अनिल देशमुख के खिलाफ FIR पर आज फैसला सुनाएगा हाईकोर्ट, सरकार की याचिका पर भी होगी सुनवाई

अनिल देशमुख पर लगे हैं भ्रष्टाचार के आरोप. (फाइल फोटो)

Anil Deshmukh Case: शुरुआती जांच के बाद केंद्रीय एजेंसी ने देशमुख और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी. वहीं, राज्य सरकार ने FIR के कुछ हिस्सों को लेकर 30 अप्रैल को हाईकोर्ट का रुख किया था. इसके बाद 3 मई को राज्य के पूर्व गृहमंत्री ने पूरी FIR को चुनौती दी थी.

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    मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने मांग वाली याचिकाओं पर बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) गुरुवार को फैसला सुनाएगा. जस्टिस एसएस शिंदे और एनजे जमादार की डिवीजन बेंच इसपर निर्णय देगी. महाराष्ट्र सरकार की तरफ से दायर की गई याचिका में FIR में दर्ज दो पैराग्राफ हटाने की मांग की गई है. वहीं, देशमुख ने याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की अपील की है. कहा जा रहा है कि अदालत आज दोपहर 2:30 बजे फैसला सुना सकती है.

    इस मामले को 'अभूतपूर्व' करार देते हुए चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील जयश्री पाटील की शिकायत के आधार पर 5 अप्रैल शुरुआती जांच के आदेश दिए थे. पाटील ने अपनी शिकायत में पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के पत्र का जिक्र किया था. राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे इस पत्र में सिंह ने देशमुख समेत कई लोगों पर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए थे.



    शुरुआती जांच के बाद केंद्रीय एजेंसी ने देशमुख और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी. वहीं, राज्य सरकार ने FIR के कुछ हिस्सों को लेकर 30 अप्रैल को हाईकोर्ट का रुख किया था. इसके बाद 3 मई को राज्य के पूर्व गृहमंत्री ने पूरी FIR को चुनौती दी थी.

    मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से हटाकर होमगार्ड्स भेजे जाने के तीन दिन बाद सिंह ने यह पत्र लिखा था. 20 मार्च को सीएम के नाम लिखे लैटर में उन्होंने आरोप लगाए थे कि देशमुख ने बर्खास्त पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे को हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करने के लिए कहा था. इसमें मुंबई के 1750 बार और रेस्त्रां से 40-50 करोड़ रुपये की वसूली भी शामिल थी.

    किस बात पर है महाराष्ट्र सरकार को आपत्ति
    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक पैरा में लिखा गया है कि, 'केंद्रीय एजेंसी को अपनी शुरुआती जांच में पता चला है कि पूर्व राज्य गृहमंत्री अनिल देशमुख को अब निलंबित सचिन वाजे की 15 साल बाद पुलिस में बहाली के बारे में पता था और वाजे को जांच के लिए संवेदनशील मामले दिए गए थे.' अन्य पैरा में कहा गया है कि देशमुख समेत कई अन्य लोगों ने पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले में 'अनुचित प्रभाव' डाला है.

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