HM का एमनेस्टी को जवाब-मानवाधिकार के बहाने नहीं तोड़ा जा सकता देश का कानून

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया (Photo Source Firstpost)
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया (Photo Source Firstpost)

मंत्रालय (Home Ministry) की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि एमनेस्टी इंडिया (Amnesty International India) द्वारा अपना गया रुख और दिए गए बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, अतिश्योक्तिपूर्ण और सच्चाई से परे हैं. देश के कानून की अवहेलना के लिए मानवाधिकारों का बहाना नहीं बनाया जा सकता.

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  • Last Updated: September 29, 2020, 8:47 PM IST
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नई दिल्ली. देश के गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंडिया (Amnesty International India) के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि एमनेस्टी इंडिया द्वारा अपनाया गया रुख और दिए गए बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, अतिश्योक्तिपूर्ण और सच्चाई से परे हैं. देश के कानून की अवहेलना के लिए मानवाधिकारों का बहाना नहीं बनाया जा सकता.

पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा एफसीआरए स्वीकृति से इनकार किया जाता रहा
मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के अंतर्गत सिर्फ एक बार और वह भी 20 साल पहले (19.12.2000) स्वीकृति दी गई थी. तब से अभी तक एमनेस्टी इंटरनेशनल के कई बार आवेदन करने के बावजूद पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा एफसीआरए स्वीकृति से इनकार किया जाता रहा है, क्योंकि कानून के तहत वह इस स्वीकृति को हासिल करने के लिए पात्र नहीं है.

चार इकाइयों से बड़ी मात्रा में धनराशि ले चुकी एमनेस्टी
हालांकि, एफसीआरए नियमों को दरकिनार करते हुए एमनेस्टी यूके भारत में पंजीकृत चार इकाइयों से बड़ी मात्रा में धनराशि ले चुकी है और इसका वर्गीकरण प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के रूप में किया गया. इसके अलावा एमनेस्टी को एफसीआरए के अंतर्गत एमएचए की मंजूरी के बिना बड़ी मात्रा में विदेशी धन भेजा गया. दुर्भावना से गलत रूट से धन लेकर कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया.



पिछली सरकार ने भी की कार्रवाई
एमनेस्टी के इन अवैध कार्यों के चलते पिछली सरकार ने भी विदेश से धन प्राप्त करने के लिए उसके द्वारा बार-बार किए गए आवेदनों को खारिज कर दिया था. इस कारण पहले भी एमनेस्टी के भारतीय परिचालन को निलंबित कर दिया गया था. विभिन्न सरकारों के अंतर्गत इस एक समान और पूर्ण रूप से कानूनी दृष्टिकोण अपनाने से यह स्पष्ट होता है कि एमनेस्टी ने अपने परिचालन के लिए धनराशि हासिल करने को पूर्ण रूप से संदिग्ध प्रक्रियाएं अपनाईं.



ध्यान भटकाने की चाल
मानवीय कार्य और सत्य की ताकत के बारे में की जा रही बयानबाजी कुछ नहीं, सिर्फ अपनी गतिविधियों से ध्यान भटकाने की चाल है. एमनेस्टी स्पष्ट रूप से भारतीय कानूनों की अवहेलना में लिप्त रहा है. ऐसे बयान पिछले कुछ साल के दौरान की गईं अनियमितताओं और अवैध कार्यों की कई एजेंसियों द्वारा की गई जा रही जांच को प्रभावित करने के प्रयास भी हैं.

मानवीय कार्य जारी रखने के लिए स्वतंत्र
एमनेस्टी भारत में मानवीय कार्य जारी रखने के लिए स्वतंत्र है, जिस तरह से अन्य संगठन कर रहे हैं. हालांकि, भारत के कानून विदेशी चंदे से वित्तपोषित इकाइयों को घरेलू राजनीतिक बहस में दखल देने की अनुमति नहीं देते हैं.यह कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है और इसी तरह एमनेस्टी इंटरनेशनल पर भी लागू होगा.

भारत मुक्त प्रेस, स्वतंत्र न्यायपालिका और जीवंत घरेलू बहस के साथ संपन्न और बहुलतावादी लोकतांत्रिक संस्कृति वाला देश है. भारत के लोगों ने वर्तमान सरकार में अभूतपूर्व भरोसा दिखाया है. स्थानीय कानूनों के पालन में विफल रहने से एमनेस्टी को भारत के लोकतांत्रिक और बहुलतावादी स्वभाव पर टिप्पणियां करने का अधिकार नहीं मिल जाता है.
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