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पंजाब में MSP पर हुई रिकॉर्ड खरीद फिर भी विरोध में कसी हैं किसानी मुट्ठियां

पंजाब में MSP पर हुई रिकॉर्ड खरीद फिर भी विरोध में कसी हैं किसानी मुट्ठियां

पंजाब में नए कृषि कानूनों का विरोध जारी है.

पंजाब में नए कृषि कानूनों का विरोध जारी है.

पंजाब (Punjab) के पूरे मालवा क्षेत्र में घूमने के दौरान आपको पता चलेगा कि यहां के किसानों ने अपनी दोनों फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (Punjab) पर बेची हैं. इस साल रिकॉर्ड खरीदारी भी हुई है. और ये सबकुछ नए कृषि कानूनों के आने के बाद हुआ है. इसके बावजूद किसानों का विरोध जारी है.

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मोगा, लुधियाना, जगरांव. खेती-किसानी के लिए अपनी पहचान रखने वाले राज्य पंजाब (Punjab) में नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) को लेकर विचित्र विरोधाभास दिखाई देता है. राज्य के बाघा पुराना इलाके में अपने खेतों के पास आराम करते किसान अजित सिंह का कहना है कि उन्होंने गेहूं और धान की अपनी दो फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेची हैं. लेकिन फिर भी अजित सिंह नए कृषि कानूनों के खिलाफ अपने मोगा जिले में आंदोलन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. वो जोर देते हैं कि इन कानूनों को खत्म किया जाना बेहद जरूरी है.

दरअसल पंजाब के पूरे मालवा क्षेत्र में घूमने के दौरान आपको पता चलेगा कि यहां के किसानों ने अपनी दोनों फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेची हैं. इस साल रिकॉर्ड खरीदारी भी हुई है. और ये सबकुछ नए कृषि कानूनों के आने के बाद हुआ है. हालांकि इन कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे लगा दिया गया था. इसके बावजूद किसानों का विरोध जारी है.

रिकॉर्ड खरीदारी
आंकड़ों के मुताबिक 210 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद अकेले पंजाब से हुई है. ये पूरे देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा है. वहीं 2021-22 के सीजन में पंजाब में अब तक पूरे देश के करीब 32 फीसदी गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुई है.

किसानों के पास न्यूनतम समर्थन मूल्य का विकल्प हमेशा बना हुआ
नए कृषि कानून किसानों को इस बात की छूट देते हैं कि वो अपनी फसल मंडियों से इतर खुले बाजार में भी बेच सकें. यहां उन्हें ज्यादा कीमत मिल सकती है. केंद्र के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है-हालांकि किसानों के पास न्यूनतम समर्थन मूल्य का विकल्प हमेशा बना हुआ है.

लेकिन किसान अजित सिंह इस बात से प्रभावित नहीं हैं. वो कहते हैं-केंद्र सरकार एक ऐसा नियम क्यों नहीं लाती जिसके मुताबिक कोई भी प्राइवेट कंपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर खरीद न सके. जब तक ऐसा नहीं हो जाता तब तक ये नया कानून हमारे गले में कांटे की तरह है.

मक्का किसान की दिक्कत
लुधियाना के मक्का किसान अमरिक सिंह कहते हैं कि मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1850 रुपए है लेकिन ये प्राइवेट मार्केट में 800 रुपए की कीमत में बिकता है. अगर प्राइवेट कंपनियों की एंट्री हुई तो यही हाल गेहूं और धान के साथ भी हो सकता है.

गेहूं और धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि के लिए किसान केंद्र सरकार की तारीफ भी कर रहे हैं. लेकिन वो पंजाब में बिजली की समस्या की तरफ इशारा करते हुए प्राइवेट पावर प्लांट पर आरोप मढ़ रहे हैं. वो प्राइवेट प्लेयर्स से पैदा होने वाली मुश्किलों की तरफ इशारा करते हुए ये बात कहते हैं.

अकाली सरकार पर आरोप
जगरांव के किसान मिंटू सिंह का कहना है-अकाली सरकार ने प्राइवेट कंपनियों से बिजली को लेकर समझौता किया और अब इसकी कीमत हम भुगत रहे हैं. ऐसी स्थिति में आखिर हम केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों को लेकर भरोसा कैसे कर सकते हैं? वो कहते हैं उन्हें धान की रोपाई के लिए पानी सप्लाई के लिए पर्याप्त बिजली सप्लाई नहीं मिल रही.

किसान आंदोलन और राजनीति
राज्य में ऐसी अफवाहें हैं कि किसान आंदोलन को लेकर राजनीति की शुरुआत हो चुकी है. दरअसल एक बड़े किसान नेता गुरनाम सिंह चारुनी ने दो दिन पहले कहा है कि उन्हें एक राजनीतिक पार्टी बनानी चाहिए और 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए. गुरनाम के इस वक्तव्य से अन्य किसान संगठनों ने खुद को अलग कर लिया है. हालांकि राज्य में सभी राजनीतिक पार्टियां किसान आंदोलन को समर्थन दे रही हैं और कह रही हैं कि वो उनके हितों के लिए काम करेंगी.

लुधियाना जाने वाले हाईवे पर गोबिंदगढ़ के नजदीक किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल का एक पोस्टर लगा हुआ है. इसमें कांग्रेस के नेताओं और अरविंद केजरीवाल की भी तस्वीर है. एक किसान नेता का कहना है-चुनावों को लेकर कई तरह के मत हैं. कोई कहता है कि किसानों को चुनाव का बहिष्कार करना चाहिए. वहीं गुरनाम जैसे कुछ लोग कहते हैं कि नई राजनीतिक पार्टी बनानी चाहिए. कुछ लोगों का कहना है कि स्वतंत्र प्रत्याशियों का समर्थन किया जाना चाहिए.undefined

Tags: MSP of crops, New Farm Laws, Punjab

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