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Quick Analysis: नई नौकरी और पेंशन के वादों पर फिसले हिमाचल के मतदाता

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने पूर्ण बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है.

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने पूर्ण बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है.

हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. वहीं जयराम रमेश ने राज्यपाल से म ...अधिक पढ़ें

ब्रज मोहन सिंह
हिमाचल प्रदेश के मतदाताओं ने एक अजूबा रिकॉर्ड कायम रखा हुआ है. लोगों ने वर्ष 1993 के बाद से यहां किसी भी पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता की चाभी नहीं सौंपी. इस बार बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को उम्मीद थी कि शायद इस ट्रेंड में विराम लग जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. भाजपा ने दावा किया था कि वो डबल इंजिन की सरकार बनाकर परंपरा को बदल कर रख देगी. लेकिन जनता भी अपना मन बना चुकी थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड़ड़ा, योगी आदित्यनाथ जैसे कई दिग्गज नेता चुनाव अभियान में उतरे थे. इतना कुछ होते हुए भी हिमाचल की जनता ने अपना मेंडेट उस कांग्रेस के पक्ष में दे दिया, जिनके शीर्ष नेता चुनाव प्रचार तक के लिए नहीं आए. आखिर क्या थी वैसी वजहें जिसने बीजेपी का खेल बिगाड़ दिया. आइये समझने की कोशिश करते हैं-

बीजेपी कैडर में नाराजगी
मुख्यमंत्री जयराम रमेश के खिलाफ पहले भी रोष देखा गया, वो बीजेपी के कैडर को जोड़ने में नाकाम रहे. इस वजह से कम से 16 बागी विधायक भी मैदान में आ गए और कई जगहों पर बीजेपी के खिलाफ भितरघात किया. टिकट बंटवारे को लेकर लोगों में आक्रोश इतना प्रबल था कि प्रधानमंत्री मोदी को भी बीजेपी के कार्यकर्ताओं से बात करनी पड़ी. ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है.

ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर रोष
एक ऐसे राज्य में जहां की अर्थव्यवस्था सरकारी नौकरी पर निर्भर करती है, ओल्ड पेंशन के मुद्दे को नज़रअंदाज़ करना भाजपा के लिए भारी पड़ा. राज्य में लगभग 5 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, साथ ही लाखों की संख्या में उनपर आश्रित उनके परिवार हैं. लोगों के अंदर रोष था कि 2004 में जो ओल्ड पेंशन स्कीम बंद की गई थी उसको फिर से लागु किया जाय. इस योजना के अंदर कर्मचारियों को पेंशन की पूरी राशि दी जाती थी. कांग्रेस ने जनता की दुखती रग को पकड़ा और चुनावी मैदान में इसे बड़ा मुद्दा बनाया.

अग्निवीर आंदोलन से निकली आंच को नरम समझना
भले ही हिमाचल प्रदेश में अग्निवीर योजना को लेकर बिहार जैसे उग्र आंदोलन नहीं हुए लेकिन पता होना चाहिए कि हिमाचल प्रदेश के निचले जिलों में भारी संख्या में लोग पीढ़ियों से सेना में भर्ती होते रहे हैं. यहां के लोग सेना में जाना सम्मान की बात मानते हैं. लेकिन जिस तरह से यहाँ प्रचार हुआ, उससे लोअर हिमाचल में बीजेपी के खिलाफ माहौल बना.

पलायन भी बड़ा मुद्दा है
पहाड़ों में पलायन एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है. गांव के गांव हिमाचल में पलायन की वजह से खाली हो रहे हैं. लोगों की वर्षों से मांग रही है कि पहाड़ पर ही लोगों के लिए रोजगार सृजित किए जाएं. लेकिन ऐसा अभी तक किसी भी सरकार ने नहीं किया है.

कांग्रेस ने महिलाओं को रिझाया
लोग वादों के पीछे भागते हैं, वोट देते हैं ऐसा हम कई राज्यों में देख चुके हैं. जिस तरह पंजाब में आम आदमी पार्टी ने महिलाओं को पेंशन देने की बात कही थी. उसी तरह यहां कांग्रेस ने महिलाओं को 1500 रुपया प्रति माह देने का वादा किया है. इसलिए महिलाओं की भागीदारी कांग्रेस के पक्ष में ज़्यादा देखें को मिला. मल्लिकार्जुन खडगे और प्रियंका गांधी ने हिमाचल के युवाओं से 1 लाख नौकरी देने वादा कर युवाओं का मन मोह लिया.

आने वाले कुछ हफ्तों में बीजेपी जरूर देखेगी की हाथ में आई बाजी कैसे फिसल गई, खासकर उस राज्य में जहां कांग्रेस के अंदर तीन अलग-अलग गुट थे, लेकिन जनता ने डबल इंजन सरकार बनाने के वादे को नज़रअंदाज़ कर, उस कांग्रेस को मौका दे दिया, जिसमें मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर आज भी असमंजस बना हुआ है.

Tags: Congress, Himachal Assembly Elections

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