बाबरी मस्जिद के नीचे मिले थे मंदिर के अवशेष: एएसआई के पूर्व डायरेक्टर का दावा

देश के जाने-माने पुरातत्वशास्त्री और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पूर्व निदेशक डॉक्टर केके मोहम्मद ने दावा किया है अयोध्या में 1976-77 में हुई खुदाई के दौरान मंदिर के अवशेष होने प्रमाण मिले थे.

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  • Last Updated: March 31, 2017, 4:22 PM IST
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देश के जाने-माने पुरातत्वशास्त्री और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पूर्व निदेशक डॉक्टर केके मोहम्मद ने दावा किया है अयोध्या में 1976-77 में हुई खुदाई के दौरान मंदिर के अवशेष होने प्रमाण मिले थे. मोहम्मद ने कहा कि ये खुदाई भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण के तत्कालीन महानिदेशक प्रोफेसर बीबी लाल के नेतृत्व में की गई थी. उस टीम में वो भी एक सदस्‍य थे.

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'खुदाई में मिले थे मंदिर के प्रमाण'



डॉक्टर मोहम्मद के मुताबिक पहली बार 1977-78 में और बाद में भी जब एएसआई ने खुदाई की तो बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर के प्रमाण मिले. जल की मकर मुख वाली परनाली, शिखर के नीचे अमलका और सबसे बड़ा प्रमाण विष्णु हरि शिला फलक जो कहता है कि यह मंदिर उसका है, जिसने दस शीश वाले का वध किया. आप समझ सकते हैं कि दस सिर वाला रावण है और उसका वध राम ने किया.
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'वामपंथी इतिहासकार हैं जिम्मेदार'

बरसों बाद भी अयोध्या मामले का हल नहीं निकलने के लिए केके मोहम्मद ने वामपंथी इतिहासकारों को जिम्मेदार ठहराया है. उनके मुताबिक वामपंथियों ने इस मसले का समाधान नहीं होने दिया और मामले को कॉम्लीकेट कर दिया. डॉ़क्टर मोहम्मद का दावा है कि मंदिर मामले में देश के मुसलमानों को कुछ वामपंथी चिंतकों ने गुमराह किया था. अगर ऐसा न हुआ होता तो ये मुद्दा कब का सुलझ चुका होता.

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'मुस्लिम समाज के लिए सुनहरा मौका'

केके मोहम्मद के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की ओर से मध्यस्थता की पेशकश का प्रस्ताव मुल्सिम बिरादरी के लिए इस विवाद को सुलझाने का सुनहरा मौका है. मुस्लिम समुदाय को समझना चाहिए कि इतिहास की कई गलतियां हुई हैं. उसको स्वीकारने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए.

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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को न्यायिक तरीके से सुलझाने की बजाय इस मसले का शांतिपूर्ण समाधान निकालना बेहतर है. चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने कहा है कि अगर दोनों पक्ष राजी हों तो वो कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार हैं.
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