बंगाल: कोविड-19 से लड़ते हुए हिंदुत्ववादी नेता तपन घोष का निधन

बंगाल: कोविड-19 से लड़ते हुए हिंदुत्ववादी नेता तपन घोष का निधन
बंगाल के हिंदुत्ववादी नेता तपन घोष का कोविड-19 से निधन (फाइल फोटो)

आरएसएस (RSS) के एक पूर्व नेता, घोष COVID-19 के कारण मरने वाले राज्य के दूसरे राजनेता हैं. पिछले महीने, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक की इस संक्रामक बीमारी (Contagious Disease) के चलते मौत हो गई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 13, 2020, 12:18 AM IST
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कोलकाता. हिंदुत्ववादी नेता तपन घोष (Hindutva leader Tapan Ghosh) की रविवार को एक अस्पताल (Hospital) में मृत्यु हो गई. उनके सहयोगियों ने बताया उन्हें COVID-19 टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया था. 67 वर्षीय घोष कट्टरपंथी समूह हिंदू समहती (Hindu Samhati) के संस्थापक थे. COVID-19 टेस्टिंग में पॉजिटिव पाये जाने के बाद उन्हें पिछले सप्ताह एक निजी अस्पताल (Private Hospital) में भर्ती कराया गया था.

हिंदू समहती (Hindu Samhati) के अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य ने पीटीआई को बताया, "आज शाम तपन-दा का निधन हो गया. उनके परिवार में सिर्फ उनकी दो बहनें हैं." आरएसएस (RSS) के एक पूर्व नेता, घोष COVID-19 के कारण मरने वाले राज्य के दूसरे राजनेता हैं. पिछले महीने, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक की इस संक्रामक बीमारी (Contagious Disease) के चलते मौत हो गई थी.


वरिष्ठ भाजपा नेता स्वपन दासगुप्ता ने ट्वीट कर जताया शोक, कहा- निरंतर प्रेरणा देते रहेंगे
घोष के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए, वरिष्ठ भाजपा नेता स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की एकता के लिए लड़ने वाले सबसे समर्पित व्यक्तियों में से एक थे.



राज्यसभा सांसद दासगुप्ता ने ट्वीट किया, "उन्होंने व्यक्तिगत उदाहरण के माध्यम से हजारों लोगों को प्रेरणा देते हुए, इस कारण से अपना जीवन दिया. उन्हें हमेशा याद किया जाएगा और वे निरंतर प्रेरणा देते रहेंगे. ओम शांति."

2007 में RSS छोड़ बनाई हिंदू समहती, बाद में उसे भी छोड़ा
कुछ वैचारिक मतभेदों के चलते घोष, जो 1975 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे थे, 2007 में संगठन से अलग हो गए थे. उन्हें उग्र भाषणों और अक्सर विवादास्पद टिप्पणियों के लिए जाना जाता था. उन्होंने 2008 में हिंदू समहती का गठन किया.

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केवल कुछ सौ लोगों के साथ गठित किये जाने के बाद, उनके नेतृत्व में संगठन पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में फैल गया था, और झारखंड और असम में भी इसकी ईकाईयां खोली गई थीं. घोष ने 2018 में संगठन के भीतर कुछ मतभेदों को देखते हुए हिंदू समहती को छोड़ दिया.
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