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एम्स के ट्रामा सेंटर में बन रहा है हेलीपैड, एयरलिफ्ट कर भर्ती कराए जा सकेंगे मरीज

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Updated: November 20, 2019, 1:15 PM IST
एम्स के ट्रामा सेंटर में बन रहा है हेलीपैड, एयरलिफ्ट कर भर्ती कराए जा सकेंगे मरीज
एम्स के ट्रामा सेंटर में बन रहा है हेलीपैड.

उम्मीद की जा रही है अगले साल के शुरुआत में ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में इस सुविधा को मंजूरी मिल जाएगी. बताया जा रहा है कि एक महीने के अंदर ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से इसकी मंजूरी के लिए आवेदन किया जाएगा.

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  • Last Updated: November 20, 2019, 1:15 PM IST
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नई दिल्ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ट्रामा सेंटर की छत पर हेलीपैड बनाए जाने का काम अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है. हेलीपैड तैयार हो जाने के बाद एम्स देश का पहला सरकारी अस्पताल होगा, जहां हादसे में घायल लोगों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एयरलिफ्ट कर भर्ती कराया जा सकेगा. उम्मीद की जा रही है अगले साल के शुरुआत में ही इस सुविधा को मंजूरी मिल जाएगी. बताया जा रहा है कि एक महीने के अंदर ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से इसकी मंजूरी के लिए आवेदन किया जाएगा.

एम्स के मीडिया एंड प्रोटोकॉल डिवीजन की चेयरपर्सन डॉ. आरती विज ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल डीजीसीए से हेलीपैड की मंजूरी लेने के लिए तेजी से काम कर रहा है. इस हेलीपैड के चालू हो जाने के बाद गंभीर रूप से बीमार मरीजों को सड़क से सफर नहीं करना होगा बल्कि उन्हें एयरलिफ्ट कर कम समय में एम्स में भर्ती किया जा सकेगा. कई बार दूर-दराज इलाकों से मरीजों को सड़क मार्ग से लाने में काफी दिक्कत होती है. ऐसे में इन मरीजों को एयरलिफ्ट कर तुरंत एम्स में भर्ती कराया जा सकेगा.

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अभी तक मरीजों को कम समय में एम्स तक लाने के लिए अरबिंदो मार्ग के नीचे बने भूमिगत सुरंग वाले रास्ते का इस्तेमाल किया जाता है. यह मार्ग पूर्वी अंसारी नगर में एम्स के मुख्य परिसर को जोड़ता था. डीजीसीए ने पहले हेलीपैड बनाए जाने पर कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसे बाद में दूर कर लिया गया. बताया जा रहा है कि एम्स में बन रहे हेलीपैड को बनाने में उन सभी मानदंडो का खयाल रखा गया है जिसके बारे में डीजीसीए ने जानकारी दी थी.

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एम्स के ट्रामा सेंटर में हर दिन हादसे के शिकार लगभग 150 से 200 लोग इलाज के लिए आते हैं. इनमें से 10 प्रतिशत रोगियों की हालत बेहद गंभीर होती है, जिन्हें तुरंत इलाज की जरूरत होती है. इसी तरह एम्स में पांच से छह केस ऐसे आते हैं, जिन्हें तुरंत भर्ती कराना बेहद जरूरी हो जाता है. उन्नाव रेप केस की पीड़िता का मामला उनमें से एक है. ऐसे में एम्स में बनने वाला हेलीपेड मरीजों की जिंदगी बचाने में अहम साबित हो सकता है.

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First published: November 20, 2019, 12:34 PM IST
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