कोरोना वायरस के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी को लेकर ICMR ने क्या कहा

ICMR निदेशक बलराम भार्गव (फाइल फोटो)

ICMR निदेशक बलराम भार्गव (फाइल फोटो)

Coronavirus Pandemic: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि 18 दिन के भीतर देश में 40 लाख लोगों को कोविड-19 रोधी टीके लगाए गए हैं और इसके साथ ही भारत सबसे तेज गति से इस आंकड़े तक पहुंचने वाला देश बन गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 3, 2021, 5:10 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के प्रमुख बलराम भार्गव ने बुधवार को कहा कि हर्ड इम्यूनिटी अभी दूर की बात है और कोरोना वायरस से बचाव के लिए मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना बेहद जरूरी है। भार्गव ने कहा, हमने शुरू से ही मास्क के इस्तेमाल की बात कही है। हम कभी भी हर्ड इम्यूनिटी के पीछे नहीं भागे। इसमें अभी काफी वक्त लग सकता है। कोरोना से हिफाजत के लिए हमें अपने वर्तमान व्यवहार को ही बनाए रखना होगा, जिसमें मास्क का इस्तेमाल करना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना सबसे अहम है।


इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि 18 दिन के भीतर देश में 40 लाख लोगों को कोविड-19 रोधी टीके लगाए गए हैं और इसके साथ ही भारत सबसे तेज गति से इस आंकड़े तक पहुंचने वाला देश बन गया है. बुधवार सुबह तक देश में 41 लाख से ज्यादा लोगों को कोविड-19 रोधी टीके लगाए गए. मंत्रालय ने कहा, "कोविड-19 रोधी टीके लगाने के मामले में भारत एक फरवरी को दुनिया के शीर्ष पांच देशों की सूची में था. भारत तेज गति से यह टीकाकरण जारी रखेगा." स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई को अन्य मोर्चों पर भी सफलता मिल रही है.


क्या है हर्ड इम्यूनिटी?

अगर कोई बीमारी आबादी के बड़े हिस्से में फैल जाती है, तो इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता उस बीमारी के संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद करती है, जो लोग बीमारी से लड़कर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, वो उस बीमारी से 'इम्यून' हो जाते हैं, यानी उनमें प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित हो जाते हैं. उनमें वायरस का मुक़ाबला करने को लेकर सक्षम एंटी-बॉडीज़ तैयार हो जाते हैं.


कैसे होती है हर्ड इम्यूनिटी?

जब ज़्यादा लोग इम्यून होते जाते हैं, तब संक्रमण फैलने का ख़तरा कम होता जाता है. इससे उन लोगों को भी सुरक्षा मिल जाती है जो ना तो संक्रमित हुए और ना ही उस बीमारी के लिए 'इम्यून' हैं. अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन के चीफ़ मेडिकल अफ़सर डॉक्टर एडुआर्डो सांचेज़ ने अपने ब्लॉग में इसे समझाने की कोशिश की. इसे अमेरिकी मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित भी किया गया. उन्होंने लिखा, "इंसानों के किसी झुंड (अंग्रेज़ी में हर्ड) के ज़्यादातर लोग अगर वायरस से बचने की क्षमता विकसित कर लें तो झुंड के बीच मौजूद अन्य लोगों तक वायरस का आना बहुत मुश्किल होता है. यानि एक सीमा के बाद उनका फैलाव रुकने लगता है. मगर ये प्रक्रिया समय लेती है. साथ ही 'हर्ड इम्यूनिटी' के आइडिया पर बात अमूमन तब होती है जब किसी टीकाकरण प्रोग्राम की मदद से अतिसंवेदनशील लोगों की सुरक्षा पुख्ता हो जाती है."


कितनी आबादी संक्रमण के बाद विकसित होती है ये इम्यूनिटी



एक अनुमान के अनुसार किसी समुदाय में कोविड-19 के ख़िलाफ़ 'हर्ड इम्यूनिटी' तक़रीबन 60 फ़ीसदी आबादी के संक्रमित होने के बाद विकसित होती है. हालांकि इसे लेकर मतभेद हैं कि कितनी आबादी के संक्रमित होने पर हर्ड इम्यूनिटी विकसित होती है. जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक हर्ड इम्यूनिटी के स्तर तक पहुँचने के लिए क़रीब 80 फ़ीसदी आबादी के इम्यून होने की ज़रूरत होती है. हर 05 में 04 लोग अगर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद भी संक्रमण का शिकार नहीं हों तो ये भी हर्ड इम्यूनिटी का संकेत देता है. ख़सरा, गलगंड, पोलियो और चिकन पॉक्स कुछ ऐसी संक्रामक बीमारियां हैं जो कभी बहुत आम हुआ करती थीं लेकिन अब ज्यादातर देशों में गायब हो चुकी हैं. क्योंकि वैक्सीन की मदद से हर्ड इम्यूनिटी के स्तर तक पहुंचने में मदद मिली.

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