकि रोजाना आने वाले मामलों में गिरावट आई है. देश के उन शहरों में कोरोना के मामलों में गिरावट आना क्या इस बात का संकेत है कि कोरोना की तीसरी लहर का पीक निकल चुका है. क्योंकि ये वे शहर हैं जो इस और पिछली लहर में सबसे ज्यादा प्रभावित थे. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है…

महामारी विशेषज्ञ डॉ चंद्रकांत लहरिया से जब यह पूछा गया कि क्या कोरोना की तीसरी लहर का पीक निकल चुका है. तो उन्होंने CNN-News18 से बात करते हुए कहा कि, इस कोविड-19 की इस लहर में पारंपरिक लहर देखने को नहीं मिलेगी. हम देश भर में चरणबद्ध तरीके से वृद्धि देखेंगे और गिरावट शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले मामले उच्च स्तर पर रहेंगे.

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कोरोना की इस मौजूदा लहर में व्यक्तिगत स्तर पर पीक का कोई मतलब नहीं है. अगर आपके आसपास संक्रमण फैल रहा है तो लोगों को सतर्क रहना चाहिए. पीक सिर्फ महामारी विज्ञान के अध्ययन और उससे जुड़ी योजना को तैयार करने के लिए होता है. वैसे रोजाना आने वाले कोरोना के मामलों में गिरावट होने से पीक का अंदाज लगाना, यह एक सही इंडिकेटर नहीं है.

वहीं दूसरी ओर, डॉ विनीता बल ने कहा कि विभिन्न शहरों और जिलों के लिए कोरोना लहर का पीक अलग-अलग हो सकता है और देश के हर हिस्से में भी कोरोना की लहर का पीक अलग-अलग होगा. CNN-News18 से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई में पिछले 5 दिनों से कोविड-19 के केस कम होने लगे हैं जबकि मैं पुणे में रहती हूं जहां कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई है.

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लोग राज्य और शहर के अनुसार कोरोना की लहर के पीक की बात करते हैं यह एक गलत अवधारणा है. क्योंकि केस उन इलाकों में बढ़ते हैं जहां वायरस का संक्रमण ज्यादा होता है. मेट्रो सिटी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं लेकिन यूपी और बिहार में ज्यादा मामले नहीं हैं. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि देशव्यापी कोरोना लहर होती है.

इस बीच सोमवार को आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि पूरे देश में कोरोना के ग्राफ में तेजी से महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं. मनिंद्र अग्रवाल, कोरोना के मामलों की वैज्ञानिक आधार पर गणना करने वाले ‘सूत्र मॉडल’ के प्रमुख हैं. उन्होंने कहा कि कोविड-19 केस में यह बदलाव मॉडल प्रिडिक्शन की तुलना में थोड़े अलग हैं. उन्होंने कहा कि कोरोना की पीक वैल्यू अनुमान अब तक अच्छा बना हुआ है.

Tags: Coronavirus, Omicron

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