NPR के 'D' कॉलम को गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में किया डिकोड, दिया यह जवाब

NPR के 'D' कॉलम को गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में किया डिकोड, दिया यह जवाब
गृह मंत्री अमित शाह (File Photo)

गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि ' एनपीआर में कोई दस्तावेज (Documents In NPR) नहीं मांगा गया है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 13, 2020, 11:45 AM IST
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नई दिल्ली. संसद के दोनों सदनों राज्यसभा (Rajya Sabha) और लोकसभा (Lok Sabha) में नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर (NPR) पर गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने जवाब दिया. विपक्षी दलों द्वारा NPR और नागरिकता संसोधन कानून (CAA) पर किये गये सवालों पर शाह ने कहा कि 'अगर किसी ने डॉक्यूमेंट्स नहीं भी दिये तो उसे शक की निगाह से नहीं देखा जाएगा.' उन्होंने बताया कि 'किसी के भी नाम के आगे D नहीं लगाया जाएगा.' शाह ने यह भी आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) में किसी से कोई भी अतिरिक्त दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा. NPR में अपोजिशन की ओर से बड़ा सवाल था D कॉलम.

शाह ने कहा कि 'उन्होंने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि एनपीआर में कोई दस्तावेज नहीं मांगा गया है.' उन्होंने कहा, ‘देश में किसी को एनपीआर की प्रक्रिया से डरने की जरूरत नहीं है.’ गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि '‘डी’ एवं एनपीआर को लेकर यदि कोई संदेह है तो नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, गृह संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष आनंद शर्मा एवं जो भी सांसद चाहें, आकर उनसे चर्चा कर सकते हैं. वह उनके संदेह दूर करेंगे.'

'किसी के भी नाम के आगे 'D' नहीं लगाया जाएगा'
गृहमंत्री ने कहा कि 'एनपीआर और सीएए को लेकर सारे भ्रम को दूर करने का समय आ गया है. शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि 'एनपीआर में किसी से कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जाएगी.' वहीं गुरुवार को संसद में शाह ने कहा कि जिसको जो भी जानकारी देनी हो दे, किसी के भी नाम के आगे 'D' नहीं लगाया जाएगा.
दरअसल 'डी' कॉलम का जिक्र अपोजिशन ने कई बार किया था. अपोजिशन का दावा था कि जो लोग डॉक्यूमेंट नहीं देंगे, उनका नाम डी कॉलम में डाल दिया जाएगा. पूर्व लोकसभा सांसद मल्लिकार्जु खड़गे ने कहा था कि 'एनपीआर और जनगणना दोनों अलग हैं. केंद्र सरकार ने एनपीआर में माता-पिता के जन्‍मस्‍थान (Birth Place) और जन्‍मतिथि (Date of Birth) जैसे कई सवाल जोड़ दिए हैं. अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़ा वर्ग (BC) के अशिक्षित लोग अपने माता-पिता के जन्‍म स्‍थान व जन्‍मतिथि के बारे में नहीं बता पाएंगे. ऐसे में वे ऐसे लोगों के नाम के आगे 'संदिग्‍ध' (Questionable) लिख देंगे. फिर जब वे एनआरसी लागू करेंगे तो कहेंगे कि इस व्‍यक्ति की नागरिकता संदिग्‍ध है.'



NPR में शामिल होगा- लोगों का विवरण
एनपीआर का फुल फॉर्म नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर है. जनसंख्या रजिस्टर का मतलब यह है इसमें किसी गांव या ग्रामीण इलाके या कस्बे या वार्ड या किसी वार्ड या शहरी क्षेत्र के सीमांकित इलाके में रहने वाले लोगों का विवरण शामिल होगा.' वैसे देश में काफी भ्रम है कि पॉपुलेशन रजिस्टर (PR), नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR), नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (NRC) और नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटीजंस (NRIC) किस तरह संबंधित हैं. लेकिन एनपीआर और एनआरसी पूरी तरह अलग हैं. इसे जनगणना से भी जोड़कर देखा जा सकता है.

किस तरह एनपीआर लागू होगा
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में तीन प्रक्रिया होंगी. पहले चरण यानी अगले साल एक अप्रैल 2020 लेकर से 30 सितंबर के बीच केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे. वहीं दूसरा चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 के बीच पूरा होगा. तीसरे चरण में संशोधन की प्रक्रिया 1 मार्च से 5 मार्च के बीच होगी.

आजादी के बाद 1951 में पहली जनगणना हुई थी. 10 साल में होने वाली जनगणना अब तक 7 बार हो चुकी है. अभी 2011 में की गई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं और 2021 की जनगणना पर काम जारी है. बायोमेट्रिक डाटा में नागरिक का अंगूठे का निशान और अन्य जानकारी शामिल होगी.

क्या है NPR का उद्देश्य
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) का उद्देश्य इस प्रकार है-
- सरकारी योजनाओं के अन्तर्गत दिया जाने वाला लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और व्यक्ति की पहचान की जा सके.
- नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) द्वारा देश की सुरक्षा में सुधार किया जा सके और आतंकवादी गतिविधियों को रोकने में सहायता प्राप्त हो सके.
- देश के सभी नागरिकों को एक साथ जोड़ा जा सके.
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