10 साल की बेटी से बलात्कार कर रहा था HIV संक्रमित पिता, कोर्ट ने सुनाई चार बार उम्रकैद की सज़ा

तमिलनाडु में एक पिता को अपनी 10 साल की बेटी के रेप का दोषी पाया गया है (सांकेतिक तस्वीर)
तमिलनाडु में एक पिता को अपनी 10 साल की बेटी के रेप का दोषी पाया गया है (सांकेतिक तस्वीर)

महिला अदालत (Women's court) की न्यायाधीश एजहिलारसी ने स्पष्ट आदेश (Order) दिया है कि उसकी मौत तक उसे जेल (jail) से रिहा नहीं किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2020, 7:37 AM IST
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तंजावुर (तमिलनाडु). अदालत ने अपनी नाबालिग बेटी से बलात्कार (Rape) के दोषी 31 वर्षीय व्यक्ति को चार बार उम्रकैद (Life Imprisonment) दिए जाने की मंगलवार को सजा सुनाई.

महिला अदालत की न्यायाधीश एजहिलारसी ने कुमार को चार बार की उम्र कैद की सजा सुनाई जो साथ-साथ चलेगी. साथ ही स्पष्ट आदेश दिया है कि उसकी मौत तक उसे जेल से रिहा नहीं किया जाएगा.

न्यायाधीश ने राज्य सरकार से बच्ची का इलाज कराने और 5 लाख का मुआवजा देने को कहा
न्यायाधीश ने दोषी पर 4,500 रुपये का जुर्माना लगाया. इसके अलावा, अपनी बेटी को जान से मारने की धमकी देने के लिए भी उसे छह माह की सजा सुनाई गई. न्यायाधीश ने राज्य सरकार से बच्ची के इलाज के अलावा पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की भी अनुशंसा की.
जिले के मधुकरई में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करने वाला कुमार अपनी 10 साल की बच्ची से लगातार बलात्कार करने का दोषी पाया गया था. कुमार को मीडिया रिपोर्ट्स में HIV संक्रमित भी बताया गया है.



हैदराबाद पशु चिकित्सक गैंगरेप की घटना के बाद से रेप की घटनाओं में कड़ी सजा
आपको बता दें कि हाल ही में हैदराबाद की पशु चिकित्सक के साथ हुई सामूहिक बलात्कार और उसके बाद उसे जलाए जाने की घटना के बाद से देश में यौन अपराधों, खास तौर पर बाल यौन अपराधों से कड़ाई से निपटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है.

हाल ही में आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने मसौदा कानून को स्वीकृति दी जो महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों का निपटारा 21 दिन में करने और दोषियों के लिए मौत की सजा को अनिवार्य बनाता है. यह कानून, आंध्र प्रदेश अपराध कानून में एक संशोधन होगा जिसे 'दिशा एपी एक्ट' नाम दिया गया है.

हैदराबाद, तेलंगाना में हाल ही में बलात्कार और हत्या का शिकार हुई महिला पशु चिकित्सक की याद में यह कानून लाया जा रहा है. इसके अलावा एक अन्य मसौदा कानून को भी मंजूरी दी गई जो महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए विशेष अदालतों के गठन का मार्ग प्रशस्त करेगा. (भाषा के इनपुट सहित)

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