कोरोना संक्रमण में गिरावट और मौत के आंकड़ों में उछाल क्यों? एक्सपर्ट्स से जानें

इस वक्त प्रदेश में एक्टिव केसों की काफी ज्यादा  है. (सांकेतिक फोटो)

इस वक्त प्रदेश में एक्टिव केसों की काफी ज्यादा है. (सांकेतिक फोटो)

Covid-19 death toll may continue to rise: डॉ. कुमार ने कहा कि पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी के मामले ज्यादा सामने आए हैं.

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नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण के चलते बुधवार को देश में 4529 लोगों की मौत हुई, जो महामारी की शुरुआत के बाद से एक दिन में सर्वाधिक मौतों का आंकड़ा है, यद्यपि देश में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है. कोरोना की मौजूदा स्थिति पर एएनआई से बातचीत में विशेषज्ञों ने कहा कि अगले कुछ हफ्तों तक देश में कोरोना से मौत के मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिल सकती है, जब तक कि आंकड़ों में स्थिरता नहीं आ जाती है.

पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर वीके मोंगा ने कहा कि ये सच है कि पिछले 10 दिनों में संक्रमण के मामलों की संख्या और दर में गिरावट आई है, लेकिन मौत के मामलों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि अभी बहुत सारे मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, मेडिकल सपोर्ट की वजह से लंबे समय तक अस्पताल में बने हुए हैं. लेकिन, कोरोना संक्रमण से पैदा हुए खतरों के चलते तमाम केयर के बावजूद लोग दम तोड़ दे रहे हैं. इसलिए मौत के मामलों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है.

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दिल्ली स्थित लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल के डॉक्टर सुरेश कुमार ने कहा कि ये बहुत चिंतित करने वाला है, क्योंकि हम ऐसा पहली बार देख रहे हैं. दिल्ली में मौत के मामलों में कमी आ रही है, लेकिन दूसरे राज्यों को देखें तो मौत के मामले बढ़ रहे हैं. देश में लगभग रोजाना 4 हजार से ज्यादा मौत के मामले आ रहे हैं. डॉ. कुमार ने कहा कि पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी के मामले ज्यादा सामने आए हैं.
उन्होंने कहा, "लोगों का ऑक्सीजन लेवल 60 से 70 प्रतिशत गिरता हुआ देखने को मिला है. बहुत सारे मरीजों ने अस्पताल लाए जाने के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया. हमने देखा है कि बहुत सारे मरीजों को अस्पताल लाए जाने के तुरंत बाद ही आईसीयू में शिफ्ट किया गया है. ये सभी कारण मौत के लिए जिम्मेदार हैं और इसीलिए मामले लगातार बढ़ रहे हैं."

मेदांता अस्पताल में वस्कुलर सर्जरी के चेयरमैन डॉक्टर राजीव परख ने कहा, "देश में 4000 से ज्यादा मौतों के मामले सामने आ रहे हैं. इसके साथ ही बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं, जिनकी मौत हो गई, लेकिन उनका टेस्ट नहीं हुआ. संक्रमण की दूसरी लहर में मृत्यु दर बहुत ज्यादा है और इससे बड़े पैमाने पर लोग प्रभावित हुए हैं." परख ने कहा, "बड़ी संख्या में लोगों की मौत का कारण वायरस के म्यूटेशन की तीव्रता हो सकती है. पहली लहर में वायरस का स्ट्रेन इतना ज्यादा संक्रामक और तीव्र नहीं था."

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