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    Assam Flood : तीसरी बार बाढ़ की चपेट में असम, अब तक 3.17 लाख लोग प्रभावित

    ब्रह्मपुत्र नदी के आज खतरे के निशान से 6 सेंटीमीटर बढ़ने का अलर्ट है (PTI)
    ब्रह्मपुत्र नदी के आज खतरे के निशान से 6 सेंटीमीटर बढ़ने का अलर्ट है (PTI)

    Floods in Assam: रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से नौगांव जिले में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और धेमाजी जिले में एक व्यक्ति लापता है. राज्य में इस साल बाढ़ से अब तक 119 लोगों की मौत हो चुकी है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: September 29, 2020, 11:28 AM IST
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    दिसपुर. भारी बारिश के कारण पूर्वोत्तर राज्य असम तीसरी बार बाढ़ (Floods in Assam) की चपेट में आ गया है. पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के बाद ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra) और उसकी सहायक नदियों का जल स्तर बढ़ रहा है. ब्रह्मपुत्र नदी के आज खतरे के निशान से 6 सेंटीमीटर बढ़ने का अलर्ट है. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के मुताबिक, इस साल तीसरी बार बाढ़ के कारण राज्य के 13 जिलों के 3.17 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों में 43 राहत शिविर भी बनाए हैं.

    एएसडीएमए की रिपोर्ट के मुताबिक, 'नौगांव जिले में ही केवल 1.51 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. जबकि मोरीगांव में 32,700, धेमाजी में 17,000, डिब्रूगढ़ में 11,000 और तिनसुकिया जिले में 9,300 लोग प्रभावित हुए हैं.' नौगांव, मोरीगांव, पश्चिम कार्बी आंगलांग, धेमाजी, माजुली, शिवसागर, तिनसुकिया और लखीमपुर जिले के 219 गांवों में बाढ़ का पानी 9,948 हेक्टेयर कृषि भूमि को बर्बाद कर चुका है.

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    नौगांव जिले पर बाढ़ का सबसे ज्यादा असर
    बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नौगांव जिले पर पड़ा है. बाढ़ के पानी ने तटबंधों को तोड़ दिया और घरों में जा घुसा. कई गांवों के लोगों को मजबूरी में अपने घरों को छोड़कर ऊंचाई वाले इलाके में जाना पड़ा है. कुछ लोगों ने पानी से बचने के लिए सड़क पर भी पनाह ली है. बताया जा रहा है कि 38 हजार से अधिक पालतू जानवर भी बाढ़ के कारण प्रभावित हुए हैं.

    रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से नौगांव जिले में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और धेमाजी जिले में एक व्यक्ति लापता है. राज्य में इस साल बाढ़ से अब तक 119 लोगों की मौत हो चुकी है.

    बाढ़ के साथ-साथ कोरोना की दोहरी मार
    असम सिर्फ बाढ़ ही नहीं, बल्कि कोरोना वायरस से भी जूझ रहा है. सितंबर और अक्टूबर का महीना भारत में इसलिए भी अहम माना जाता है, क्योंकि मलेरिया और डेंगू के मामले भी इसी दौरान तेजी से सामने आते हैं. राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर इन प्राकृतिक आपदाओं के कारण बोझ और बढ़ने की आशंका है. (PTI इनपुट के साथ)
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