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  • HIV INFECTED WOMAN FROM SOUTH AFRICA HAD THE CORONAVIRUS FOR 216 DAYS AND VIRUS MUTATED AT LEAST 32 TIMES

HIV संक्रमित महिला को 216 दिनों तक रहा कोरोना, 32 बार बदल चुका है स्वरूप

HIV संक्रमित महिला को 216 दिनों तक रहा कोरोना. (प्रतिकात्मक तस्वीर)

डरबन स्थित क्वाजूलू-नेटल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया कि एचआईवी संक्रमित महिला  (HIV Infected Woman) के शरीर में 13 म्यूटेशन (जेनेटिक उत्परिवर्तन) स्पाइक प्रोटीन में देखे गए है. ये वही प्रोटीन है जो कोरोना वायरस  (Coronavirus) को प्रतिरोधक तंत्र में हमले करने से रोकता है.

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    लॉस एंजिलिस. पूरी दुनिया पिछले डेढ़ साल से कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के संकट से जूझ रही है. हर देश के वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने की कोशिश में जुटे हुए हैं कि आखिर कोरोना वायरस (Coronavirus) इतनी तेजी से अपना स्‍वरूप कैसे बदल रहा है. कोरोना (Corona) के साथ चल रही इस जंग के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में एचआईवी संक्रमित महीला (HIV Infected Woman) पिछले 216 दिनों से कोरोना संक्रमित है. यहां पर सबसे खतरनाक बात ये है कि महिला के शरीर में कोरोना वायरस 32 बार अपना स्‍वरूप बदल चुका है. महिला पर हुए कोरोना हमले की जानकारी ‘मेडआरएक्स-4 जर्नल’ में प्री-प्रिंट के रूप में प्रकाशित की गई है.

    डरबन स्थित क्वाजूलू-नेटल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया कि एचआईवी संक्रमित महिला के शरीर में 13 म्यूटेशन (जेनेटिक उत्परिवर्तन) स्पाइक प्रोटीन में देखे गए है. ये वही प्रोटीन है जो कोरोना वायरस को प्रतिरोधक तंत्र में हमले करने से रोकता है. शोध के मुताबिक महिला के शरीर में कोरोना वायरस ने 32 बार अपना स्‍वरूप बदला. हालांकि अभी इस बात की जानकारी नहीं मिली है कि महिला में मौजूद म्यूटेशन का प्रसार अन्य लोगों में हुआ है या नहीं.

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    इस शोध से जुड़े तुलियो डि ओलिवेरा ने बताया कि अगर आगे भी इसी तरह के अन्‍य मामले सामने आते हैं तो एचआईवी संक्रमित मरीजों में कोरोना वायरस के नए स्वरूपों का पता लगाना आसान होगा. बता दें कि एचआईवी मरीजों में बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है. एचआईवी मरीज न सिर्फ संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, बल्कि उन पर वायरस का असर भी लंबे समय तक रहता है.

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    महिला की कैसे हुई पहचान
    शोधकर्ता महिला तक इसलिए पहुंच सके क्‍योंकि वो उन 300 प्रतिभागियों में शामिल थी, जिन्हें प्रतिरोधक तंत्र की प्रतिक्रिया को समझने के लिए चुना गया था. ‘लॉस एंजिलिस टाइम्स’ के मुताबिक अगर महिला को 300 लोगों में न चुका जाता तो शोधकर्ताओं को कभी इस बात का पता नहीं लग पाता कि कोरोना अपना स्‍वरूप तेजी से बदल रहा है क्‍योंकि महिला को कोरोना के काफी हल्‍के लक्षण थे.
    Published by:Shikhar Srivastava
    First published: