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Hijab Row: कर्नाटक में 13 साल पुराना है हिजाब मामला, जानिये कब और कैसे उपजा विवाद

कर्नाटक में पुराना है हिजाब विवाद.

कर्नाटक में पुराना है हिजाब विवाद.

Hijab Row: कर्नाटक (Karnataka High Court) ने हिजाब बैन के खिलाफ दायर सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं. पिछले साल उडुपी के ए ...अधिक पढ़ें

बेंगलुरु. कर्नाटक (Karnataka) में जारी हिजाब विवाद (Hijab Row) के मामले में हाईकोई (Karnataka High Court) ने मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए हिजाब (Hijab) पर बैन के खिलाफ दायर की गईं सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं. इसके साथ ही कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court Verdict on Hijab Row) ने यह भी कहा है कि इस्‍लाम धर्म में हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं है. पिछले दिनों कर्नाटक के स्‍कूल-कॉलेजों में हिजाब को लेकर काफी विवाद देखने को मिला था. इसके बाद कुछ मुस्लिम छात्राओं की ओर से हिजाब विवाद को लेकर ये याचिकाएं लगाई गई थीं. हालांकि कर्नाटक में हिजाब विवाद नया नहीं है. करीब 13 साल पहले भी इस तरह का विवाद सामने आ चुका है.

हिजाब विवाद के मामले में कर्नाटक का उडुपी शहर केंद्र में रहा है. उडुपी में इस बार भी हिजाब विवाद देखने को मिला. वहीं उडुपी और मंगलुरु समेत कई जगहों पर इससे पहले भी कई विरोध की खबरें आ चुकी हैं. साल 2009 में बंटवाल के एसवीएस कॉलेज में भी हिजाब पहनने को लेकर विवाद सामने आ चुका है. इसके बाद 2016 में बेल्लारी के डॉक्टर शिवराम करांत सरकारी कॉलेज में भी ऐसी घटनाएं देखने को मिली थीं. 2016 में श्रीनिवास कॉलेज और 2018 में सेंट एग्नस कॉलेज में भी हिजाब को लेकर विरोध प्रदर्शन दर्ज किए जा चुके हैं.

पिछले साल उडुपी के एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की छात्राओं के एक समूह की कक्षाओं में उन्हें हिजाब पहनने देने की मांग से तब एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था, जब कुछ हिंदू विद्यार्थी भगवा शॉल पहनकर पहुंच गए थे. यह मुद्दा राज्य के अन्य हिस्सों में फैल गया था जबकि सरकार यूनिफॉर्म संबंधी नियम पर अड़ी रही थी.

एक जनवरी, 2022 को उडुपी के एक महाविद्यालय की छह लड़कियों ने कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) द्वारा आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में हिस्सा लिया था. इसका आयोजन कॉलेज प्रशासन द्वारा इन लड़कियों को हिजाब में कक्षाओं में जाने से रोके जाने के खिलाफ किया गया था.

दूसरी ओर अक्‍टूबर 2021 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था. तब वेबसाइट द न्यूज मिनट के अनुसार एक तस्वीर सामने आई थी. इसमें कॉलेज की कुछ छात्राएं कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) के बैनर तले देखी गई थीं. रिपोर्ट के अनुसार कुछ मुस्लिम छात्राओं ने एबीवीपी की ओर से आयोजित किए गए विरोध-प्रदर्शन में भी हिस्‍सा लिया था. इसी दौरान यह फोटो ली गई थी. इस फोटो के साथ एक संदेश भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस संदेश में कहा गया था कि इन छात्राओं ने एक विरोध में बगैर यह जाने हिस्‍सा लिया था कि उसे एबीवीपी की ओर से आयोजित किया गया था. कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के नेताओं के आज उन्हें समझाने के बाद उन्होंने अपनी मर्जी से सीएफआई जॉइन कर ली है.

रिपोर्ट के अनुसार सीएफआई और स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन (SIO) के समर्थन के साथ छात्रों ने उडुपी उपायुक्त कुरमा राव से भी संपर्क किया था. उन्होंने कहा था कि उनकी अपील पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. सीएफआई के नाजनात असदी ने इस संबंध में कहा था, ‘हम पूरे मुद्दे पर लड़कियों का समर्थन कर रहे हैं और हम चाहते हैं कि उन्हें कक्षाओं में हिजाब पहनने की इजाजत दी जाए. कुछ रिपोर्ट के अनुसार सीएफआई के तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े हैं. जबकि, एसआईओ जमात-ए-इस्लामी हिंद का छात्र मोर्चा है.

Tags: Hijab, Hijab controversy

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