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असमः वित्तमंत्री सरमा बोले- कर्ज दबाव में गरीब महिलाओं ने अपने सतीत्व से समझौता किया

असम के वित्तमंत्री हिमंता विस्वा सरमा (फाइल फोटो)
असम के वित्तमंत्री हिमंता विस्वा सरमा (फाइल फोटो)

असम सरकार (Assam Government) का द असम माइक्रो फाइनेंस संस्थान (ऋण नियमन) विधेयक, 2020 आर्थिक रूप से कमजोर समूहों और व्यक्तियों को MFI या कर्ज देने वाली एजेंसियों के उच्च ब्याज दर और दंडात्मक उपायों से बचाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 30, 2020, 10:23 PM IST
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गुवाहाटी. असम सरकार (Assam) ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि राज्य में माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं (MFI) से लिये कर्ज को चुकाने में नाकाम रहने पर कई महिलाओं को अपने सतीत्व से समझौता करना पड़ा. वित्त मंत्री हिमंत विश्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि गरीब महिलाएं एमएफआई से बेहद उच्च दर पर रकम उधार लेती हैं और राज्य सरकार के पास इन्हें रोकने का कोई तंत्र नहीं क्योंकि वे आरबीआई के दिशानिर्देश से संचालित होते हैं.

सरमा ने कहा, “कई महिलाएं मेरे पास आईं और यह बताया कि कई अन्य महिलाओं ने माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं से लिया कर्ज नहीं चुका पाने के दबाव में अपने सतीत्व से समझौता किया. मैं आशा करता हूं कि यह सच न हो.” एक अनुमान के मुताबिक इन एमएफआई ने असम में गरीब लोगों उनमें भी अधिकतर महिलाओं को बिना उनके कर्ज वापस करने की क्षमता का आकलन किये करीब 12 हजार करोड़ रुपये का कर्ज दिया है.

सरमा ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा एक विधेयक के बारे में उन्हें दिये गए उन सुझावों पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर समूहों और व्यक्तियों को एमएफआई या कर्ज देने वाली एजेंसियों के उच्च ब्याज दर और दंडात्मक उपायों से बचाता है.



उन्होंने कहा, “आरबीआई ने कल मुझे एक पत्र लिखकर कहा कि विधेयक पारित करने से पहले उससे परामर्श किया जाए. उसने कुछ बदलाव भी सुझाए हैं. आरबीआई इस दृश्य में कहां से आती है? यह सदन का विशेषाधिकार है. अगर मैं सदन में वह पत्र रख दूं तो आरबीआई को विशेषाधिकार प्रस्ताव का सामना करना होगा.” मंत्री ने कहा कि वह इस बारे में आरबीआई गवर्नर को लिखेंगे.

विधानसभा ने सर्वसम्मति से द असम माइक्रो फाइनेंस संस्थान (ऋण नियमन) विधेयक, 2020 पारित किया है.
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