हम पर ओवर एक्टिव होने के आरोप लगे, लेकिन केरल ने साबित किया कि वह सही रास्ते पर है: स्वास्थ्य मंत्री

हम पर ओवर एक्टिव होने के आरोप लगे, लेकिन केरल ने साबित किया कि वह सही रास्ते पर है: स्वास्थ्य मंत्री
केरल की पिनराई विजयन सरकार कोरोना वायरस को नियंत्रित करने में काफ हद तक कामयाब रही है.

केरल में देश का पहला कोरोना पॉजिटिव केस आया था. एक समय यहां देश के सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज थे. अब यहां 448 लोग ही इस वायरस से संक्रमित हैं. अब देश के 12 राज्यों में केरल से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस हैं. 

  • News18India
  • Last Updated: April 25, 2020, 2:39 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कोरोना वायरस ने पूरे देश में कोहराम मचा रखा है. देश के जिन इलाकों में भी यह पहुंचा, वहां बढ़ता ही जा रहा है. एक अकेला केरल ऐसा राज्य है, जो इस वायरस पर काबू पाने में काफी हद तक कामयाब नजर आता है. यह बात और अहम इसलिए हो जाती है कि देश में कोरोना का पहला मामला केरल में ही सामने आया था. केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा कहती हैं, ‘जब हमने जब इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाए, तो हम पर सनसनी फैलाने या घबराहट पैदा करने के आरोप लगे. लेकिन केरल ने साबित कर दिया कि वह सही रास्ते पर है.’

केरल में भारत का पहला कोरोना पॉजिटिव केस आया था. एक समय यहां देश के सबसे अधिक कोरोना संक्रमित मरीज थे. लेकिन इस राज्य ने इस पर अब तक अच्छा नियंत्रण रखा है. केरल में अब तक 448 लोग इस वायरस से संक्रमित हैं. इनमें से तीन लोगों की मौत हो चुकी है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने इस बारे में केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा से बात की.





क्या केरल पर मंडरा रहा कोविड-19 का खतरा टल गया है? इस सवाल के जवाब में केके शैलजा कहती हैं, ‘ऐसा नहीं है. हम नहीं मानते कि कोविड-19 की समस्या एक महीने में हल हो सकती है. फिलहाल हमारे यहां इसकी रफ्तार में कमी आई है. एक और अच्छी बात यह है कि यहां कम्युनिटी स्तर पर संक्रमण नहीं हुआ है, जबकि यहां खाड़ी के देशों से खूब लोग लौटे हैं. लेकिन हम अभी केरल को सुरक्षित जगह मानकर नहीं बैठ सकते हैं. हमारे पड़ोसी राज्यों में कोरोना तेजी से फैल रहा है. हमें पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद रहना होगा. मैंने अपने विभाग से कह दिया है कि हमें करीब पांच महीने की लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा.’
अब केरल के सामने क्या चुनौतियां हैं? इस सवाल के जवाब में केरल की स्वास्थ्य मंत्री कहती हैं, ‘केरल में लौटने वाले प्रवासियों की संख्या बड़ी है. खाड़ी में रह रहे प्रवासी भारतीय के अनुभव हमें चिंतित कर रहे हैं. कई लोगों को कहना है कि उनमें कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन वहां उनका टेस्ट नहीं हो रहा है. हमें ऐसे लोगों को योजना बना कर और प्राथमिकता के साथ स्वदेश लाना होगा. राज्य में बहुत सारे छात्र हॉस्टल में रह रहे हैं. उन्हें भी घर लौटना है. हमें क्वारंटाइन के लिए इंतजाम और टेस्ट किट बढ़ाने होंगे.’

