ऐतिहासिक फैसलाः भारत में अब गे सेक्स अपराध नहीं, SC ने कहा- LGBTQ का गुनहगार है इतिहास

बेंच में शामिल जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कमेंट किए. उन्होंने कहा, 'LGBT समुदाय को बहुसंख्यकों द्वारा समलैंगिकता को पहचान न देने पर डर के साए में रहने को मजबूर किया गया. इसलिए इतिहास को उनसे माफी मांगनी चाहिए.

News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 12:01 AM IST
ऐतिहासिक फैसलाः भारत में अब गे सेक्स अपराध नहीं, SC ने कहा- LGBTQ का गुनहगार है इतिहास
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एलजीबीटी कम्युनिटी में जश्न का माहौल है.
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Updated: September 7, 2018, 12:01 AM IST
सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने गुरुवार को समलैंगिकता पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की सेक्शन 377 के उस प्रावधान को रद्द कर दिया, जिसके तहत बालिगों के बीच सहमति से समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखा गया था. सभी जजों ने इस मामले में अलग-अलग टिप्पणियां की लेकिन सभी ने एकमत से गे सेक्स के अपराधिकरण के खिलाफ फैसला दिया. बेंच ने कहा कि इतने सालों तक समान अधिकार से वंचित करने के लिए समाज को एलजीबीटी समुदाय से माफी मांगनी चाहिए.

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बेंच में शामिल जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा, 'LGBT समुदाय को बहुसंख्यकों द्वारा समलैंगिकता को पहचान न देने पर डर के साए में रहने को मजबूर किया गया. इसलिए इतिहास को उनसे माफी मांगनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समलैंगिकता कोई मानसिक विकार नहीं है. LGBT समुदाय को कलंक न मानें. ये सेक्स च्वॉइस की बात है. इसके लिए सरकार को प्रचार करना चाहिए. अफ़सरों को संवेदनशील बनाना होगा. हालांकि, असहमति या जबरन बनाए गए संबंध इस सेक्शन 377 के तहत अपराध बने रहेंगे. साथ ही बच्चों और पशुओं के साथ यौनाचार भी अपराध की श्रेणी में रहेगा.'

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बेंच में शामिल जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, 'भारत के यौन अल्पसंख्यक नागरिकों को छुपना पड़ा. LGBT समुदाय को भी दूसरों की तरह समान अधिकार है. यौन प्राथमिकताओं के अधिकार से इनकार करना निजता के अधिकार को देने से इनकार करना है.' जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इस अधिकार को अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत पहचान मिली है. भारत भी इसकी सिग्नेट्री है कि किसी नागरिक की निजता में घुसपैठ का राज्य को हक नहीं है.

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद LGBT समुदाय काफी खुश है. उनका कहना है कि लंबी लड़ाई के बाद उनकी जीत हुई है. ये फ़ैसला ऐतिहासिक है. LGBT समुदाय के लोग सड़कों पर जश्न मनाने उतर गए हैं.

क्या है धारा 377 ?
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के मुताबिक कोई किसी पुरुष, स्त्री या पशुओं से प्रकृति की व्यवस्था के विरुद्ध संबंध बनाता है तो यह अपराध होगा. इस अपराध के लिए उसे उम्रकैद या 10 साल तक की कैद के साथ आर्थिक दंड का भागी होना पड़ेगा. सीधे शब्दों में कहें तो धारा-377 के मुताबिक अगर दो अडल्ट आपसी सहमति से भी समलैंगिक संबंध बनाते हैं तो वह अपराध होगा.
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