अगले हफ्ते देश के कई हिस्सों में फिर भारी बारिश के आसार, खरीफ की फसल के लिए अच्छी खबर

अगले हफ्ते देश के कई हिस्सों में फिर भारी बारिश के आसार, खरीफ की फसल के लिए अच्छी खबर
देश के कई हिस्सों में बारिश होने के आसार हैं (सांकेतिक फोटो)

खरीफ फसलों (Kharif crop) की बुवाई चालू सत्र में अब तक 1,095.38 लाख हेक्टेयर के नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है. अच्छी बारिश (good rain) और फसलों के लिये बीज, उर्वरक तथा अन्य जरूरी सामान की समय पर उपलब्धता से यह संभव हो पाया है. कृषि मंत्रालय (agriculture ministry) ने यह जानकारी दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 7, 2020, 11:12 PM IST
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नई दिल्ली. भारत मौसम विज्ञान विभाग (Indian Meteorological Department) ने सोमवार को कहा कि इस साल का मॉनसून (Monsoon) सामान्य या सामान्य से अधिक की श्रेणी में समाप्त हो सकता है. चार महीने के मॉनसून के मौसम में जून और अगस्त महीने में सामान्य से क्रमश: 17 और 24 प्रतिशत अधिक वर्षा (rain) दर्ज की गयी, वहीं जुलाई में 10 प्रतिशत कम बारिश हुई. आईएमडी (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘‘बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक की श्रेणी में समाप्त हो सकती है.’’ उन्होंने कहा कि इस बार संपूर्ण मॉनसून ‘दीर्घ अवधि औसत’ (LPA) का 102 प्रतिशत हो सकता है जिसमें चार प्रतिशत कम या ज्यादा की त्रुटि हो सकती है. देश में 1961 से 2010 की अवधि में एलपीए बारिश 88 सेंटीमीटर है. ऐसे में खरीफ की फसल (Kharif crop) को काफी फायदा होने का अनुमान है. बंगाल की खाड़ी में इसी सप्ताह एक और निम्न दबाव का क्षेत्र बनने लगा है, जिससे मध्य भारत में मानसूनी बारिश की सक्रियता फिर बढ़ जाएगी. इसके अलावा दक्षिणी राज्यों (Southern States) में भारी बारिश का अनुमान है.

खरीफ फसलों (Kharif crop) की बुवाई चालू सत्र में अब तक 1,095.38 लाख हेक्टेयर के नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है. अच्छी बारिश (good rain) और फसलों के लिये बीज, उर्वरक तथा अन्य जरूरी सामान की समय पर उपलब्धता से यह संभव हो पाया है. कृषि मंत्रालय (agriculture ministry) ने यह जानकारी दी है. धान की बुवाई (Paddy Sowing) अभी भी जारी है जबकि दलहन, मोटे अनाज, बाजरा और तिलहन फसलों (Oil seed crops) की बुवाई लगभग समाप्त हो चली है. कृषि मंत्रालय ने कहा कि चालू खरीफ सत्र के बुवाई के आंकड़ों को दो अक्टूबर को अंतिम रूप दे दिया जायेगा.

खरीफ की बुवाई जून से दक्षिण पश्चिम मानसून आने के साथ शुरु होती है
खरीफ बुवाई का पिछला रिकॉर्ड वर्ष 2016 में हासिल किया गया था जब किसानों ने कुल 1,075.71 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसल बोई थी. खरीफ की बुवाई जून से दक्षिण पश्चिम मानसून आने के साथ शुरु होती है और अक्टूबर से कटाई का काम शुरू होता है. मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ की फसलें इस सत्र में अब तक 1,095.38 लाख हेक्टेयर के रिकॉर्ड क्षेत्र में बोई जा चुकी है, जबकि साल भर पहले बुवाई का रकबा 1,030.32 लाख हेक्टेयर था.
इसमें कहा गया है कि अच्छी बारिश तथा बीज, कीटनाशक, उर्वरक, मशीनरी और ऋण जैसे जरूरी सामान का समय से पहले इंतजाम रखने के कारण महामारी की स्थिति के बावजूद भी खेती के रकबे के दायरे में वृद्धि संभव हुई है.



अब तक देश में वर्षा में कुल 9% की बढ़ोत्तरी
आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सत्र के दौरान धान बुवाई का कुल रकबा 8.27 प्रतिशत बढ़कर 396.18 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 365.92 लाख हेक्टेयर था. दलहनों की बुवाई का रकबा 4.67 प्रतिशत बढ़कर 136.79 लाख हेक्टेयर हो गया है जो पहले 130.68 लाख हेक्टेयर था, जबकि मोटे अनाजों का रकबा 1.77 प्रतिशत बढ़कर 179.36 लाख हेक्टेयर हो गया, जो पहले 176.85 लाख हेक्टेयर था.

इसी तरह, तिलहन का रकबा चालू खरीफ सत्र में अब तक 12 प्रतिशत बढ़कर 194.75 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया, जो पहले 174 लाख हेक्टेयर ही था. नकदी फसलों में, गन्ने की बुवाई का रकबा 1.30 प्रतिशत बढ़कर 52.38 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गयाय जो कि पिछले साल इसी सत्र में 51.71 लाख हेक्टेयर था, जबकि कपास बुवाई का रकबा 3.24 प्रतिशत बढ़कर 128.95 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है, जो पहले 124.90 लाख हेक्टेयर था. देश में अब तक कुल वर्षा में नौ प्रतिशत वृद्धि हुई है. (भाषा के इनपुट सहित)
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