केरल ने कैसे तैयारी की और आगे की क्या योजना है? इन सवालों के जवाब में केके शैलजा कहती हैं, ‘जब हमने जनवरी की शुरुआत में वुहान में फैले कोरोना वायरस के बारे में सुना, तभी से हम सतर्क थे. हमने मीटिंग की. मैंने अधिकारियों से कहा कि केरल के बहुत सारे छात्र चीन में हैं. वे लौटेंगे तो उनकी स्क्रीनिंग होनी चाहिए. 24 जनवरी को ही हमने एक्शन प्लान बना लिया था. हमने एयरपोर्ट पर अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त किए ताकि कोई भी व्यक्ति बिना स्क्रीनिंग के वहां से ना निकल सके. जिनमें भी कोरोना के लक्षण दिखे, उन्हें क्वारंटाइन किया. अभी स्थिति नियंत्रण में हैं. लेकिन हम बुरी स्थिति के लिए भी तैयार हैं. हमने स्कूल ऑडिटोरियम में क्वारंटाइन सेंटर बनाने की तैयारी कर रखी है. स्वास्थ्य कर्मचारियों का उत्साह बनाए रखना भी चुनौती है और इसके लिए मैं बात करती रहती हूं.’

वुहान में कोरोना फैलने पर आपने क्या किया? इस सवाल के जवाब में केके शैलजा ने बताया, ‘हमें लग गया था कि यह वायरस हम पर भी असर डालेगा. इसीलिए जब भारत में कोरोना का एक भी केस नहीं आया था, तब से हम एयरलाइंस के संपर्क में थे. एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी. तब विपक्ष हम पर आरोप लगा रहा था कि हम बेवहज सनसनी फैला रहे हैं. हमसे कहा जा रहा था कि हमें अमेरिका या अन्य देशों से सबक लेना चाहिए कि वे अपने प्रवासियों या विदेश से लौट रहे नागरिकों से कैसा बर्ताव कर रहे हैं. यदि हमने उनकी बात मान ली होती तो आज केरल में कोरोना पॉजिटिव की संख्या कई गुना होती. सिर्फ एक परिवार एयरपोर्ट से बिना स्क्रीनिंग के निकल सका. हमने अपने डॉक्टरों की ट्रेनिंग कराई. मुझ पर जरूरत से ज्यादा सतर्कता बरतने के आरोप लगे, लेकिन आज केरल ने साबित कर दिया कि वह सही रास्ते पर है.’

आज हर कोई केरल मॉडल की बात कर रहा है. यह क्या है? केके शैलजा इस के जवाब में कहती हैं, ‘हमने लोगों को ध्यान में रखकर योजना बनाई, जिसमें सभी सहभागी हों. हमने प्रोटोकॉल तय किए और उसे क्रियान्वित करने की प्रक्रिया तय की. लोगों ने इसका पालन किया. सरकार के पास पैसों की कमी थी, तो लोग मदद के लिए सामने आए. सांसद, विधायक से लेकर आम आदमी तक ने मदद की. अच्छी बात यह है कि पिछले चार साल से हम राज्य के स्वास्थ्य विभाग को मजबूत कर रहे थे. स्वास्थ्य सेवाएं सरकार की प्राथमिकता में शामिल रही हैं. ऐसे में हमें बेहर स्वास्थ्य सेवाओं का भी फायदा मिला.’

केरल के पास रोज 2 हजार लोगों का टेस्ट करने की क्षमता है. फिर भी 600-700 टेस्ट ही रोज हो रहे हैं. ऐसा क्यों. इस सवाल के जवाब में शैलजा कहती हैं कि जितने भी लोगों का टेस्ट जरूरी लगता है, उनका किया जा रहा है. लेकिन स्वास्थ्य विभाग को सतर्कता भी बरतनी है. उसे आपात स्थिति के लिए भी तैयार रहना है. ऐसा ना हो कि जब ज्यादा टेस्ट की जरूरत हो तब किट कम पड़ जाएं. इसलिए टेस्ट किट का सोच-समझकर इस्तेमाल किया जा रहा है.

यह भी पढ़ें: 

Lockdown 2.0: आज से खुल रहे हैं ब्यूटी पार्लर और सैलून, जानें क्या है नियम


57 संदिग्ध मौत पर ममता सरकार की दलील, 18 की ही जान कोरोना से गई

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज