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EXCLUSIVE: भारत बना हेरोइन का ट्रांजिट प्वाइंट, 4 साल में 37 हजार फीसदी ज्यादा जब्त हुई ड्रग्स

EXCLUSIVE: भारत बना हेरोइन का ट्रांजिट प्वाइंट, 4 साल में 37 हजार फीसदी ज्यादा जब्त हुई ड्रग्स

पंजाब के पूर्व डीजीपी शशिकांत शर्मा के मुताबिक, पहले ईरान और इराक पसंदीदा ट्रांजिट पॉइंट हुआ करते थे, लेकिन अब ड्रग्स सप्लाई का रास्ता भारत बन गया है. फाइल फोटो

पंजाब के पूर्व डीजीपी शशिकांत शर्मा के मुताबिक, पहले ईरान और इराक पसंदीदा ट्रांजिट पॉइंट हुआ करते थे, लेकिन अब ड्रग्स सप्लाई का रास्ता भारत बन गया है. फाइल फोटो

Heroin Seizures in India: डीआरआई के आंकड़ों में कहा गया है कि 2018-19 में एजेंसी ने 7.98 किलोग्राम हेरोइन जब्त की. अगले साल ये करीब 25 फीसदी बढ़ गई जब एजेंसी ने 9.16 किलोग्राम जब्त किया. बरामदगी में 2 हजार फीसदी से अधिक की भारी उछाल पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान देखी गई. इस दौरान लगभग 202 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी.

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    (अंकुर शर्मा)
    नई दिल्ली. भारत में ड्रग्स (Drugs) का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है. साल 2018 में महज 8 किलोग्राम हेरोइन जब्त (Heroin Seizures) हुई थी. लेकिन अब 2021 में ये आंकड़ा बढ़ कर 3 हजार किलोग्राम हो गया है. यानी हिसाब लगाया जाए तो हेरोइन की जब्ती में पिछले 4 साल के दौरान 37 हजार फीसदी का इज़ाफा हुआ है. DRI और NCB के अधिकारियों के मुताबिक भारत ड्रग्स कारोबार का ट्रांजिट प्वाइंट बन गया है. भारत के जरिए ही बड़े पैमाने पर चोरी-छिपे ड्रग्स का धंधा किया जा रहा है.

    बता दें कि DRI ड्रग्स तस्करी विरोधी मामलों पर देश की शीर्ष खुफिया और प्रवर्तन एजेंसी है, जबकि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को मादक पदार्थों की तस्करी और नारकोटिक्स ड्रग्स के इस्तेमाल पर नकेल कसने का काम सौंपा गया है. इन दोनों एजेंसियों ने बताया कि अलग-अलग राज्यों की एजेंसियां भी बड़े पैमाने पर ड्रग्स जब्त कर रही हैं.

    4 साल में भारी उछाल
    दक्षिण भारत में काम कर रहे DRI के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, ‘पिछले चार सालों में हेरोइन की तस्करी में चौंकाने वाली वृद्धि हुई है. ऐसा लगता है कि भारत तस्करों के लिए ट्रांजिट प्वांइट के तौर पर उभर रहा है. लेकिन एजेंसियों ने सभी बंदरगाहों पर जांच बढ़ा दी है, जो आमतौर पर आजकल तस्करों के लिए सबसे पसंदीदा रास्ता है.’

    क्या है इसकी वजह?
    अधिकारियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर उछाल के पीछे अफगानिस्तान में अफीम की खेती है. ड्रग्स एंड क्राइम पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में अफीम की अवैध खेती के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ज़मीन के क्षेत्र में 37% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका नियंत्रण इस साल अगस्त में तालिबान ने अपने कब्जे में ले लिया.

    क्या कहते हैं आंकड़े
    डीआरआई द्वारा संकलित आंकड़ों में कहा गया है कि 2018-19 में एजेंसी ने 7.98 किलोग्राम हेरोइन जब्त की. अगले साल ये करीब 25 फीसदी बढ़ गई जब एजेंसी ने 9.16 किलोग्राम जब्त किया. बरामदगी में 2 हजार फीसदी से अधिक की भारी उछाल पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान देखी गई. इस दौरान लगभग 202 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी. इस साल सितंबर में गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह में पकड़ी गई 21 हजार करोड़ रुपये की हेरोइन की 3 हजार किलोग्राम खेप की तुलना में जब्ती कम हुई.

    भारत के जरिए ही कारोबार क्यों?
    पंजाब के पूर्व डीजीपी शशिकांत शर्मा के मुताबिक, पहले ईरान और इराक पसंदीदा ट्रांजिट पॉइंट हुआ करते थे, लेकिन अब ड्रग्स भारत के रास्ते जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘रास्ते बदलते रहते हैं. इससे पहले, ईरान, इराक के जरिए नशीली दवाओं के व्यापार किए जाते थे. बाद में कुछ क्षेत्रों में ड्रग्स के खेप की चोरी भी हो गई. अलग-अलग देशों द्वारा प्रतिबंध भी लगाए गए थे और पाकिस्तान इन देशों के साथ अपने संबंध खराब नहीं करना चाहता. इसलिए भारत हेरोइन तस्करी के लिए मुख्य ट्रांजिट प्वाइंट के तौर पर उभर रहा है.’

    जांच एजेंसियों की चुनौती
    भारतीय एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ड्रग्स की खेपों को रोकना है. एनसीबी और डीआरआई दोनों स्वीकार करते हैं कि समुद्री मार्गों से भेजी जाने वाली दवाओं की मात्रा एजेंसियों के लिए सभी खेपों की जांच करना कठिन बना देती है और वे केवल डेटा विश्लेषण पर भरोसा करते हैं. यहां तक ​​​​कि जब एजेंसियां ​​​​एक दवा की खेप को रोकती हैं, तो जांच और मुकदमा चलाना बहुत बड़ा काम होता है.

    Tags: Afghanistan, DRI, Drugs case, NCB

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