70 से ज्यादा देशों में फैला कोरोना का डेल्टा वैरिएंट, जानिए यह खतरनाक क्यों है?

WHO ने कहा था कि डेल्टा वैरिएंट ज्यादा संक्रामक है और इंसानी शरीर के इम्यून रेस्पांस को भी चकमा दे सकता है. फाइल फोटो

Delta Variant के स्पाइक प्रोटीन ने अपने आपको इस तरह बदला है, यानि उसमें म्यूटेशन हुआ है कि व्यक्ति के शरीर में मौजूद एंटीबॉडी भी अप्रभावी हो जाती है, टूट जाती है.

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    नई दिल्ली. कोविड के डेल्टा वैरिएंट (Covid-19 Delta Variant) का संक्रमण अब देश दुनिया के कई देशों में फैल गया है. कोविड के B.1.617.2 वैरिएंट को डेल्टा वैरिएंट कहा जाता है और भारत में संक्रमण की दूसरी लहर के लिए इसी स्ट्रेन को जिम्मेदार माना जा रहा है, अब ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे भी देश भी डेल्टा वैरिएंट को लेकर सतर्क हो गए हैं, क्योंकि इन देशों में संक्रमण के मामले फिर बढ़ने लगे हैं.

    मई में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेल्टा वैरिएंट को "चिंताजनक" करार दिया था, WHO ने कहा था कि यह वैरिएंट ज्यादा संक्रामक है और इंसानी शरीर के इम्यून रेस्पांस को भी चकमा दे सकता है. आइए जानते हैं इस वैरिएंट के बारे में -

    [q]क्या है डेल्टा वैरिएंट?[/q]
    [ans]डेल्टा वैरिएंट कोविड का एक नया स्ट्रेन है, जो कोरोना वायरस के B.1.617 श्रृंखला से निकला है. इस वायरस को 2021 की शुरुआत में भारत में चिन्हित किया गया था, जो बाद में पूरे देश में फैल गया. ये स्ट्रेन बहुत तेजी से लोगों को बीमार करता है और कोरोना की दूसरी लहर के लिए भी जिम्मेदार है.[/ans]

    [q]डेल्टा वैरिएंट खतरनाक क्यों है?[/q]
    [ans]कोविड के डेल्टा वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन दर्ज किए गए हैं, जिसकी वजह से यह वैरिएंट ज्यादा संक्रामक और खतरनाक हो जाता है. इंग्लैंड में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक यह स्ट्रेन ज्यादा हमलावर है और इसकी वजह से एक निश्चित समय में अल्फा वैरिएंट के मुकाबले ज्यादा लोग बीमार हुए हैं.[/ans]

    [q]कितनी तेजी से फैलता है डेल्टा वैरिएंट?[/q]
    [ans]अध्ययन के मुताबिक डेल्टा वैरिएंट कोरोना के अल्फा वैरिएंट के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा संक्रामक है. अल्फा वैरिएंट कोरोना वायरस के मूल स्ट्रेन के मुकाबले 50 फीसदी ज्यादा संक्रामक था, कोविड का मूल स्ट्रेन 2019 के आखिर में सामने आया था.[/ans]

    [q]यह इतना खतरनाक क्यों है?[/q]
    [ans]दरअसल डेल्टा वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन ने अपने आपको इस तरह बदला है, यानि उसमें म्यूटेशन हुआ है कि व्यक्ति के शरीर में मौजूद एंटीबॉडी भी अप्रभावी हो जाती है, टूट जाती है. फलस्वरूप व्यक्ति दोबारा संक्रमित हो जाता है, जबकि कोविड के पहले वैरिएंट्स के साथ ऐसा नहीं था. डेल्टा वैरिएंट के आगे व्यक्ति का इम्यून रेस्पांस भी कमजोर साबित हो रहा है.[/ans]

    [q]डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन प्रभावी है?[/q]
    [ans]ज्यादातर अध्ययनों में यह पाया गया है कि डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन प्रभावी हैं, लेकिन कम प्रभावी हैं. पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड स्टडी के मुताबिक फाइजर और ऑक्सफोर्ड ऐस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का सिंगल कोरोना के लक्षणों वाले मामले में 33 फीसदी प्रभावी है, जोकि दूसरी डोज के बाद बढ़कर 88 फीसदी और 66 फीसदी हो जाता है.[/ans]

    [q]अभी तक किन देशों में फैला है डेल्टा वैरिएंट?[/q]
    [ans]डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक डेल्टा वैरिएंट 70 से ज्यादा देशों में फैल चुका है. ये वैरिएंट भारत, ब्रिटेन और सिंगापुर में बहुतायत में मिला है. पिछले सप्ताह ब्रिटेन में कोरोना के 90 फीसदी नए मामलों में डेल्टा वैरिएंट पाया गया. मई के बाद से ब्रिटेन में नए मामलों की संख्या में 65 फीसदी का इजाफा देखा गया है.[/ans]

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