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‘हाय जानूं…’, कैसे इन दो लफ्जों से पुलवामा हमले के मास्टर-माइंड आतंकी को ढेर करने में सुरक्षाबलों को मिली कामयाबी

पुलवामा आतंकी हमले के समय की तस्वीर (फाइल)

पुलवामा आतंकी हमले के समय की तस्वीर (फाइल)

Pulwama Terror Attack and Story Behind Elimination of Mastermind : पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के करीब 1 ...अधिक पढ़ें

श्रीनगर. आज ‘वेलेंटाइन-डे’ (Valentine Day) है. ‘हाय जानूं’, ‘हाय जान’ जैसे संदेशों का प्रेमी जोड़ों के बीच खूब आदान-प्रदान हो रहा है. लेकिन करीब 3 साल पहले जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में इसी दिन से शुरू हुई कहानी कुछ और थी. साल 2019 में वह 14 फरवरी की ही तारीख थी, जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने घात लगाकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों पर हमला किया था. इसके करीब 1 महीने के भीतर ही सेना और सुरक्षा बलों ने इस हमले के मास्टर-माइंड उमर फारूक अल्वी को उसके एक साथी कामरान के साथ मार गिराया था. इनमें उमर फारूक पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) के सरगना मसूद अजहर (Masood Azhar) का भतीजा था. हालांकि उसके मारे जाने में जो सबसे दिलचस्प बात रही, वह ये कि उस तक पहुंचने का जरिया ‘हाय जानूं…’ कर के भेजा गया संदेश बना था.

पुलवामा के एसपी को भेजा था उमर फारूक ने मैसेज
वह 29 मार्च 2019 की तारीख थी, जब सुरक्षा बलों ने तड़के ही नौगाम जिले मे सुथसू कला गांव में छिपे आतंकियों- उमर फारूक और कामरान को घेर लिया था. जैसे ही आतंकियों को भनक लगी उन्होंने गोलियां चलानी शुरू कर दीं. लेकिन सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ शुरू होने के महज 30 मिनट के भीतर दोनों को ढेर कर दिया. इस बाबत न्यूज18 हिंदी (News18HIndi) को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ‘सुरक्षा बलों की इस कामयाबी में उमर फारूक के ही भेजे एक वॉट्सऐप मैसेज की बड़ी भूमिका थी. उसने पुलवामा (Pulwama) के पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) को यह संदेश भेजा था. लिखा था- हाय जानूं… फिर उसके साथ पिस्तौल का एक इमोजी. दूसरे संदेश उसने चुनौती देते हुए लिखा था, ‘मैं तुम्हें तुम्हारे घर में घुसकर मारूंगा.’

एसपी ने ‘हाय जानूं’ के नाम से नंबर सेव कर निगरानी कराई
पुलवामा एसपी ने इस चुनौती को स्वीकार किया. उन्हें चुनौती चूंकि अज्ञात नंबर से आई थी. इसलिए उन्होंने उस नंबर को ‘हाय जानूं’ के नाम से अपने मोबाइल में सेव कर लिया. फिर साइबर सेल को उस पर निगरानी रखने का जिम्मा सौंप दिया. इस दौरान पता चला कि नंबर बंद कर दिया गया है. इसके बावजूद नंबर की निगरानी बंद नहीं की गई. महीनों तक वह नंबर निष्क्रिय रहा. फिर तभी चूंकि साइबर सेल और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट थीं तो एक रात पता चला कि वह नंबर फिर एक्टिव हुआ है. साइबर सेल ने तुरंत उच्चाधिकारियों को अलर्ट किया. नंबर की लोकेशन पता की गई, जो कि नौगाम के आसपास मिल रही थी. लिहाजा, जब सभी चीजें पुख्ता हो गईं तो ऑपरेशन की तैयारी शुरू की गई. उस नंबर की लोकेशन तलाशते-तलाशते सुरक्षा बलों की टीमें उस ठिकाने तक जा पहुंची, जहां उमर फारूक अपने साथी के साथ छिपा हुआ था. और फिर सुरक्षा बलों ने महज आधे घंटे में उस आतंकी को उसी के दड़बे में घुसकर ढेर कर दिया.

स्मार्टफोन के अधिक इस्तेमाल से चिंतित थे पाकिस्तानी आका
सूत्रों की मानें तो उमर फारूक स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल करने लगा था. इससे पाकिस्तान स्थित उसके आका (Handlers) चिंतित थे. क्योंकि स्मार्ट फोन उसके ठिकाने की लोकेशन की आसानी से चुगली कर सकता था. बाद में हुआ भी ऐसा ही. इसीलिए मसूद अजहर (Masood Azhar) के भाई रऊफ ने उसे आदेश दिया था कि वह अपना स्मार्ट फोन तुरंत नष्ट कर दे. लेकिन उमर फारूक ने ऐसा नहीं किया. उसने दूसरे फोन को नष्ट करने का वीडियो बनाकर रऊफ तक भिजवा दिया था. उसने यह बेवकूफी उस तमाम प्रशिक्षण के बावजूद की, जिसमें उसे सिखाया गया था कि स्मार्टफोन का उपयोग कम से कम करना है. और ट्रेस होने से बचने के लिए बार-बार सिम कार्ड बदलना है.

भारतीय वायुसेना ने की थी बालाकोट पर एयर-स्ट्राइक
पुलवामा आतंकी हमले के करीब 12 दिन बाद भारत की एयर-स्ट्राइक (Air Strike) भी पूरी दुनिया में चर्चित रही थी. उसमें भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के लड़ाकू विमानों में 26 फरवरी, 2019 तड़के पाकिस्तान (Pakistan) में घुसकर बम गिराए थे. वहां बालाकोट (Balakot) में आतंकी शिविरों को निशाना बनाया था. इस कार्रवाई 300 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर आई थी. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी.

Tags: Hindi news, Jaish-e-Mohammed, Jammu kashmir, Pulwama Terror Attack

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