मॉब लिंचिंग के शिकार हुए लोगों में आधे से ज्यादा गैर-मुस्लिम

पीएम मोदी ने कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाएं गलत हैं, लेकिन इसके लिए पूरे झारखंड को दोषी न बनाया जाए. कानून के सहारे दोषियों पर जो कार्रवाई की जा सकती है वो होनी चाहिए.

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: June 28, 2019, 3:52 PM IST
मॉब लिंचिंग के शिकार हुए लोगों में आधे से ज्यादा गैर-मुस्लिम
भीड़ के हाथों अब तक सबसे ज्यादा 15-15 मौतें गुजरात और राजस्थान में हुई हैं
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: June 28, 2019, 3:52 PM IST
झारखंड में तबरेज़ की हत्या के बाद एक बार फिर मॉब लिंचिंग पर सियासत तेज हो गई है. संसद के दोनों सदनों में भी मुद्दा गूंज रहा है. यहां तक की 26 जून को पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी इस घटना पर सदन को संबोधित किया. राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाएं गलत हैं, लेकिन इसके लिए पूरे झारखंड को दोषी न बनाया जाए. उन्होंने कहा कि कानून के सहारे दोषियों पर जो कार्रवाई की जा सकती है वो होनी चाहिए.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि झारखंड को मॉब लिंचिंग का अड्डा बताया गया, जो गलत है. युवक की हत्या का दुख मुझे भी है और सबको होना चाहिए. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सबको कटघरे में लाकर राजनीति तो कर लेंगे, लेकिन हालात नहीं सुधार पाएंगे.

ये तो रही मॉब लिंचिंग पर प्रधानमंत्री की बात. 28 सितंबर 2015 से 7 जून 2019 तक घटी ऐसी घटनाओं में 141 लोगों की जान जा चुकी है. जिसमें मरने वालों में 70 मुस्लिम तो 71 गैरमुस्लिम भी हैं. आंकड़े बताते हैं कि भीड़ ने न हिंदू को छोड़ा और न मुस्लिम को. 2018 में सबसे ज्यादा 61 लोगों की हत्या हुई. यह ब्योरा अलीगढ़ के स्टेप्स फाउंडेशन ने जुटाया है.

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झारखंड में भीड़ ने इन्हें भी मारा

-17 मार्च 2016: मोहम्मद मजलूम, इनायतउल्ला खान की हत्या

-18 मई 2017: शेख शिराज को भीड़ ने मारा
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-27 जून 2017: उस्मान अंसारी मारे गए

-29 जून 2017: असगर अली की हत्या

-9 सितम्बर 2018: भीड़ ने मोहन राय को मारा

गुजरात-राजस्थान में हुईं सबसे ज्यादा मौतें 

भीड़ द्वारा पीटकर हत्या करने का सबसे बड़ा आंकड़ा गुजरात और राजस्थान का है. बेशक इसकी शुरुआत यूपी के दादरी से हुई थी. लेकिन भीड़ के हाथों अब तक सबसे ज्यादा 15-15 मौतें गुजरात और राजस्थान में हुई हैं. गुजरात के ऊना में तो 30 जून, 2016 को भीड़ ने एक साथ 5 गैरमुस्लिमों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इसके बाद 25 सितम्बर 2016 में बनासकांठा में संगीता और नीलेश की भीड़ ने हत्या कर दी थी.

राजस्थान की बात करें तो एक अप्रैल 2017 को अलवर में पहलू खान और इरशाद खान की भीड़ ने हत्या कर दी थी. उसके बाद 12 जून, 2017 को बाड़मेर में दो गैरमुस्लिमों की भीड़ ने हत्या कर दी थी. भीड़ यूपी में 13, असम में 11 और महाराष्ट्र में 10 हत्याएं कर चुकी है.

मॉब लिंचिंग पर कुछ और फैक्ट

-28 सितम्बर 2015 को यूपी के दादरी में मोहम्मद अखलाक नामक एक मुस्लिम से मॉब लिंचिंग शुरु हुई थी.

-सात जून 2019 को जमना टाटी और अजय टाटी नामक दो हिंदुओं की असम में भीड़ ने हत्या कर दी.

-नवंबर 2017 को दिल्ली-शामली के बीच ट्रेन में भी भीड़ ने की थीं चार हत्याएं.

-जम्मू-कश्मीर में भी भीड़ ने 8 हत्याएं की हैं.

-राजधानी दिल्ली में भी ऐसी 2 हत्याएं हुई हैं.

मॉब लिंचिंग पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट

यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह कहते हैं “अगर इस तरह की हत्याओं को रोकना है तो कड़ा संदेश देने के साथ ही कड़ी कार्रवाई भी करनी होगी. फास्ट ट्रैक कोर्ट में सभी मामलों को ले जाइए. 20 से 30 दिन में फैसला हो जाएगा. जब आरोपी कातिल ठहराए जाएंगे और एक के बाद एक उन्हें सजा होने लगेगी तो फिर किसी की हिम्मत नहीं होगी कि इस तरह की हत्याएं करे. लेकिन जब आरोपियों को माला पहनाई जाएगी, लड्डू खिलाए जाएंगे और सार्वजनिक तौर पर उनका सम्मान होगा, तिरंगे में लिपेटे जाएंगे तो यह तय कि अभी 141 का आंकड़ा सामने आया है और यह ज्यादा भी हो सकता है.”

मनोचिकित्सक डॉ. केसी गुरनानी कहते हैं “इस तरह की हिंसा करने वाले वो लोग होते हैं जो किसी की परवाह नहीं करते. फिर वो चाहे समाज हो या कानून. ऐसे लोग जो मन में आता है वो करते हैं. भीड़ द्वारा हत्या करने वाली मानसिकता और एक लड़की के साथ रेप करने वाले आरोपी की मानसिकता एक जैसी ही होती है. दोनों का अपनी भावनाओं पर कोई नियंत्रण नहीं होता. इसकी वजह सामाजिक मूल्यों का कम होना और अदालतों में सुनवाई में हो रही देरी है.”

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First published: June 28, 2019, 2:55 PM IST
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