असम की बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित भूखे गैंडे लोगों के घरों के बाहर चर रहे

असम की बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित भूखे गैंडे लोगों के घरों के बाहर चर रहे
असम में भारी बाढ़ से गैंडों के पर्यावास को बहुत नुकसान हुआ है (सांकेतिक फोटो)

पिछले कुछ हफ्तों से लगातार हो रही बारिश और बाढ़ (Flood) के कारण इलाके के सभी घास के मैदान जलमग्न (submerge) हो गए हैं और इससे बड़ी संख्या में जानवरों के पर्यावासों को नुकसान (habitat loss) हुआ है.

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(निलोय भट्टाचार्जी)

दिसपुर. पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य (Pobitora Wildlife Sanctuary) में फॉरेस्ट रेंजर (Forest Rangers) और कर्मचारियों ने भूख से मर रहे जानवरों को अपने आंगन में चरने देने के लिए अपने कार्यालय के दरवाजे खुले छोड़ दिये हैं. लेकिन अधिकारी कहते हैं कि गैंडे (Rhinos) जो आमतौर पर मनुष्यों से अलग रहते हैं, भोजन (Food) की तलाश में घरों के पास जा रहे हैं हैं, यह चिंता बढ़ाने वाली बात है. काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) में रेंजर, मुकुल तमुली ने कहा, “यह पहली बार है, जब एक मां और बच्चा गैंडा हमारे करीब आए हैं. यह मेरे घर के दरवाजे पर शुक्रवार सुबह 10 फीट से भी कम दूरी पर था. वे उस घास पर चर रहे थे जो लगातार हो रही बारिश (incessant rains) के कारण बहुत बढ़ गई है.”

वन अधिकारी (forest official) ने कहा कि जहां राइनो का मानव की उपस्थिति (human presence) से बेखबर होना अजीब था, वहीं पिछले कुछ हफ्तों से लगातार हो रही बारिश और बाढ़ (Flood) के कारण इलाके के सभी घास के मैदान जलमग्न (submerge) हो गए हैं और इससे बड़ी संख्या में जानवरों के पर्यावासों को नुकसान (habitat loss) हुआ है.



2018 के अंत में की गई गणना के मुताबिक पार्क में 102 सींग वाले गैंडे
असम के मोरीगांव जिले में स्थित बाढ़-प्रभावित पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य से गैंडों का बाहर जाना कोई नई बात नहीं है. जबसे अभयारण्य का 95 प्रतिशत से अधिक बाढ़ के कारण पानी के भीतर जलमग्न हो जाता है, भोजन की कमी अभयारण्य में बढ़ गई है जो दुनिया में सबसे ज्यादा गैंडों के घनत्व का दावा करता है. वन्यजीव पार्क 2018 के अंत में की गई अंतिम गणना के अनुसार लगभग 102 एक सींग के गैंडों का घर है.

इस साल असम में आई बाढ़ ने अब तक 97 लोगों की जान ले ली है और राज्य के 25 जिलों में 50 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित किया है. अभयारण्य में तमुलदुबी, बंगल डुबी और तुपलुंग सहित सभी वन शिविर जलमग्न हैं, जिसके चलते अभयारण्य के भीतर वन रक्षकों को अभ्यारण्य के भीतर आने जाने में बहुत कठिनाई हो रही है.

नावों से ले जाकर गैंडों को खिलाया जा रहा घास का चारा
असम के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव वार्डन एमके यादव कहते हैं, "हालांकि, अभयारण्य के कार्यालय क्षेत्रों के बाहर टहलते हुए अपने बच्चे के साथ एक महिला गैंडे का नजारा कईयों को मोहित कर सकता है लेकिन यह गंभीर मामला है."

उन्होंने कहा, "पहली बार, हमें उन्हें बाहर से घास और चारा उपलब्ध कराना था."

अभयारण्य में फंसे हुए गैंडों को चारा उपलब्ध कराने के लिए ताजी घास से भरी हुई नौकाओं को पार्क के अंदर के ऊंचे इलाकों में ले जाया गया. मुख्य वन्यजीव वार्डन ने बताया, "नेपियर घास और डोल घास जो पशु चिकित्सा विभाग द्वारा प्रदान की गई हैं, गैंडों के लिए एक आदर्श विकल्प नहीं हैं, लेकिन हमें काम चलाना पड़ रहा है."

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वर्तमान में, पांच गैंडे अभयारण्य के आसपास के गांव राजमयोंग में तीन घरों में शरण लिए हुए हैं. तमुली ने कहा, "हम ग्रामीणों के लगातार संपर्क में हैं." उन्होंने कहा, “लोग सहयोग कर रहे हैं और गैंडों की देखभाल कर रहे हैं. उनके घरों को हुए किसी भी नुकसान की भरपाई की जायेगी."
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