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भारत-पाकिस्तान के बीच बसंतर की लड़ाई के नायक ए जी पिंटो का 97 साल की उम्र में निधन

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

चौदह दिन तक चली इस भीषण लड़ाई में पिंटो की डिवीजन ने बहादुरी के लिए 196 पदक प्राप्त किए थे जिनमें दो परमवीर चक्र और नौ महावीर चक्र शामिल हैं.

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पुणे. भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध के दौरान एक लड़ाई में इन्फैंट्री डिवीजन का नेतृत्व करके जीत दिलाने वाले एक सैन्य नायक का पुणे में 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल डब्ल्यू ए जी पिंटो (सेवानिवृत्त) ने बसंतर की लड़ाई में 54वीं इन्फैंट्री डिवीजन का नेतृत्व किया था.

अधिकारी ने कहा, चौदह दिन तक चली इस भीषण लड़ाई में पिंटो की डिवीजन ने बहादुरी के लिए 196 पदक प्राप्त किए थे जिनमें दो परमवीर चक्र और नौ महावीर चक्र शामिल हैं. यहां रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में दक्षिणी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जे एस नैन समेत अन्य अधिकारियों ने पिंटो को श्रद्धांजलि दी.

जानिए भारत-पाकिस्तान के बीच हुई इस लड़ाई की पूरी कहानी
1971 की लड़ाई में पश्चिम सीमा पर पाकिस्तान ने लड़ाई छेड़ दी थी. ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट की तीसरी बटालियन को शकरगढ़ भेजा गया. 10 दिनों में ही मेजर होशियार सिंह की अगुवाई में ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट की तीसरी बटालियन ने शानदार बढ़त बनाई. 15 दिसंबर को रवी की सहायक नदी बसंतर पर पुल बनाने की जिम्मेदारी दी गई. पाकिस्तान ने हिंदुस्तानी सेना को रोकने के लिए वहां जबरदस्त घेराबंदी की थी. पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सेना की इस टुकड़ी पर गोलाबारी की.



इसमें बड़े पैमाने पर क्षति उठाना पड़ी. ऐसे हालात में भी मेजर होशियार सिंह की टुकड़ी ने विपरीत हालात में आगे बढ़ने का फैसला किया. होशियार सिंह की अगुवाई में भारतीय सेना की टुकड़ी ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित जारपाल गांव को अपने कब्जे में ले लिया. भारत की पूर्वी सीमा पर 16 दिसंबर 1971 को लड़ाई खत्म हो चुकी थी. लेकिन पश्चिमी सीमा पर लड़ाई जारी रही. 17 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर जबरदस्त आक्रमण किया. इस लड़ाई में पाकिस्तान के कमांडिंग अधिकारी मोह. अकरम राजा को अपनी जान गंवाना पड़ी.
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