IIT हैदराबाद का बड़ा अविष्कार, नाखून के बराबर का सेंसर लगाएगा दिल की बीमारियों का पता

आईआईटी हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने ह्रदय रोगों का तेजी से पता लगाने के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन सेंसर डिवाइस विकसित किया है. इस सेंसर डिवाइस की मदद से चंद मिनट में ह्रदय से संबंधित बीमारियों का पता लगाया जा सकता है.

Sanjay Tiwari | News18Hindi
Updated: August 20, 2019, 1:03 PM IST
IIT हैदराबाद का बड़ा अविष्कार, नाखून के बराबर का सेंसर लगाएगा दिल की बीमारियों का पता
दिल की बीमारियों का पता लगाने को IIT हैदराबाद ने नाखून के साइज का सेंसर बनाया है (फाइल फोटो)
Sanjay Tiwari
Sanjay Tiwari | News18Hindi
Updated: August 20, 2019, 1:03 PM IST
आईआईटी हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने ह्रदय रोगों का तेजी से पता लगाने के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन सेंसर डिवाइस विकसित किया है. इस सेंसर डिवाइस की मदद से चंद मिनट में ह्रदय से संबंधित बीमारियों का पता लगाया जा सकता है. इतना ही नहीं ह्रदय से जुड़ी बीमारियों की भविष्यवाणी भी की जा सकती है.

आईआईटी हैदराबाद के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख प्रोफेसर रेणु जॉन और दिल्ली टैक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बीडी मल्होत्रा की अगुवाई में आईआईटी कानपुर, आईआईटी हैदराबाद, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और अमेरिका की आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर इस सेंसर डिवाइस को बनाया है.

ह्रदय रोगियों के परीक्षण के लिए विकसित किए नई तकनीक वाले बायोसेंसर
ह्रदय रोगियों के क्लीनिकल परीक्षण और ह्रदय रोग की आशंका की जांच के लिए डॉक्टर तमाम तरह के उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए बायोसेंसर्स का भी इस्तेमाल किया जाता रहा है. लेकिन अब तक मौजूद बायोसेंसर्स के मुकाबले प्रोफेसर रेणु जॉन की टीम ने बायोमार्कर पर आधारित बायोसेंसर विकसित किए हैं. दरअसल बायोमार्कर एक जैविक अणु है. शरीर की किसी खास अवस्था में खास किस्म के जैविक अणुओं का निर्माण होता है. ह्रदय से जुड़ी बीमारी होने पर ‘कार्डियक ट्रोपोनिन’ नाम के जैविक अणुओं का निर्माण होता है. ‘कार्डियक ट्रोपोनिन’ अणु हमारे खून में मौजूद एंडीबॉडीज से जुड़े रहते हैं. इनकी मौजूदगी ह्रदय से जुड़ी बीमारी का सबूत है. ‘कार्डियक ट्रोपोनिन’ अणु जुड़े होने की वजह से एंटीबॉडीज में होने वाली इलेक्ट्रिकल या ऑप्टिकल हलचल को बायोसेंसर्स पढ़ लेते हैं और इससे बीमारी की स्थिति का पता चल जाता है.

खून के महज एक कतरे से कर लेगा परीक्षण
अब तक ‘कार्डियक ट्रोपोनिन’ अणु के बारे में पता करने के लिए एलिसा और कैमिल्यूमिनिसेंट जैसे टेस्ट किए जाते थे. यह काफी महंगे टेस्ट हैं और ज्यादा संवेदनशील भी नहीं हैं. आईआईटी हैदराबाद की प्रोफेसर रेणु जॉन की टीम ने ‘कार्डियक ट्रोपोनिन’ अणुओं की जांच के लिए ‘माइक्रोफ्लुइडिक्स’ तकनीक का इस्तेमाल किया है और इस तकनीक पर आधारित सेंसर डिवाइस विकसित की है. यह सेंसर डिवाइस एक मैमोरी चिप के बराबर होती है और खून के महज एक कतरे का परीक्षण करके सटीक नतीजे बता पाने में सक्षम है. प्रोफेसर रेणु जॉन और उनकी टीम की यह उपलब्धि प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ मैटेरियल केमिस्ट्री-B में प्रकाशित हुई है.

यह भी पढ़ें: सबसे बड़ी हेल्थ स्कीम में आप ऐसे देख सकते हैं अपना नाम

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 19, 2019, 11:33 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...