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क्या बंगाल में दोहराएगा इतिहास? इन दो सियासी किस्सों का क्यों हवाला दे रही है बीजेपी

पश्चिम बंगाल में शनिवार से मतदान प्रक्रिया शुरू हो रही है. (फाइल फोटो: Shutterstock)

पश्चिम बंगाल में शनिवार से मतदान प्रक्रिया शुरू हो रही है. (फाइल फोटो: Shutterstock)

West Bengal Election 2021: जब कई राजनीतिक जानकार टीएमसी (TMC) और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर का अनुमान लगा रहे हैं, तो बंगाल का इतिहास कहता है कि राज्य ने हमेशा निर्णायक जनादेश दिया है. इस बात का जवाब परिणामों के दिन 2 मई को पता लग जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 6:03 PM IST
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(अमन शर्मा)


कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 (West Bengal Assembly Election 2021) का रण शुरू होने को है. शनिवार से राज्य में 8 चरणों की मतदान प्रक्रिया शुरू हो रही है. ऐसे में बंगाल के सियासी रण में दो सवाल जारी हैं. पहला कि क्या भारतीय जनता पार्टी (BJP) जादुई आंकड़ा पार करने के लिए साल 2019 के लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) में मिली गति को आगे बढ़ा पाएगी. दूसरा, या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का लगातार तीसरा कार्यकाल होगा?

सियासी हलकों में '121 बैरियर' को लेकर चर्चा तेज है. दरअसल, 121 विधानसभा क्षेत्रों पर 2019 के चुनाव में बीजेपी को बढ़त मिली थी. उस समय भगवा दल ने राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 19 जीतने में सफलता हासिल की थी. वहीं, तीन सीटें बहुत ही कम फर्क से हार गई थी. बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और यहां बहुमत का आंकड़ा 148 है. बीजेपी ने राज्य में 200 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है.
क्या इस बार दो इतिहास दोहराए जाएंगे?


सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार के चुनाव में बंगाल राजनीति का इतिहास दोहराएगा या नहीं. 2009 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष की भूमिका निभा रही बनर्जी की पार्टी ने 42 में से 19 सीटें जीती थीं. यह आंकड़ा 2019 में बीजेपी भी हासिल कर चुकी है. तब तक वाम सरकार के खिलाफ विरोध और नंदीग्राम और सिंगूर में भूमि अधिग्रहण ने ममता को रफ्तार दी. आखिरकार 2011 में बनर्जी ने 184 सीटें जीतकर 34 साल के वाम शासन को खत्म किया. अब बीजेपी इसी इतिहास का हवाला देकर कह रही है कि हवा उनके पक्ष में है.

साल 2011 में मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को जाधवपुर सीट से चौंकाने वाली हार मिली थी. उन्हें सरकार के पूर्व मुख्य सचिव मनीष गुप्ता ने मात दी थी. गुप्ता ने टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. ऐसे ही एक और इतिहास की ओर बीजेपी इशारा कर रही है कि बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हराया जा सकता है. यहां कभी ममता के करीबी रहे शुभेंदु अधिकारी उनके खिलाफ मैदान में हैं. नंदीग्राम की इस हाईप्रोफाइल सीट पर दूसरे चरण में मतदान होगा.

'121 बैरियर' को क्रॉस करने को लकेर बीजेपी का कहना है कि उन्होंने बीते दो सालों में काफी काम किया है और 85 प्रतिशत चुनावी बूथों पर टीमें तैनात की हैं. पार्टी के नेताओं का कहना है कि दक्षिण बंगाल को टीएमसी अपना मजबूत क्षेत्र मानती है. वहां भी बीजेपी आलोचकों को गलत साबित करते हुए 40 से 50 फीसदी सीटें जीत सकती है. टीएमसी ने वाम सत्ता को हटाने के लिए दर्जनों वर्ष तक लंबा संघर्ष किया है. पार्टी के नेता कहते हैं कि राज्य में बीजेपी की चुनौती इसके मुकाबले नई है और सत्तारूढ़ पार्टी के लिए वास्तविक खतरा पैदा करने में और भी ज्यादा समय की जरूरत होगी.

बनर्जी के साथ महिला मतदाताओं का साथ होने पर बीजेपी के नेता कहते हैं, '70 लाख किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि नहीं मिली. क्या इन परिवारों में महिलाएं नहीं थीं? क्या वे बीजेपी को वोट नहीं देंगी, क्योंकि हम एरियर में 18 हजार और उसके अगले साल 10 हजार रुपये देने का वादा कर रहे हैं.' वहीं, बीजेपी के बंगाल अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि पीएम मोदी की रैली में महिलाओं की बड़ी संख्या इस बात की ओर इशारा करती है कि उन्हें पीएम आवास योजना और हर घर जल योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं की जरूरत है.

जब कई राजनीतिक जानकार टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर का अनुमान लगा रहे हैं, तो बंगाल का इतिहास कहता है कि राज्य ने हमेशा निर्णायक जनादेश दिया है. इस बात का जवाब परिणामों के दिन 2 मई को पता लग जाएगा.

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