स्पेशल मैरिज एक्ट: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस भेजकर मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट में वकील उत्कर्ष सिंह से कोर्ट ने पूछा कि क्या स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने वाले जोड़ों को व्यवहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है?
दिल्ली हाईकोर्ट में वकील उत्कर्ष सिंह से कोर्ट ने पूछा कि क्या स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने वाले जोड़ों को व्यवहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है?

Special Marriage Act: स्पेशल मैरिज एक्ट में बदलाव को लेकर लगाई गई याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 4:11 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi Highcourt) ने स्पेशल मैरिज एक्ट (Special Marriage Act) में बदलाव को लेकर लगाई गई याचिका पर केंद्र सरकार (Central Government) और दिल्ली सरकार (Delhi Government) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में संबंधित कानून के तहत होने वाली शादियों के लिए आपत्ति मांगने को लेकर जारी किए गए जाने वाले सार्वजनिक नोटिस के प्रावधानों को कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि इस तरह के सार्वजनिक नोटिस जारी करके 1 महीने का वक्त लगाने के कारण स्पेशल मैरिज एक्ट में शादी करने वालों की तकलीफ बढ़ जाएंगी. कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि खुद लॉ कमीशन ने यह माना है कि आपत्तियां दर्ज करवाने के लिए दिए जाने वाला एक महीने का वक्त स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत होने वाली शादियों को हतोत्साहित करता है.

दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका रहमान नाम के एक शख्स की तरफ से लगाई गई है. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट में वकील उत्कर्ष सिंह से कोर्ट ने पूछा कि क्या स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने वाले जोड़ों को व्यवहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है? जिस पर कोर्ट में बहस के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा बताया गया कि व्यवहारिक दिक्कतों के आने के कारण ही याचिका कोर्ट में लगाई गई है ताकि कोर्ट इस मामले में स्पष्ट आदेश जारी करें.




क्या है स्पेशल मैरिज एक्ट
आपको बता दें कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत दो अलग-अलग धर्मों के लोग शादी करते हैं तो उन्हें शादी करने से पहले दोनों पक्षों की तरफ से कोई भी आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 दिन का समय दिया जाता है. जबकि बाकी धर्मों में शादी करने वाले जोड़ों के लिए यह नियम लागू नहीं होते हैं.

याचिकाकर्ता ने दी यह दलील
कोर्ट में याचिकाकर्ता की तरफ से दलील दी गई कि जब स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोई भी जोड़ा शादी करता है तो कोर्ट में इसको लेकर हलफनामा दाखिल किया जाता है जिसमें व्यक्तिगत तौर पर सभी जानकारियां साझा की जाती हैं. वही इसमें 30 दिन का वक्त यह सुनिश्चित करने के लिए दिया जाता है. जिससे यह साफ हो सके कि शादी करने वाले 2 लोगों में से पहले कोई शादीशुदा तो नहीं है मानसिक रूप से उसे कोई परेशानी तो नहीं है. इसी तरह की कोई और व्यक्तिगत परेशानी को लेकर अगर दोनों पक्षों में से किसी के भी परिवार का सदस्य आपत्ति दर्ज करना चाहे तो स्वतंत्र होता है.

वही मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने कहा कि हलफनामा दाखिल करते वक्त दोनों पक्ष अपनी जानकारियां शादी से पहले कोर्ट मैरिज के दौरान देते हैं. ऐसे में 30 दिन का यह वक्त दिए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है. फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तो मांग लिया है. जिस पर अब अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी.
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