इस साल अच्छा रहेगा मानसून, जानिए क्यों पीएम के लिए है खुशखबरी 

एक सामान्य या औसत मानसून का मतलब है पिछले 50 सालों में जून से सितंबर के बीच हुई औसत बारिश का 96 से 104 प्रतिशत तक बारिश होना. वर्तमान में पिछले 50 सालों का औसत 89 सेंटिमीटर (35 इंच) है.

News18Hindi
Updated: April 17, 2018, 7:44 AM IST
इस साल अच्छा रहेगा मानसून, जानिए क्यों पीएम के लिए है खुशखबरी 
पीएम मोदी की फाइल फोटो
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Updated: April 17, 2018, 7:44 AM IST
मौसम विभाग (IMD) ने इस साल देश में मॉनसून सामान्य रहने की संभावना जताई है. IMD के मुताबिक पूरे सीजन में 97% बारिश हो सकती है. हाल ही में स्‍काईमेट ने भी इस साल के लिए अनुमान जारी करते हुए कहा था कि मॉनसून नॉर्मल रहेगा और पूरे सीजन में 96 से 104 फीसदी बारिश हो सकती है. अच्छे मॉनसून के अनुमान से आम चुनाव से एक साल पहले अच्छे आर्थिक विकास की संभावना बढ़ गई है.

कौन-कौन सी हैं मॉनसून की श्रेणियां?
एक सामान्य या औसत मॉनसून का मतलब है, पिछले 50 सालों में जून से सितंबर के बीच हुई औसत बारिश का 96 से 104 प्रतिशत तक बारिश होना. वर्तमान में पिछले 50 सालों का औसत 89 सेंटिमीटर (35 इंच) है.

औसत से 90 प्रतिशत से कम बारिश को सूखे की श्रेणी में गिना जाता है. नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद 2014 और 2015 में सूखे की स्थिति बन गई थी जिसके चलते उनकी सरकार को खासी आलोचना झेलनी पड़ी थी.

औसत से 110 प्रतिशत से अधिक बारिश का मतलब होगा अत्यधिक मॉनसून. यह सूखे की तरह खतरनाक नहीं होगा लेकिन कुछ फसलों के लिए नुकसानदायक जरूर होगा. मॉनसून की शुरुआत 1 जून के आसपास केरल से होती है और पूरे देश में मॉनसून जुलाई के मध्य तक आता है.

मॉनसून क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
मॉनसून के दौरान भारत में सालाना बारिश की 70 प्रतिशत बारिश होती है और मॉनसून पर ही चावल, गेहूं, गन्ने और सोयाबीन जैसे प्रमुख फसलों की उपज निर्धारित होती है. कृषि भारत की अर्थव्यवस्था का 15 प्रतिशत हिस्सा है और इसमें देश की करीब आधी आबादी कार्यरत है.

अच्छी बारिश से फसलों का उत्पादन तो बढ़ता ही है, इससे ग्रामीण आबादी की आमदनी भी बढ़ती है जिसके चलते कन्ज्यूमर गुड्स की मांग भी बढ़ती है.

एक मजबूत आर्थिक नजरिये से देखा जाए तो अच्छे मॉनसून से उन कंपनियों की इक्विटी में इजाफा होगा जो ग्रामीण क्षेत्रों में अपना सामान बेचती हैं. इनमें कन्ज्यूमर गुड्स के अलावा ऑटोमोबाइल और उर्वरक बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं.

भारत में चावल और गेहूं जैसे अनाजों का इतना उत्पादन होता है कि देश की जरूरत पूरी हो सके, लेकिन सूखे की स्थिति में हमें दूसरे देशों से अनाज का आयात करना पड़ सकता है. साल 2009 में खराब मॉनसून के बाद भारत को चीनी का आयात करना पड़ा था. इसके चलते चीनी की वैश्विक कीमत में भारी इजाफा हुआ था.

मॉनसून की बारिश से भू-जल स्तर में इजाफा होता है और बांधों में पानी एकत्रित होता है. इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई और हाइड्रो पॉवर बनाने में होता है. अच्छी बारिश के चलते सिंचाई पंपों में इस्तेमाल होने वाले डीजल की मांग में भी कमी आती है.

मॉनसून से महंगाई और सेंट्रल बैंक पॉलिसी पर क्या असर पड़ेगा?
भारत के कन्ज्यूमर प्राइज इंडेक्स का 50 प्रतिशत हिस्सा खाने का है, मौद्रिक नीति तय करते वक्त केंद्रीय बैंक इसका खास ध्यान रखता है. अच्छी कृषि उपज से खाने की कीमतें नियंत्रण में रहेंगी.

इससे पहले सूखा पड़ने पर सरकारों ने किसानों को प्रोत्साहन राशि देकर उनकी मदद की थी जिसके चलते सरकार को काफी राजकोषीय घाटा उठाना पड़ा था. अच्छी बारिश होने पर सरकार ऐसे खर्चों से बच जाएगी.
कितना भरोसेमंद है मौसम विभाग का अनुमान?
मौसम विभाग मॉनसून के संभावित आगमन से एक महीने पहले बारिश को लेकर अनुमान जारी करता है.

औसत रूप से पिछले 20 सालों में मौसम विभाग का अनुमान (5 प्रतिशत कम या ज्यादा की गलती लेकर चलें तो भी) पांच में से केवल एक साल ही सही निकला है. तो भी स्थिति यही रही है.

साल 2008 से अब तक मौसम विभाग का 2017 का अनुमान सबसे सटीक था. पिछले साल मौसम विभाग के अनुमान और असल बारिश में केवल एक प्रतिशत का अंतर था. सामान्य मॉनसून के बावजूद देश के कई हिस्सों में सूखा पड़ता है, वहीं कुछ हिस्सों में बाढ़ आ जाती है.

मौसम विभाग इस साल के मॉनसून के लिए अपना दूसरा अनुमान जून में जारी करेगा.

पीएम मोदी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है 2019 चुनाव से पहले का मॉनसून?
पीएम मोदी ने पांच सालों में किसानों की आय दोगुना करने का वादा किया था, उनका यह वादा चार सालों तक काफी चर्चित रहा. हालांकि किसानों में असंतोष के चलते बीजेपी शासित राज्यों में स्थानीय नेताओं की चिंता बढ़ गई है. सामान्य मॉनसून की स्थिति में खरीफ की फसल अच्छी होगी और स्थानीय नेताओं को किसानों को रिझाने में मदद मिलेगी.
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