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राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद: सुप्रीम कोर्ट में रोज हुई सुनवाई तब भी लगेंगे 8 महीने!

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अहम सुनवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अहम सुनवाई होगी.

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में 533 एक्जीबिट, 87 गवाह जिन के बयान 14000 पन्नों में हैं और हजारों दस्तावेज हैं जो संस्कृत, उर्दू, अरबी, फारसी, हिंदी और अंग्रेज़ी में हैं. इन सब को पढ़ने में ही काफी समय लग सकता है.

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राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट 10 जनवरी तक टाल दिया है. शुक्रवार को अदालत में दो अलग-अलग मामले सुनवाई के लिए सूचिबद्ध थे. एक विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर है और दूसरा एक जनहित याचिका है जिसमें इस मामले के जल्द सुनवाई करने की मांग की गई है.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ में विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई होनी थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2.67 अकड़ ज़मीन को तीन हिस्सों में बांट दिया था.एक हिस्सा राम लला विराजमान, एक हिस्सा निर्मोही अखाड़ा और एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया है. तीनों ही पक्षों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में ये तय होना था कि इस मामले कि किस बेंच में सुनवाई होगी और सुनवाई कब से शुरू होगी. अब 10 जनवरी को इस पर फैसला होगा.

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इस पर किसी तरह का आंकलन करना संभव नहीं और ये पूरी तरह चीफ जस्टिस पर निर्भर करता है. कुछ पक्षकार रोजाना सुनवाई कि मांग कर रहे हैं. इस पर भी फैसला चीफ जस्टिस या फिर उस बेंच पर निर्भर करता है जो इस मामले कोई सुनवाई करेगी.

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अगर रोजाना सुनवाई भी होती है तो यह हफ्ते में सिर्फ मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होगी. सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई के यही नियम है. अब सवाल यह है कि सुनवाई खत्म कब होगी. अगर इलाहाबाद हाई कोर्ट में हुई सुनवाई को देखे तो वहां 100 दिन सुनवाई हुई थी. अगर सुप्रीम कोर्ट में इसी रफ्तार से सुनवाई होती है तो कम से कम 8 महीने सुनवाई चल सकती है. हालांकि जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में इससे कहीं ज्यादा लंबी सुनवाई हो सकती है.

इस मामले में 533 एक्जीबिट, 87 गवाह जिन के बयान 14000 पन्नों में हैं और हजारों दस्तावेज हैं जो संस्कृत, उर्दू, अरबी, फारसी, हिंदी और अंग्रेज़ी में हैं. इन सब को पढ़ने में ही काफी समय लग सकता है. शुक्रवार को इसके अलावा एक जनहित याचिका पर भी सुनवाई होगी.

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हरीनाथ राम नाम के वकील ने मांग की है कि इस मामले की जल्द सुनवाई कर निपटारा किया जाए क्योंकि ये करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है. हालांकि कोर्ट यह कई बार दोहरा चुका हाई की इस मामले की जल्द सुनवाई नहीं होगी.

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