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PSA के तहत उमर अब्दुल्ला की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल

भाषा
Updated: February 11, 2020, 11:30 PM IST
PSA के तहत उमर अब्दुल्ला की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल
उमर अब्‍दुल्‍ला को हिरासत में लिए जाने पर सुनवाई कल.

उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) को जनसुरक्षा कानून/पीएसए (PSA) के तहत हिरासत में रखा गया है. अब उनकी बहन सारा अब्‍दुल्‍ला पायलट की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई होगी.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 11:30 PM IST
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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) को जनसुरक्षा कानून/पीएसए (PSA) -1978 के तहत हिरासत में रखने के खिलाफ उनकी बहन द्वारा दायर याचिका पर उच्चतम न्यायालय बुधवार को सुनवाई करेगा. सारा अब्दुल्ला पायलट की ओर से दायर याचिका पर न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ सुनवाई करेगी.

'अब्‍दुल्‍ला को हिरासत में रखना स्‍पष्‍ट रूप से गैरकानूनी'
पायलट ने अपनी याचिका में कहा है कि अब्दुल्ला को हिरासत में रखना 'स्पष्ट रूप से गैरकानूनी' है और उनसे 'कानून व्यवस्था को किसी खतरे' का कोई सवाल ही नहीं है. याचिका में अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में रखने के पांच फरवरी के आदेश को रद्द करने के साथ उन्हें अदालत के समक्ष पेश कराने का अनुरोध किया गया है.

उमर अब्‍दुल्‍ला की बहन ने याचिका में दिया ये तर्क

पायलट ने कहा कि प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के खिलाफ विरोध को दबाया जा सके, गलत तरीके से दंड प्रक्रिया संहिता का इस्तेमाल कर राजनीतिक नेताओं और लोगों को हिरासत में रखा है. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि इस शक्ति का इस्तेमाल करने का उद्देश्य न केवल उमर अब्दुल्ला को कैद में रखने के लिए, बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूरे नेतृत्व को और साथ ही अन्य राजनीतिक पार्टियों के नेतृत्व को कैद में रखने का है. इसी तरह का व्यवहार फारूक अब्दुल्ला के साथ किया गया है जिन्होंने वर्षों तक राज्य और केंद्र की सेवा की... जब भी जरूरत पड़ी, भारत के साथ खड़े हुए.

अब्‍दुल्‍ला को हिरासत में रखना अनुच्‍छेद 14, 21, 22 का उल्‍लंघन
सारा ने अपनी याचिका में कहा कि अब्दुल्ला को हिरासत में लेना संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 का उल्लंघन है. उल्लेखनीय है कि 2009 से 2014 तक मुख्यमंत्री रहे उमर अब्दुल्ला के खिलाफ प्रशासन ने पीएसए यह कहकर लगाया कि उन्होंने अनुच्छेद-370 और 35 ए के मामले में लोगों को भड़काने की कोशिश की.याचिका में दिया गया ये तर्क
इसमें कहा गया है, यह बिरला मामला है कि वे लोग जिन्होंने सांसद, मुख्यमंत्री और केन्द्र में मंत्री के रूप में देश की सेवा की और राष्ट्र की आकांक्षाओं के साथ खड़े रहे, उन्हें अब राज्य के लिए खतरा माना जा रहा है. याचिका में कहा गया है कि उमर अब्दुल्ला को चार-पांच अगस्त, 2019 की रात घर में ही नजरबंद कर दिया गया था. बाद में पता चला कि इस गिरफ्तारी को न्यायोचित ठहराने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 107 लागू की गई है. इसके अनुसार, इसलिए यह नितांत महत्वपूर्ण और जरूरी है कि यह न्यायालय व्यक्ति के जीने और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा ही नहीं करे बल्कि संविधान के भाग के अनुरूप अनुच्छेद 21 के भाव की भी रक्षा करे क्योंकि जिसका उल्लंघन एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए अभिशाप है. याचिका में उमर अब्दुल्ला को जन सुरक्षा कानून के तहत नजरबंद करने संबंधी पांच फरवरी का आदेश निरस्त करने का अनुरोध किया गया है.

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First published: February 11, 2020, 11:30 PM IST
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