UP Election Result Live Update: मथुरा में 13 हजार से ज्यादा मतों से आगे हेमा मालिनी

मथुरा लोकसभा नतीजे (Mathura Election Result): हेमा मालिनी मथुरा की लोकसभा सीट से 13 हज़ार से ज्यादा मतों से आगे चल रही हैं.

News18Hindi
Updated: May 23, 2019, 11:04 AM IST
UP Election Result Live Update: मथुरा में 13 हजार से ज्यादा मतों से आगे हेमा मालिनी
हेमा मालिनी लगातार मथुरा सीट से आगे चल रही हैं. (फाइल फोटो)
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Updated: May 23, 2019, 11:04 AM IST
मथुरा में हेमा मालिनी 13,347 वोटों से आगे चल रही हैं. अभी तक मथुरा में 45137 मतों की गिनती पूरी हो चुकी है. जिसमें से हेमा को 28,057 और गठबंध उम्मीदवार नरेंद्र को 14,710 वोट मिले हैं. नोटा पर 280 वोट पड़े हैं.

आएलडी के युवराज जयंत चौधरी ने साल 2009 में मथुरा सीट से राजनीति में डेब्यू किया था और 58% वोटों के साथ जीत हासिल की थी. हालांकि इन चुनावों में आरएलडी-बीजेपी का गठबंधन था और जयंत का मुकाबला श्याम सुंदर शर्मा से हुआ था जिन्हें 28% वोट मिले थे. हालांकि 2014 में मुज़फ्फरनगर दंगों और कोसीकलां में सांप्रदायिक तनाव का खामियाजा जयंत को उठाना पड़ा और हेमा मालिनी ने उन्हें तीन लाख से ज़्यादा वोटों से हरा दिया.



कृष्ण भगवान की नगरी मथुरा सीट राम मंदिर आंदोलन के बाद 1991 से 2004 तक लगातार चार बार बीजेपी के पास रही. बीजेपी के चौधरी तेजवीर सिंह तीन बार चुनकर लोकसभा पहुंचे. 2004 में ये सीट कांग्रेस के मानवेन्द्र सिंह ने जीती जबकि 2009 में जयंत चौधरी ने यहां जीत हासिल की. 2014 में हेमा मालिनी को कुल पड़े वोटों का 52% यानी 5,74,633 वोट हासिल हुए जबकि जयंत 22.62% के साथ 2,43,890 वोट हासिल कर पाए.

बीएसपी के योगेश कुमार को 1,73,572 वोट मिलें जबकि एसपी के चन्दन सिंह 36,673 वोटों पर सिमट गए. यानी इस सीट पर भी तीनों पार्टियां मिलकर भी बीजेपी से एक लाख से ज़्यादा वोटों से पीछे रह गईं. हालांकि आरएलडी और बीजेपी के अलावा बसपा इस सीट पर काफी मजबूत है 2009 में जयंत के खिलाफ बसपा के श्याम सुंदर शर्मा ने 2,10,257 वोट हासिल किये थे. ऐसी ख़बरें हैं कि मथुरा सीट से इस बार जयंत की पत्नी चारु चौधरी मैदान में उतर सकती हैं.

जाट-मुस्लिम एकता पर निर्भर रालोद
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट वोटरों पर रालोद की अच्छी पकड़ मानी जाती रही है लेकिन 2014 में बीजेपी ने खेल ही बदल दिया था और अजीत सिंह पैतृक बागपत और जयंत मथुरा से हार गए थे. हालांकि जाट वोट बैंक को सपा और बसपा दोनों नजरंदाज नहीं कर सकते. मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर सहित कई निर्वाचन क्षेत्रों में जाट निर्णायक भूमिका में हैं. पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय की आबादी करीब 17 प्रतिशत है और विधानसभा की करीब 77 सीटों पर इस समुदाय का प्रभाव माना जाता है. किसी पार्टी के तरफ इनका झुकाव 50 सीटों के नतीजों को प्रभावित करता है.

रालोद का परंपरागत जाट वोटर वेस्ट यूपी की 16 सीटों को प्रभावित करता है. सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बुलंदशहर, हाथरस, अलीगढ़, नगीना, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद पर प्रभाव है. सपा-बसपा गठबंधन में रालोद के शामिल होने पर वेस्ट यूपी की तमाम सीटों पर गहरा असर पड़ेगा.
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बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर दंगे के चलते मुस्लिम और जाट समुदाय के बीच खाई गहरी हो गई थी. इसके अलावा सपा-बसपा और कांग्रेस को अलग-अलग चुनाव लड़ने का फायदा बीजेपी को मिला था. मोदी लहर पर सवार बीजेपी ने विपक्ष का पूरी तरह से सफाया कर दिया था. इसी रणनीति पर बीजेपी ने 2017 के चुनाव में भी कमल खिलान में कामयाब रही थी. हालांकि कैराना उपचुनाव में मिली जीत ने रालोद का हौसला बढ़ाने का काम किया है.
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