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पढ़ें: आतंकी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर क्या है, कैसे करता है काम?

पढ़ें: आतंकी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर क्या है, कैसे करता है काम?

भारत के पांच शहरों पर बड़ा फिदायीन हमला करने की मुख्य जिम्मेदारी उठाने वाला हिज्ब-उत-तहरीर आतंकी संगठन बांग्लादेश का है। हिज्ब-उत-तहरीर और इंडियन मुजाहिदीन में काफी समानताएं हैं।

भारत के पांच शहरों पर बड़ा फिदायीन हमला करने की मुख्य जिम्मेदारी उठाने वाला हिज्ब-उत-तहरीर आतंकी संगठन बांग्लादेश का है। हिज्ब-उत-तहरीर और इंडियन मुजाहिदीन में काफी समानताएं हैं।

भारत के पांच शहरों पर बड़ा फिदायीन हमला करने की मुख्य जिम्मेदारी उठाने वाला हिज्ब-उत-तहरीर आतंकी संगठन बांग्लादेश का है। हिज्ब-उत-तहरीर और इंडियन मुजाहिदीन में काफी समानताएं हैं।

    नई दिल्ली। भारत के पांच शहरों पर बड़ा फिदायीन हमला करने की मुख्य जिम्मेदारी उठाने वाला हिज्ब-उत-तहरीर आतंकी संगठन बांग्लादेश का है। हिज्ब-उत-तहरीर और इंडियन मुजाहिदीन में काफी समानताएं हैं। भारत में फिदायीन हमलों का नया ठेकेदार हिज्ब-उत-तहरीर है क्या? हिज्ब-उत-तहरीर के पीछे किसका दिमाग काम कर रहा है? आगे पढ़ें-

    भारत के अहम शहरों में फिदायीन हमले की साजिश में जिस नए संगठन का नाम सामने आया है वो है हिज्ब-उत-तहरीर। दरअसल हिज्ब-उत-तहरीर का गढ़ बांग्लादेश में है। ये संगठन पिछले कई सालों से बांग्लादेश की सरकार के खिलाफ काम करता रहा है। माना जाता है कि हिज्ब-उत-तहरीर के समर्थन बांग्लादेश के प्रशासन, शिक्षा संस्थाओं, मदरसों और यहां तक की सुरक्षा विभाग में भी हैं। आपको बता दें कि हिज्ब-उत-तहरीर की स्थापना साल 2000 में हुई थी। आतंकी गतिविधियों में शामिल के आरोप में साल 2009 में इस संगठन पर बैन लगा दिया गया। अब हिज्ब-उत-तहरीर संगठन दुनिया के दूसरे आतंकी संगठनों के साथ काम करने लगा है।

    हिज्ब-उत-तहरीर के तार दुनिया के कई देशों में फैले हुए हैं। इस्लामिक स्टेट से प्रभावित ये संगठन इंडियन मुजाहिदीन की तरह ही काम करता है। यही नहीं इंडियन मुजाहिदीन और हिज्ब-उत-तहरीर का गठन भी एक ही साल में हुआ था। लेकिन 2008 में ही दिल्ली के बटला हाउस में हुई दिल्ली पुलिस की कार्रवाई ने इंडियन मुजाहिदीन को तोड़कर रख दिया। अब पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं ने इंडियन मुजाहिदीन को जिंदा करने में पूरी ताकत लगा दी है।

    इंडियन मुजाहिदीन के पुराने आतंकियों की सबसे बड़ी ताकत है कि वो देश के कोने-कोने से वाकिफ हैं। भारत की खुफिया एजेंसियों का काम करने का तरीका भी उन्हें पता है। इसलिए भारत में फिदायीन हमले की साजिश करते वक्त लश्कर और जैश के साथ ही इंडियन मुजाहिदीन को भी अपने साथ शामिल किया गया।

    लश्कर के कैंपों से निकले इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी बम बनाने और हथियार चलाने में माहिर माने जाते थे। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान से मदद, बेहद खुफिया भर्ती अभियान और बम बनाने की क्षमता की वजह से इंडियन मुजाहिदीन को इतनी कामयाबी मिली। आपको ये भी याद दिला दें कि इंडियन मुजाहिदीन का नाम 2005 के बाद हुए देश के बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा हुआ है। ये हमले भीड़ भरे बाजारों से लेकर ट्रेन तक में किए गए।

    साल 2005 में दिल्ली के सरोजिनी नगर मार्केट धमाके में 66 लोगों की मौत हुई थी। साल 2006 में मुंबई लोकल में सीरियल ब्लास्ट में 187 लोगों की मौत हुई थी। साल 2007 में लखनऊ-वाराणसी-फैजाबाद कोर्ट में धमाकों में 18 लोगों का मौत हुई थी। साल 2008 में जयपुर में सीरियल बम धमाकों में 80 लोग मारे गए थे। इसी साल अहमदाबाद में बम धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई। 13 सितंबर, 2008 को दिल्ली में फिर सीरियल ब्लास्ट हुआ, जिसमें 30 लोगों की मौत हुई।

    लेकिन इन हमलों के वक्त विदेशी टूरिस्ट निशाने पर कम थे। अब नई रणनीति के तहत ऐसी जगहों को चुना गया है जहां विदेशी टूरिस्ट ज्यादा से ज्यादा आते हों। जाहिर है, चार आतंकी संगठनों को एक मंच पर लाकर अब कोशिश भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करने की है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने इस खतरे से निपटने की बड़ी चुनौती है।

    Tags: Indian mujahideen

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